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साइनोबैक्टीरिया (नील-हरित शैवाल) – संपूर्ण मार्गदर्शिका

किंगडम मोनेरा: साइनोबैक्टीरिया (Cyanobacteria)

NCERT आधारित संपूर्ण शैक्षणिक मॉड्यूल

1. सामान्य परिचय (General Introduction)

साइनोबैक्टीरिया, जिन्हें नील-हरित शैवाल (Blue-Green Algae – BGA) भी कहा जाता है, प्रोकैरियोटिक (Prokaryotic) जीवों का एक समूह है। ये पृथ्वी पर सबसे पहले ‘ऑक्सीजेनिक प्रकाश संश्लेषण’ (Oxygenic Photosynthesis) करने वाले जीव थे।

NCERT तथ्य: इनमें उच्च पादपों (Higher Plants) के समान ‘क्लोरोफिल-ए’ पाया जाता है। ये एककोशिकीय, तंतुमय (Filamentous) या कॉलोनी बनाकर रहने वाले जीव हैं।

कोशिका संरचना सिमुलेशन: साइनोबैक्टीरिया की कॉलोनी अक्सर एक जिलेटिनी आवरण (Mucilaginous Sheath) से ढकी होती है जो प्रदूषित पानी में फूलकर ‘ब्लूम’ (Bloom) बनाती है।

2. विशिष्ट संरचना: हेटरोसिस्ट (Heterocyst)

कुछ साइनोबैक्टीरिया जैसे नॉनस्टॉक (Nostoc) और एनाबीना (Anabaena) में वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करने के लिए विशिष्ट कोशिकाएं होती हैं जिन्हें हेटरोसिस्ट कहते हैं।

  • यह कोशिका मोटी दीवार वाली होती है।
  • इसमें ऑक्सीजन की अनुपस्थिति होती है, जिससे ‘नाइट्रोजनेज’ (Nitrogenase) एंजाइम सक्रिय रह सके।

3. पोषण और श्वसन (Nutrition & Respiration)

ये मुख्य रूप से स्वपोषी (Autotrophic) होते हैं।

प्रक्रिया विवरण
प्रकाश संश्लेषण ये सूर्य के प्रकाश का उपयोग कर जल (H₂O) को तोड़कर ऑक्सीजन (O₂) मुक्त करते हैं।
संचित भोजन इनमें भोजन ‘साइनोफाइसियन स्टार्च’ (Cyanophycean Starch) के रूप में संचित रहता है।

4. आर्थिक महत्व (Economic Importance)

साइनोबैक्टीरिया का मानव जीवन और प्रकृति में बहुत महत्व है:

  1. जैविक उर्वरक (Bio-fertilizers): धान के खेतों में नाइट्रोजन की आपूर्ति बढ़ाकर पैदावार बढ़ाते हैं।
  2. मिट्टी सुधार: ये बंजर और क्षारीय मिट्टी को उपजाऊ बनाने में सहायक हैं।
  3. भोजन के रूप में: स्पिरुलिना (Spirulina) में अत्यधिक प्रोटीन (लगभग 60-70%) होता है, जिसका उपयोग अंतरिक्ष यात्री और एथलीट करते हैं।
  4. प्रदूषण सूचक: पानी में इनकी अत्यधिक वृद्धि जल प्रदूषण का संकेत देती है।

5. प्रजनन (Reproduction)

इनमें लैंगिक प्रजनन (Sexual Reproduction) का पूर्ण अभाव होता है। ये मुख्य रूप से निम्नलिखित विधियों द्वारा वंश बढ़ाते हैं:

  • विखंडन (Binary Fission): कोशिका दो भागों में बंट जाती है।
  • फ्रेगमेंटेशन (Fragmentation): तंतु छोटे-छोटे टुकड़ों (Hormogonia) में टूट जाते हैं।
  • एकाइनीट्स (Akinetes): प्रतिकूल परिस्थितियों में बनने वाले मोटे दीवार वाले बीजाणु।
© 2026 शैक्षणिक सामग्री – कक्षा 2 से 5 और उच्च माध्यमिक स्तर हेतु उपयुक्त

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