भारत में मंत्री परिषद (Council of Ministers) सरकार की वास्तविक कार्यकारी संस्था है, जो देश के शासन का संचालन करती है। भारतीय संसदीय प्रणाली (Westminster Model) में राष्ट्रपति केवल नाममात्र का प्रमुख होता है, जबकि वास्तविक शक्तियां प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्री परिषद में निहित होती हैं।
यहाँ इसका विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. संवैधानिक आधार (Constitutional Basis)
जैसा कि हमने पहले चर्चा की, दो मुख्य अनुच्छेद इसे परिभाषित करते हैं:
- अनुच्छेद 74: राष्ट्रपति की सहायता और सलाह के लिए एक मंत्री परिषद होगी। राष्ट्रपति इस सलाह के अनुसार ही कार्य करेंगे (42वें और 44वें संशोधन के बाद यह अनिवार्य कर दिया गया है)।
- अनुच्छेद 75: मंत्रियों की नियुक्ति, कार्यकाल, उत्तरदायित्व, योग्यता, शपथ और वेतन से संबंधित है।
2. मंत्री परिषद की संरचना (Composition)
मंत्री परिषद में मंत्रियों की तीन श्रेणियां होती हैं:
| कैबिनेट मंत्री (Cabinet Ministers) | ये सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों (जैसे गृह, रक्षा, वित्त, विदेश) के प्रमुख होते हैं। सरकार की नीतियों के निर्धारण में इनकी मुख्य भूमिका होती है। |
| राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) (Ministers of State – Independent Charge) | ये अपने विभाग के प्रमुख होते हैं और सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते हैं। ये कैबिनेट की बैठकों में केवल तभी भाग लेते हैं जब उन्हें विशेष रूप से आमंत्रित किया जाए। |
| राज्य मंत्री (Ministers of State) | ये कैबिनेट मंत्रियों की सहायता के लिए नियुक्त किए जाते हैं। ये स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं करते बल्कि कैबिनेट मंत्रियों के अधीन होते हैं। |
भारत की मंत्री परिषद: विस्तृत व्याख्या (अनुच्छेद 74 एवं 75)
1. परिचय और संवैधानिक ढांचा
भारतीय संविधान ने ब्रिटेन की तर्ज पर ‘संसदीय शासन प्रणाली’ को अपनाया है। इसमें राष्ट्रपति राज्य का औपचारिक प्रमुख होता है, जबकि प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्री परिषद वास्तविक कार्यकारी शक्ति का प्रयोग करती है। अनुच्छेद 74 और 75 इस व्यवस्था के आधार स्तंभ हैं।
2. अनुच्छेद 74: राष्ट्रपति को सहायता और सलाह
- अनिवार्यता: अनुच्छेद 74(1) स्पष्ट करता है कि राष्ट्रपति की सहायता के लिए एक मंत्री परिषद होगी जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा। 42वें संशोधन (1976) ने यह अनिवार्य कर दिया कि राष्ट्रपति मंत्री परिषद की सलाह के अनुसार ही कार्य करेंगे।
- पुनर्विचार की शक्ति: 44वें संशोधन (1978) ने राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया कि वे सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकते हैं, लेकिन दोबारा दी गई सलाह को मानना उनके लिए बाध्यकारी होगा।
- न्यायिक जांच से मुक्ति: अनुच्छेद 74(2) के अनुसार, मंत्रियों द्वारा राष्ट्रपति को क्या सलाह दी गई, इसकी जांच किसी भी न्यायालय में नहीं की जा सकती।
3. अनुच्छेद 75: मंत्रियों के बारे में अन्य उपबंध
यह अनुच्छेद नियुक्तियों और उत्तरदायित्वों का लेखा-जोखा है:
- नियुक्ति: प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करेंगे और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर होगी।
- 15% की सीमा: 91वें संशोधन (2003) द्वारा मंत्रियों की संख्या लोकसभा की कुल संख्या के 15% तक सीमित कर दी गई है।
- सामूहिक उत्तरदायित्व: यह सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है। पूरी मंत्री परिषद ‘लोकसभा’ के प्रति जवाबदेह होती है।
- शपथ और वेतन: राष्ट्रपति मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाते हैं।
4. मंत्री परिषद बनाम मंत्रिमंडल (Cabinet)
मंत्री परिषद एक बड़ा निकाय है जिसमें कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और उप-मंत्री शामिल होते हैं। वहीं, कैबिनेट एक छोटा और अधिक शक्तिशाली समूह है जो केवल वरिष्ठ मंत्रियों से बना होता है और नीतिगत निर्णय लेता है।
🇮🇳 भारतीय संविधान: अनुच्छेद 74-75 महा-क्विज 👨⚖️
#IndianPolity #ConstitutionOfIndia #UPSCPreparation #Article74 #Article75 #CouncilOfMinisters #SSCExams #LegalEducation #IndianGovernment #PolityQuiz #EducationIndia
#भारतीय_राजव्यवस्था #भारतीय_संविधान #यूपीएससी #अनुच्छेद74 #अनुच्छेद75 #मंत्री_परिषद #प्रतियोगी_परीक्षा #शिक्षा #भारत_सरकार #क्विज