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​इस काल में चारण कवियों ने राजाओं की प्रशंसा और वीरता का वर्णन किया।

कविप्रमुख रचनाएँ
चंदबरदाईपृथ्वीराज रासो (हिंदी का प्रथम महाकाव्य)
नरपति नाल्हबीसलदेव रासो
जगनिकपरमाल रासो (आल्हा-खण्ड)
अमीर खुसरोपहेलियाँ और मुकरियाँ
विद्यापतिकीर्तिलता, कीर्तिपताका, पदावली

​इसे हिंदी साहित्य का ‘स्वर्ण युग’ माना जाता है, जो दो धाराओं (सगुण और निर्गुण) में बँटा था।

निर्गुण धारा (ज्ञानाश्रयी एवं प्रेमाश्रयी)

  • कबीरदास: बीजक (साखी, सबद, रमैनी)
  • मलिक मोहम्मद जायसी: पद्मावत, अखरावट, आखिरी कलाम

सगुण धारा (रामभक्ति एवं कृष्णभक्ति)

  • तुलसीदास: रामचरितमानस, विनय पत्रिका, कवितावली, गीतावली
  • सूरदास: सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य लहरी
  • मीराबाई: नरसी जी का मायरा, राग गोविंद
  • रसखान: प्रेम वाटिका, सुजान रसखान

​इस काल में श्रृंगार रस और लक्षण ग्रंथों की प्रधानता रही।

कविप्रमुख रचनाएँ
केशवदासरामचंद्रिका, कविप्रिया, रसिकप्रिया
बिहारीबिहारी सतसई (700 से अधिक दोहे)
भूषणशिवराज भूषण, शिवा बावनी, छत्रसाल दशक
घनानंदसुजान सागर, विरह लीला

​यहाँ से खड़ी बोली का विकास हुआ और कविता के साथ-साथ गद्य की अन्य विधाएँ भी आईं।

भारतेंदु एवं द्विवेदी युग

  • भारतेंदु हरिश्चंद्र: भारत दुर्दशा, अंधेर नगरी, प्रेम फुलवारी
  • अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’: प्रियप्रवास (खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य)
  • मैथिलीशरण गुप्त: साकेत, भारत-भारती, यशोधरा

छायावाद (सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ)

  • जयशंकर प्रसाद: कामायनी, लहर, झरना, आँसू
  • सुमित्रानंदन पंत: पल्लव, चिदंबरा, वीणा
  • सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’: राम की शक्ति पूजा, अनामिका, परिमल
  • महादेवी वर्मा: यामा, दीपशिखा, नीरजा

प्रगतिवाद एवं प्रयोगवाद

  • रामधारी सिंह ‘दिनकर’: कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी, उर्वशी, हुंकार
  • अज्ञेय: आँगन के पार द्वार, कितनी नावों में कितनी बार
  • गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’: चाँद का मुँह टेढ़ा है
  • धर्मवीर भारती: कनुप्रिया, अंधा युग

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