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मृदा अपरदन: एक विस्तृत अध्ययन

मृदा अपरदन (Soil Erosion)

प्रकृति की अनमोल धरोहर ‘मिट्टी’ को नष्ट होने से बचाएं

1. मृदा अपरदन का विस्तृत अर्थ

मृदा अपरदन एक ऐसी प्राकृतिक और भौतिक प्रक्रिया है जिसमें पृथ्वी की सबसे ऊपरी और सबसे उपजाऊ परत (Topsoil) विभिन्न प्राकृतिक कारकों जैसे कि गतिशील जल, पवन, और गुरुत्वाकर्षण, या मानवीय हस्तक्षेप के कारण अपने मूल स्थान से हटकर दूसरे स्थान पर चली जाती है। मिट्टी की यह ऊपरी परत ही पौधों के विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करती है; इसके नष्ट होने का अर्थ है भूमि का बंजर हो जाना।

2. अपरदन के प्रमुख प्रकार

A. जल द्वारा अपरदन

  • परत अपरदन (Sheet Erosion): जब भारी बारिश के बाद पानी पूरी सतह पर एक चादर की तरह बहता है, तो मिट्टी की ऊपरी महीन परत बह जाती है। यह किसान को पता भी नहीं चलता लेकिन भूमि की उर्वरता समाप्त कर देता है।
  • क्षुद्र सरिता अपरदन (Rill Erosion): ढलानों पर पानी की छोटी-छोटी धारियां या नालियां बन जाती हैं।
  • अवनलिका अपरदन (Gully Erosion): जब छोटी नालियां बड़ी होकर गहरी खाइयों में बदल जाती हैं, जिससे पूरी जमीन खेती के अयोग्य हो जाती है (जैसे चंबल के बीहड़)।

B. वायु द्वारा अपरदन

रेतीले और शुष्क क्षेत्रों में जहां वनस्पति कम होती है, वहां तेज हवाएं मिट्टी के कणों को उड़ा ले जाती हैं। यह मुख्य रूप से पश्चिमी राजस्थान जैसे मरुस्थलीय इलाकों में देखा जाता है।

3. अपरदन के विनाशकारी कारण

मृदा अपरदन के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित गतिविधियां उत्तरदायी हैं:

  • वनों की अंधाधुंध कटाई: पेड़ों की जड़ें मिट्टी को एक जाल की तरह बांधकर रखती हैं। पेड़ कटने से मिट्टी ढीली होकर पानी और हवा के साथ बहने के लिए स्वतंत्र हो जाती है।
  • अत्यधिक पशुचारण: जब पशु घास को जड़ों सहित चर लेते हैं, तो जमीन की पकड़ कमजोर हो जाती है और वह बाहरी कारकों के प्रति असुरक्षित हो जाती है।
  • गलत कृषि पद्धतियां: ढलान की दिशा में जुताई करना, खेतों को फसल कटने के बाद खाली छोड़ देना और एक ही प्रकार की फसल बार-बार उगाने से मिट्टी की संरचना बिगड़ जाती है।
  • औद्योगीकरण और खनन: सड़क निर्माण और खदानों के लिए पहाड़ों को खोदना प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ देता है।

4. मृदा संरक्षण के प्रभावी उपाय

तकनीक कैसे काम करती है?
वृक्षारोपण (Afforestation) बड़े पैमाने पर पेड़ लगाना। पेड़ की पत्तियां बारिश की बूंदों की मार कम करती हैं और जड़ें मिट्टी को पकड़ती हैं।
समुच्च जुताई (Contour Plowing) पहाड़ी ढलानों पर ढलान के आड़े जुताई करना ताकि पानी की गति धीमी हो सके।
पट्टीदार खेती (Strip Cropping) फसलों के बीच में घास की पट्टियां उगाना, जो हवा और पानी के वेग को रोकती हैं।
रक्षक मेखला (Shelter Belts) खेतों के किनारों पर पेड़ों की कतारें लगाना ताकि हवा की गति कम की जा सके (मरुस्थलीय क्षेत्रों के लिए सर्वोत्तम)।

💡 महत्वपूर्ण सुझाव (Important Tips)

मृदा संरक्षण केवल सरकार का नहीं, बल्कि हम सबका कर्तव्य है। निम्नलिखित बातों का पालन करें:

  1. खेतों के चारों ओर ऊंची मेड़बंदी जरूर करें ताकि वर्षा का जल मिट्टी न ले जा सके।
  2. फसल चक्र (Crop Rotation) अपनाएं; एक बार अनाज तो दूसरी बार दलहन (दालें) उगाएं।
  3. जैविक खाद और कंपोस्ट का प्रयोग करें, जिससे मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़े।
  4. अपने जन्मदिन या किसी विशेष अवसर पर कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाएं।

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