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DPSP महा-क्विज और विस्तृत व्याख्या 🇮🇳

🇮🇳 भारतीय संविधान: राज्य के नीति निर्देशक तत्व (DPSP) 🇮🇳

📜 अनुच्छेद 36 से 51 तक का संपूर्ण विश्लेषण और 40 प्रश्नों का महा-संग्राम 📝

यहाँ 1500 शब्दों की विस्तृत व्याख्या दी गई है (संक्षिप्त रूप में मुख्य बिंदु यहाँ हैं, पूर्ण विवरण नीचे “विस्तृत व्याख्या” बटन पर क्लिक करें):

1. प्रस्तावना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (INTRODUCTION)

राज्य के नीति निर्देशक तत्व (Directive Principles of State Policy) भारतीय संविधान के भाग IV में अनुच्छेद 36 से 51 तक वर्णित हैं। इन्हें आयरलैंड के संविधान से लिया गया है। बी.आर. अंबेडकर ने इन्हें “भारतीय संविधान की अनूठी विशेषता” कहा था।

2. अनुच्छेद 36: राज्य की परिभाषा (DEFINITION)

अनुच्छेद 36 के अनुसार, “राज्य” शब्द का वही अर्थ है जो भाग III (मौलिक अधिकार) के अनुच्छेद 12 में दिया गया है। इसमें केंद्र, राज्य सरकारें और स्थानीय निकाय शामिल हैं।

3. अनुच्छेद 37: न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय न होना (NON-JUSTICIABLE NATURE)

यह अनुच्छेद स्पष्ट करता है कि नीति निर्देशक तत्व किसी भी न्यायालय द्वारा कानूनी रूप से लागू नहीं करवाए जा सकते, लेकिन देश के शासन में ये “आधारभूत” हैं और कानून बनाते समय इन्हें लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा।

4. अनुच्छेद 38: लोक कल्याण की अभिवृद्धि (WELFARE OF PEOPLE)

राज्य ऐसी सामाजिक व्यवस्था सुनिश्चित करेगा जहाँ सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय हो। यह आय, स्थिति और अवसरों की असमानता को कम करने का प्रयास करेगा।

5. अनुच्छेद 40: ग्राम पंचायतों का संगठन (VILLAGE PANCHAYATS)

गांधीवादी विचारधारा के तहत, राज्य ग्राम पंचायतों का गठन करेगा और उन्हें स्वशासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने हेतु आवश्यक शक्तियाँ प्रदान करेगा।

6. अनुच्छेद 44: समान नागरिक संहिता (UNIFORM CIVIL CODE)

राज्य भारत के समस्त राज्य क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (UCC) प्राप्त करने का प्रयास करेगा। वर्तमान में केवल गोवा में यह लागू है।

7. अनुच्छेद 50: न्यायपालिका का कार्यपालिका से पृथक्करण

राज्य की लोक सेवाओं में, न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग रखने के लिए राज्य कदम उठाएगा ताकि न्यायिक निष्पक्षता बनी रहे।

8. अनुच्छेद 51: अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा

भारत की विदेश नीति का आधार यही है। यह अंतर्राष्ट्रीय शांति, सुरक्षा, राष्ट्रों के बीच न्यायपूर्ण संबंधों और अंतर्राष्ट्रीय विवादों को मध्यस्थता से सुलझाने पर जोर देता है।

(नोट: पूर्ण 1500+ शब्दों की व्याख्या के लिए कृपया नीचे स्क्रॉल करें या PDF डाउनलोड विकल्प देखें। यहाँ मुख्य 40 प्रश्नों की क्विज तैयार है!)

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प्रश्न यहाँ दिखेगा…

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Searchable TitleUltimate Guide to DPSP: Articles 36 to 51 with 40 MCQ Quizभारतीय संविधान के नीति निर्देशक तत्व: अनुच्छेद 36-51 एवं 40 प्रश्न
Focus KeywordDirective Principles of State Policy (DPSP)राज्य के नीति निर्देशक तत्व
Secondary KeywordsArticle 36-51, Indian Constitution Part 4, DPSP Quiz, UPSC Indian Polityअनुच्छेद 36 से 51, संविधान भाग 4, DPSP प्रश्नोत्तरी, राजनीति विज्ञान
Meta DescriptionComprehensive

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  • ARTICLE 36: DEFINITION OF THE STATE.
  • ARTICLE 37: APPLICATION OF THE PRINCIPLES CONTAINED IN THIS PART.
  • ARTICLE 38: STATE TO SECURE A SOCIAL ORDER FOR THE PROMOTION OF WELFARE OF THE PEOPLE.
  • ARTICLE 39: CERTAIN PRINCIPLES OF POLICY TO BE FOLLOWED BY THE STATE.
  • ARTICLE 39A: EQUAL JUSTICE AND FREE LEGAL AID.
  • ARTICLE 40: ORGANISATION OF VILLAGE PANCHAYATS.
  • ARTICLE 41: RIGHT TO WORK, TO EDUCATION AND TO PUBLIC ASSISTANCE IN CERTAIN CASES.
  • ARTICLE 42: PROVISION FOR JUST AND HUMANE CONDITIONS OF WORK AND MATERNITY RELIEF.
  • ARTICLE 43: LIVING WAGE, ETC., FOR WORKERS.
  • ARTICLE 43A: PARTICIPATION OF WORKERS IN MANAGEMENT OF INDUSTRIES.
  • ARTICLE 43B: PROMOTION OF CO-OPERATIVE SOCIETIES.
  • ARTICLE 44: UNIFORM CIVIL CODE FOR THE CITIZENS.
  • ARTICLE 45: PROVISION FOR EARLY CHILDHOOD CARE AND EDUCATION TO CHILDREN BELOW THE AGE OF SIX YEARS.
  • ARTICLE 46: PROMOTION OF EDUCATIONAL AND ECONOMIC INTERESTS OF SCHEDULED CASTES, SCHEDULED TRIBES AND OTHER WEAKER SECTIONS.
  • ARTICLE 47: DUTY OF THE STATE TO RAISE THE LEVEL OF NUTRITION AND THE STANDARD OF LIVING AND TO IMPROVE PUBLIC HEALTH.
  • ARTICLE 48: ORGANISATION OF AGRICULTURE AND ANIMAL HUSBANDRY.
  • ARTICLE 48A: PROTECTION AND IMPROVEMENT OF ENVIRONMENT AND SAFEGUARDING OF FORESTS AND WILD LIFE.
  • ARTICLE 49: PROTECTION OF MONUMENTS AND PLACES AND OBJECTS OF NATIONAL IMPORTANCE.
  • ARTICLE 50: SEPARATION OF JUDICIARY FROM EXECUTIVE.
  • ARTICLE 51: PROMOTION OF INTERNATIONAL PEACE AND SECURITY.
  • स्रोत: ये आयरलैंड के संविधान से लिए गए हैं।
  • प्रकृति: ये ‘गैर-न्यायसंगत’ (Non-justiciable) हैं, यानी इनके उल्लंघन पर आप अदालत नहीं जा सकते, लेकिन ये देश के शासन के लिए मौलिक हैं।
  • वर्गीकरण: अध्ययन की सुविधा के लिए इन्हें तीन भागों में बांटा जाता है: Socialistic (समाजवादी), Gandhian (गांधीवादी), और Liberal-Intellectual (उदार-बौद्धिक)।

नीति निदेशक तत्वों को आयरलैंड के संविधान से लिया गया है। इनका मुख्य उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना करना है। जहाँ मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) राजनीतिक लोकतंत्र सुनिश्चित करते हैं, वहीं DPSP न्यायपूर्ण समाज की रचना पर बल देते हैं।

  • गैर-न्यायोचित प्रकृति: अनुच्छेद 37 स्पष्ट करता है कि इन्हें न्यायालय द्वारा लागू नहीं कराया जा सकता, लेकिन ये देश के शासन में “मूलभूत” हैं।

2. अनुच्छेदों का विस्तृत विवरण

अनुच्छेद 36: परिभाषा

​यह अनुच्छेद ‘राज्य’ की परिभाषा देता है। यहाँ ‘राज्य’ का वही अर्थ है जो भाग 3 (मौलिक अधिकार) के अनुच्छेद 12 में है—यानी केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, संसद, विधानमंडल और सभी स्थानीय अधिकारी।

अनुच्छेद 37: तत्वों का लागू होना

​यह अनुच्छेद कहता है कि इस भाग में दिए गए सिद्धांत किसी भी अदालत द्वारा लागू करने योग्य नहीं होंगे, लेकिन राज्य का यह कर्तव्य होगा कि वह कानून बनाते समय इन सिद्धांतों को लागू करे।

अनुच्छेद 38: सामाजिक व्यवस्था (लोक कल्याण)

  • 38(1): राज्य ऐसी सामाजिक व्यवस्था बनाएगा जहाँ सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित हो।
  • 38(2): राज्य आय, स्थिति और अवसरों की असमानता को कम करने का प्रयास करेगा (44वें संशोधन 1978 द्वारा जोड़ा गया)।

अनुच्छेद 39: राज्य द्वारा अपनाई जाने वाली नीतियां

​यह DPSP का सबसे महत्वपूर्ण अनुच्छेद है। इसमें राज्य को निम्नलिखित निर्देश दिए गए हैं:

  • ​सभी नागरिकों (स्त्री और पुरुष) को जीविका के पर्याप्त साधन प्राप्त करने का अधिकार।
  • ​देश के भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण इस प्रकार हो कि सामूहिक हित सध सके।
  • ​धन और उत्पादन के साधनों का संकेंद्रण (Concentration) न हो।
  • समान कार्य के लिए समान वेतन (पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए)।
  • ​श्रमिकों और बच्चों के स्वास्थ्य और शक्ति का संरक्षण।

अनुच्छेद 39A: समान न्याय और निःशुल्क कानूनी सहायता

​(42वें संशोधन, 1976 द्वारा जोड़ा गया) राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि गरीबों को न्याय पाने के लिए वित्तीय बाधा न आए। इसके लिए ‘मुफ्त कानूनी सहायता’ प्रदान की जाएगी।

अनुच्छेद 40: ग्राम पंचायतों का गठन

​राज्य ग्राम पंचायतों को संगठित करेगा और उन्हें ऐसी शक्तियाँ देगा जिससे वे स्वशासन की इकाइयों के रूप में कार्य कर सकें। (इसी के आधार पर 73वां संशोधन हुआ)।

अनुच्छेद 41: काम, शिक्षा और लोक सहायता का अधिकार

​बेरोजगारी, बुढ़ापे, बीमारी और विकलांगता की स्थिति में राज्य अपनी आर्थिक क्षमता के भीतर काम पाने, शिक्षा पाने और सार्वजनिक सहायता पाने का अधिकार सुनिश्चित करेगा।

अनुच्छेद 42: काम की मानवीय दशाएं और प्रसूति सहायता

​राज्य कार्यस्थलों पर न्यायसंगत और मानवीय परिस्थितियां सुनिश्चित करेगा और महिलाओं के लिए ‘प्रसूति सहायता’ (Maternity Relief) का प्रबंध करेगा।

अनुच्छेद 43: निर्वाह मजदूरी और कुटीर उद्योग

​राज्य श्रमिकों को उपयुक्त मजदूरी, जीवन स्तर और सामाजिक-सांस्कृतिक अवसर प्रदान करने का प्रयास करेगा। यह ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने पर भी जोर देता है।

  • अनुच्छेद 43A: उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना।
  • अनुच्छेद 43B: सहकारी समितियों (Co-operative Societies) को बढ़ावा देना।

अनुच्छेद 44: समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code)

​राज्य पूरे भारत में सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करेगा। वर्तमान में यह केवल गोवा में प्रभावी है।

अनुच्छेद 45: बच्चों के लिए अनिवार्य शिक्षा

​राज्य 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों की देखभाल और शिक्षा (Early Childhood Care) का प्रयास करेगा। (86वें संशोधन के बाद 6-14 वर्ष के बच्चों की शिक्षा अनुच्छेद 21A के तहत मौलिक अधिकार बन गई है)।

अनुच्छेद 46: SC, ST और कमजोर वर्गों का हित

​राज्य अनुसूचित जातियों, जनजातियों और अन्य कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को विशेष सावधानी से बढ़ावा देगा और उन्हें सामाजिक अन्याय से बचाएगा।

अनुच्छेद 47: पोषण स्तर और सार्वजनिक स्वास्थ्य

​राज्य लोगों के जीवन स्तर और स्वास्थ्य को सुधारने का प्रयास करेगा। इसी के तहत नशीली दवाओं और शराब पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया गया है।

अनुच्छेद 48: कृषि और पशुपालन

​राज्य आधुनिक और वैज्ञानिक आधार पर कृषि और पशुपालन को संगठित करेगा। विशेष रूप से गायों, बछड़ों और अन्य दुधारू पशुओं के वध पर रोक लगाएगा।

  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण का संरक्षण और सुधार तथा वनों और वन्यजीवों की रक्षा करना।

अनुच्छेद 49: राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों का संरक्षण

​संसद द्वारा घोषित राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों, स्थानों और वस्तुओं को विरूपण या विनाश से बचाना राज्य की जिम्मेदारी है।

अनुच्छेद 50: न्यायपालिका का कार्यपालिका से पृथक्करण

​राज्य की सार्वजनिक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका (Executive) से अलग रखने के लिए राज्य कदम उठाएगा ताकि न्यायिक स्वतंत्रता बनी रहे।

अनुच्छेद 51: अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा

​यह भारत की विदेश नीति का आधार है। राज्य का कर्तव्य होगा:

  1. ​अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना।
  2. ​राष्ट्रों के बीच न्यायपूर्ण और सम्मानजनक संबंध बनाए रखना।
  3. ​अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और संधियों का सम्मान करना।
  4. ​विवादों को मध्यस्थता द्वारा निपटाने के लिए प्रोत्साहित करना।

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