🇮🇳 हमारे अतीत – 1 (कक्षा 6) 🇮🇳
अध्याय 6: नए प्रश्न नए विचार
1. अनघा निकली सैर पर 🛤️
अनघा आज बहुत खुश थी। वह पहली बार अपने स्कूल के साथ सैर पर जा रही थी। इसके लिए वह पुणे (महाराष्ट्र) से वाराणसी (उत्तर प्रदेश) जाने वाली ट्रेन में सवार हुई। उसकी माँ ने उसे स्टेशन पर छोड़ते हुए शिक्षिका से कहा, “बच्चों को बुद्ध के बारे में बताने के साथ-साथ उन्हें सारनाथ दिखाने भी ले जाइएगा।” 👩🏫✨
यह यात्रा अनघा के लिए सिर्फ एक सैर नहीं, बल्कि जिज्ञासा की एक नई शुरुआत थी। अनघा ने सोचा कि आखिर बुद्ध कौन थे और सारनाथ में ऐसा क्या है? यह कहानी हमें बताती है कि कैसे पुराने समय में लोग जीवन के रहस्यों को जानने के लिए लंबी यात्राएं करते थे। अनघा की तरह ही उस समय के लोग भी दुखों से मुक्ति और ज्ञान की खोज में निकले थे। इस अध्याय में हम उन विचारों को समझेंगे जिन्होंने भारतीय इतिहास की धारा बदल दी। 📜🧭
2. बुद्ध की कहानी (विस्तार से) ☸️
बुद्ध का जन्म और प्रारंभिक जीवन
बौद्ध धर्म के संस्थापक सिद्धार्थ थे, जिन्हें **गौतम** के नाम से भी जाना जाता है। उनका जन्म लगभग 2500 वर्ष पूर्व हुआ था। यह वह समय था जब लोगों के जीवन में तेज़ी से परिवर्तन हो रहे थे। सिद्धार्थ क्षत्रिय थे और ‘शाक्य’ नामक एक छोटे से गण से संबंधित थे। युवावस्था में ही ज्ञान की खोज में उन्होंने घर के सुखों को छोड़ दिया। 🏰🚶♂️
ज्ञान की प्राप्ति (बोधगया)
अनेक वर्षों तक भ्रमण करने और विभिन्न विचारकों से चर्चा करने के बाद, उन्होंने स्वयं ही रास्ता ढूँढने का निश्चय किया। अंततः बिहार के **बोधगया** में एक पीपल के पेड़ के नीचे कई दिनों तक तपस्या करने के बाद उन्हें ज्ञान (Enlightenment) प्राप्त हुआ। इसके बाद से वे ‘बुद्ध’ के रूप में जाने गए, जिसका अर्थ है ‘बुद्धिमान व्यक्ति’। 🌳🧘♂️
प्रथम उपदेश और शिक्षाएं
ज्ञान प्राप्ति के बाद वे वाराणसी के पास स्थित **सारनाथ** गए, जहाँ उन्होंने पहली बार उपदेश दिया। बुद्ध ने सिखाया कि यह जीवन कष्टों और दुखों से भरा है, और ऐसा हमारी इच्छाओं और लालसाओं (तृष्णा) के कारण होता है। उन्होंने ‘आत्म-संयम’ अपनाकर इस तृष्णा से मुक्ति पाने का मार्ग बताया। उन्होंने लोगों को दयालु होने और जानवरों के जीवन का भी आदर करने की शिक्षा दी। 🗣️🐾
बुद्ध का निर्वाण
बुद्ध ने अपनी शिक्षाएं उस समय की सामान्य भाषा **’प्राकृत’** में दीं, ताकि आम लोग भी उनके संदेश को समझ सकें। उन्होंने कहा कि लोग उनके उपदेशों को केवल इसलिए न मानें कि वे उनके हैं, बल्कि उन्हें अपने विवेक से जाँचें। उन्होंने अपना शेष जीवन पैदल चलकर एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करने और लोगों को शिक्षा देने में व्यतीत किया। कुशीनारा (उत्तर प्रदेश) में उनकी मृत्यु हुई, जिसे ‘महापरिनिर्वाण’ कहा जाता है। ✨🙏
🎨 कार्टून कोना: बुद्ध मुस्कुराते हुए एक पेड़ के नीचे बैठे हैं और आसपास हिरण खेल रहे हैं।
3. किसा गौतमी की कहानी 👩👦
यह बुद्ध की एक प्रसिद्ध कहानी है। एक समय ‘किसा गौतमी’ नामक एक स्त्री का पुत्र मर गया। वह इतनी दुखी थी कि अपने बच्चे को गोद में लेकर गलियों में घूमने लगी और लोगों से उसे जीवित करने की प्रार्थना करने लगी। एक भला व्यक्ति उसे बुद्ध के पास ले गया। 😔
बुद्ध ने कहा, “मुझे एक मुट्ठी सरसों के बीज ला कर दो, मैं तुम्हारे बेटे को जीवित कर दूँगा।” लेकिन एक शर्त है—बीज उस घर से होने चाहिए जहाँ किसी की मृत्यु न हुई हो। गौतमी घर-घर गई, लेकिन उसे ऐसा कोई घर नहीं मिला जहाँ किसी प्रियजन (पिता, माता, भाई, बहन, पति या बच्चा) की मृत्यु न हुई हो। इससे उसे समझ आया कि मृत्यु जीवन का अटल सत्य है और यह सभी के लिए अनिवार्य है। 🕯️
4. उपनिषद 📚
जिस समय बुद्ध उपदेश दे रहे थे, उसी समय (या उससे थोड़ा पहले) दूसरे अन्य विचारक भी कठिन प्रश्नों के उत्तर ढूँढने की कोशिश कर रहे थे। वे मृत्यु के बाद के जीवन और यज्ञों की उपयोगिता के बारे में जानना चाहते थे। इनमें से अधिकांश का मानना था कि विश्व में कुछ तो ऐसा है जो स्थायी है और मृत्यु के बाद भी बचा रहता है। उन्होंने इसे **’आत्मा’** तथा **’ब्रह्म’** (सार्वभौमिक आत्मा) के रूप में वर्णित किया। 💭
इन विचारों का संकलन **’उपनिषदों’** में किया गया है। ‘उपनिषद’ का शाब्दिक अर्थ है—’गुरु के समीप बैठना’। इन ग्रंथों में अध्यापकों और विद्यार्थियों के बीच बातचीत का विवरण है। इनमें गार्गी जैसी महिला विचारकों और सत्यकाम जाबाल जैसे दार्शनिकों का भी उल्लेख मिलता है। 🧘♀️📖
5. जैन धर्म (विस्तार से) 🚩
वर्धमान महावीर
इसी युग में यानी लगभग 2500 वर्ष पूर्व, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर **वर्धमान महावीर** ने भी अपने विचारों का प्रसार किया। वे वज्जी संघ के ‘लिच्छवी’ कुल के एक क्षत्रिय राजकुमार थे। 30 वर्ष की आयु में उन्होंने घर छोड़ दिया और जंगल में रहने लगे। 12 वर्षों तक उन्होंने कठिन और एकाकी जीवन व्यतीत किया, जिसके बाद उन्हें ‘कैवल्य’ (ज्ञान) प्राप्त हुआ। 🏹🦁
जैन धर्म की शिक्षाएं
उनकी शिक्षा सरल थी: “सत्य जानने की इच्छा रखने वाले प्रत्येक स्त्री व पुरुष को अपना घर छोड़ देना चाहिए।” उन्होंने **’अहिंसा’** के नियम का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया, जिसका अर्थ है—किसी भी जीव को न तो कष्ट देना और न ही उसकी हत्या करना। महावीर के अनुसार सभी जीव जीना चाहते हैं। उन्होंने भी अपनी शिक्षा ‘प्राकृत’ भाषा में दी। 🚫🐜
जैन शब्द का अर्थ और जीवन शैली
‘जैन’ शब्द ‘जिन’ शब्द से निकला है, जिसका अर्थ है ‘विजेता’। महावीर के अनुयायियों को ‘जैन’ कहा गया। उन्हें बहुत ही संयमित जीवन जीना पड़ता था, यहाँ तक कि भोजन के लिए भिक्षा मांगनी पड़ती थी। उन्हें पूरी तरह ईमानदार होना पड़ता था और चोरी न करने की सख्त हिदायत थी। उन्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता था और पुरुषों को वस्त्रों सहित सब कुछ त्यागना पड़ता था। 🧘♂️
अनुयायी और प्रसार
मुख्यतः व्यापारियों ने जैन धर्म का समर्थन किया। किसानों के लिए इन नियमों का पालन करना कठिन था क्योंकि फसल की रक्षा के लिए उन्हें कीड़े-मकोड़ों को मारना पड़ता था। बाद की सदियों में जैन धर्म उत्तर भारत के साथ-साथ गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक में भी फैल गया। महावीर की शिक्षाएं कई शताब्दियों तक मौखिक रूप से चलती रहीं, जिन्हें बाद में वल्लभी (गुजरात) में लिपिबद्ध किया गया। 🏛️
6. संघ 🤝
महावीर और बुद्ध दोनों का मानना था कि घर का त्याग करने पर ही सच्चे ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है। ऐसे लोगों के लिए उन्होंने **’संघ’** नामक संगठन बनाया, जहाँ घर का त्याग करने वाले लोग एक साथ रह सकें। संघ में रहने वाले बौद्ध भिक्षुओं के लिए बनाए गए नियम ‘विनयपिटक’ नामक ग्रंथ में मिलते हैं। 🏢
संघ में सभी जातियों के लोग प्रवेश ले सकते थे, परंतु बच्चों को अपने माता-पिता से और दासों को अपने स्वामियों से अनुमति लेनी पड़ती थी। यहाँ लोग सादा जीवन जीते थे और अधिकांश समय ध्यान में बिताते थे। वे शहरों और गाँवों में जाकर भोजन मांगते थे, इसलिए उन्हें ‘भिक्खु’ (भिखारी) कहा गया। 🍚🧔
7. विहार 🏠
जैन और बौद्ध भिक्षु पूरे साल एक स्थान से दूसरे स्थान पर उपदेश देने के लिए घूमते रहते थे। केवल वर्षा ऋतु में, जब यात्रा करना कठिन होता था, वे एक स्थान पर रुकते थे। शुरू में ये अस्थायी शरणस्थलों में रहते थे, लेकिन बाद में उनके लिए स्थायी निवास बनाए गए, जिन्हें **’विहार’** कहा गया। 🌧️⛰️
आरंभिक विहार लकड़ी के बनाए गए और बाद में ईंटों के। पश्चिमी भारत में कुछ विहार पहाड़ियों को खोदकर भी बनाए गए (जैसे कार्ले की गुफाएं)। धनी व्यापारियों या राजाओं द्वारा दान की गई भूमि पर विहारों का निर्माण होता था। स्थानीय लोग भिक्षुओं के लिए भोजन, वस्त्र और दवाइयां लाते थे, और बदले में भिक्षु उन्हें शिक्षा देते थे। 🧱🙏
🎨 कार्टून कोना: पहाड़ के अंदर बनी एक सुंदर गुफा (विहार) और बाहर बारिश हो रही है, अंदर भिक्षु शांति से पढ़ रहे हैं।
🇮🇳 कक्षा 6 इतिहास: अभ्यास एवं क्विज़ 🇮🇳
अध्याय 6 – नए प्रश्न नए विचार
📝 अभ्यास के प्रश्न (विस्तार से उत्तर)
1. बुद्ध ने लोगों तक अपने विचारों का प्रसार करने के लिए किन-किन बातों पर जोर दिया? ☸️
बुद्ध ने अपने विचारों को फैलाने के लिए अत्यंत सरल और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने सबसे पहले ‘प्राकृत’ भाषा का प्रयोग किया, जो उस समय के आम लोगों की भाषा थी, ताकि उनका संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुँच सके। उन्होंने आत्म-संयम पर जोर दिया और बताया कि जीवन के कष्टों का मुख्य कारण हमारी अंतहीन इच्छाएँ या ‘तृष्णा’ हैं। बुद्ध ने केवल उपदेश ही नहीं दिए, बल्कि लोगों को प्रोत्साहित किया कि वे उनके विचारों को अंधे होकर न मानें, बल्कि अपने विवेक और तर्क से उन्हें जाँचें। उन्होंने अहिंसा और दयालुता का मार्ग दिखाया, जिसमें मनुष्यों के साथ-साथ जानवरों के प्रति भी करुणा शामिल थी। उन्होंने सादगी और नैतिकता को जीवन का आधार बनाया ताकि लोग शांतिपूर्ण जीवन जी सकें। 🗣️🧘♂️
2. उपनिषदों के विचारक किन प्रश्नों का उत्तर देना चाहते थे? 📚
उपनिषदों के विचारक आध्यात्मिक और दार्शनिक रहस्यों की गहराई में जाना चाहते थे। उनके मुख्य प्रश्न जीवन और मृत्यु से जुड़े थे। वे यह जानना चाहते थे कि क्या मृत्यु के बाद भी कुछ शेष रहता है? उन्होंने ‘आत्मा’ और ‘ब्रह्म’ की अवधारणा पर गहराई से विचार किया और निष्कर्ष निकाला कि अंततः आत्मा और ब्रह्म एक ही हैं। वे यज्ञों की उपयोगिता और उनके पीछे के वास्तविक अर्थों को समझना चाहते थे। उनके विचार यह दर्शाते हैं कि वे केवल कर्मकांडों से संतुष्ट नहीं थे, बल्कि ब्रह्मांड के स्थायी तत्व की खोज में थे। इन विचारकों में राजाओं और ब्राह्मणों के साथ-साथ गार्गी जैसी महिला विचारकों और सत्यकाम जाबाल जैसे जिज्ञासुओं का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 💭✨
3. महावीर की प्रमुख शिक्षाएँ क्या थीं? 🚩
वर्धमान महावीर की शिक्षाएँ सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह पर आधारित थीं। उन्होंने कहा कि “सत्य जानने की इच्छा रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अपना घर छोड़ देना चाहिए।” उनकी सबसे प्रमुख शिक्षा ‘अहिंसा’ का कड़ाई से पालन करना था; उनके अनुसार किसी भी जीव को कष्ट देना या उसकी हत्या करना पाप है क्योंकि सभी जीव जीना चाहते हैं। महावीर ने पूर्ण ईमानदारी और चोरी न करने (अस्तेय) पर जोर दिया। उन्होंने अपने अनुयायियों को सादा जीवन जीने, भिक्षा मांगकर भोजन करने और ब्रह्मचर्य का पालन करने का निर्देश दिया। पुरुषों को अपने वस्त्रों सहित सब कुछ त्यागने की शिक्षा दी गई ताकि वे मोह-माया से मुक्त हो सकें। उन्होंने भी अपने विचारों को ‘प्राकृत’ भाषा में फैलाया ताकि आम जनमानस इसे आत्मसात कर सके। 🚫🐜
4. क्या दासों के लिए संघ में प्रवेश करना आसान रहा होगा? तर्क दीजिए। ⛓️🤝
दासों के लिए संघ में प्रवेश करना निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण और कठिन रहा होगा। बुद्ध और महावीर के नियमों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को संघ में शामिल होने के लिए अनुमति लेना अनिवार्य था। बच्चों को माता-पिता से, पत्नी को पति से, और दासों को अपने ‘स्वामी’ से अनुमति लेनी पड़ती थी। उस समय की सामाजिक संरचना में दास पूरी तरह से अपने मालिकों के अधीन थे। बहुत कम स्वामी ऐसे होते थे जो अपने दासों को स्वतंत्र करके आध्यात्मिक मार्ग पर जाने की अनुमति दें, क्योंकि इससे उनके कामकाज का नुकसान होता था। हालांकि सिद्धांततः संघ के द्वार सबके लिए खुले थे और वहाँ जाकर वर्ण-भेद खत्म हो जाता था, लेकिन प्रवेश की पूर्व-शर्त (मालिक की अनुमति) दासों के लिए एक बड़ी बाधा थी। अतः, यह कहना सही होगा कि दासों का प्रवेश उनकी किस्मत और उनके मालिक की उदारता पर निर्भर था। 🙇♂️⚖️
🎯 प्रोफ़ेसनल क्विज़ (माइनस मार्किंग के साथ) 🏆
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कक्षा 6 इतिहास के अध्याय 6 ‘नए प्रश्न नए विचार’ का विस्तृत विवरण। इसमें बुद्ध की कहानी, जैन धर्म, उपनिषद, संघ और विहार के बारे में सरल भाषा में समझाया गया है।
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