1. कार्यकारी शक्तियाँ (Executive Powers)
- अनुच्छेद 154: राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होगी, जिसका प्रयोग वह स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करेगा।
- अनुच्छेद 166: राज्य सरकार के सभी कार्यकारी कार्य औपचारिक रूप से राज्यपाल के नाम पर किए जाते हैं।
- नियुक्ति: राज्यपाल मुख्यमंत्री और उनकी सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है। इसके अलावा, वह राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General), राज्य चुनाव आयुक्त और लोक सेवा आयोग के अध्यक्षों की नियुक्ति भी करता है।
2. विधायी शक्तियाँ (Legislative Powers)
- अनुच्छेद 174: राज्यपाल को राज्य विधानमंडल के सत्र को बुलाने, सत्रावसान (समाप्त) करने और विधानसभा को भंग करने का अधिकार है।
- अनुच्छेद 200: जब कोई विधेयक राज्य विधानसभा द्वारा पारित किया जाता है, तो वह राज्यपाल के पास भेजा जाता है। राज्यपाल उसे अनुमति दे सकता है, रोक सकता है या राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित रख सकता है।
- अनुच्छेद 213 (अध्यादेश शक्ति): जब विधानमंडल का सत्र न चल रहा हो, तो राज्यपाल ‘अध्यादेश’ (Ordinance) जारी कर सकता है, जिसकी शक्ति कानून के समान ही होती है।
3. न्यायिक शक्तियाँ (Judicial Powers)
- अनुच्छेद 161: राज्यपाल के पास किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सजा को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति होती है। ध्यान दें: राज्यपाल मृत्युदंड को पूरी तरह क्षमा नहीं कर सकता (यह शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास है)।
- राज्यपाल की पूर्व अनुमति के बिना ‘धन विधेयक’ (Money Bill) राज्य विधानसभा में पेश नहीं किया जा सकता।
- वह सुनिश्चित करता है कि राज्य का वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) विधानमंडल के सामने रखा जाए।
| शक्ति का प्रकार | मुख्य अनुच्छेद |
|---|---|
| कार्यपालिका शक्ति | अनुच्छेद 154 |
| क्षमादान की शक्ति | अनुच्छेद 161 |
| अध्यादेश जारी करना | अनुच्छेद 213 |
| विधेयकों पर सहमति | अनुच्छेद 200 |
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राज्यपाल की शक्तियां: विशेष क्विज
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