भारत रत्न भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह असाधारण सेवा या किसी भी क्षेत्र में उच्चतम स्तर के प्रदर्शन के सम्मान में प्रदान किया जाता है।
इस सम्मान के बारे में विस्तृत जानकारी निम्नलिखित है:
1. स्थापना और इतिहास
- शुरुआत: इसकी स्थापना 2 जनवरी 1954 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी।
- प्रथम प्राप्तकर्ता: 1954 में सबसे पहले यह सम्मान डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, चक्रवर्ती राजगोपालाचारी और डॉ. सी.वी. रमन को दिया गया था।
2. पात्रता और चयन प्रक्रिया
- क्षेत्र: प्रारंभ में यह सम्मान कला, साहित्य, विज्ञान और सार्वजनिक सेवा तक सीमित था, लेकिन 2011 में नियमों में संशोधन कर इसे “मानवीय प्रयास के किसी भी क्षेत्र” (any field of human endeavour) के लिए विस्तारित कर दिया गया।
- सिफारिश: भारत रत्न के लिए सिफारिशें प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रपति को भेजी जाती हैं। इसके लिए किसी औपचारिक नामांकन प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती।
- सीमा: एक वर्ष में अधिकतम तीन व्यक्तियों को ही यह सम्मान दिया जा सकता है (हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में इसमें छूट देखी गई है)।
3. सम्मान का स्वरूप
- पदक: यह पदक तांबे का बना होता है, जिसका आकार पीपल के पत्ते जैसा होता है। इस पर प्लैटिनम से चमकता हुआ सूर्य बना होता है और नीचे चांदी में “भारत रत्न” लिखा होता है। इसके पिछले हिस्से पर राष्ट्रीय प्रतीक (अशोक स्तंभ) और “सत्यमेव जयते” अंकित होता है।
- सुविधाएं: इसके साथ कोई मौद्रिक अनुदान (पैसा) नहीं दिया जाता। सम्मानित व्यक्ति को राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित एक सनद (प्रमाण-पत्र) और पदक मिलता है।
4. महत्वपूर्ण नियम
- मरणोपरांत: 1954 के मूल नियमों में मरणोपरांत सम्मान का प्रावधान नहीं था, लेकिन 1955 में इसे जोड़ा गया। लाल बहादुर शास्त्री मरणोपरांत भारत रत्न पाने वाले पहले व्यक्ति थे।
- विदेशी नागरिक: यह अनिवार्य नहीं है कि भारत रत्न केवल भारतीय नागरिकों को ही मिले। यह गैर-भारतीयों को भी दिया जा चुका है, जैसे:
- खान अब्दुल गफ्फार खान (1987)
- नेल्सन मंडेला (1990)
- मदर टेरेसा (भारतीय नागरिकता प्राप्त, 1980)
5. संवैधानिक स्थिति और वरीयता
- अनुच्छेद 18(1): भारतीय संविधान के अनुसार, प्राप्तकर्ता अपने नाम के आगे या पीछे ‘भारत रत्न’ को पदवी (Title) के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकते।
- वरीयता क्रम: भारत रत्न से सम्मानित व्यक्ति को भारत के ‘वरीयता क्रम’ (Table of Precedence) में सातवां (7th) स्थान दिया जाता है।
यह सम्मान उन विभूतियों को पहचान देता है जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में अपनी प्रतिभा और समर्पण से अमिट छाप छोड़ी है।
31 मार्च 1990 वह ऐतिहासिक दिन था जब भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था।
चित्र में दी गई जानकारी का विस्तृत विवरण यहाँ दिया गया है:
मुख्य बिंदु:
- सम्मान की तिथि: 31 मार्च 1990।
- तत्कालीन सरकार: यह सम्मान तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) की सरकार द्वारा दिया गया था।
- एक लंबा अंतराल: बाबासाहेब के महापरिनिर्वाण (6 दिसंबर 1956) के लगभग 34 साल बाद उन्हें यह सम्मान दिया गया, जो उनके द्वारा राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान की एक महत्वपूर्ण, हालांकि विलंबित, स्वीकृति थी।
- सम्मान ग्रहण: डॉक्टर अंबेडकर की पत्नी, सविता अंबेडकर ने तत्कालीन राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन से यह प्रतिष्ठित पुरस्कार ग्रहण किया था।
इस दिन का महत्व
डॉ. अंबेडकर न केवल ‘भारतीय संविधान के जनक’ थे, बल्कि वे एक महान अर्थशास्त्री, समाज सुधारक और न्यायविद् भी थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ और दलितों, पिछड़ों, महिलाओं व श्रमिकों के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया।
1990 में उन्हें ‘भारत रत्न’ दिया जाना उनके उन विचारों की जीत थी, जो एक न्यायपूर्ण और समतावादी भारत का सपना देखते थे।
बाबासाहेब का महापरिनिर्वाण 6 दिसंबर 1956 को हुआ था। उनके निधन के लगभग 34 वर्षों बाद उन्हें यह सम्मान दिया गया। इतिहासकार मानते हैं कि यह सम्मान बहुत पहले मिल जाना चाहिए था, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण इसमें विलंब हुआ। अंततः 1990 में तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) की सरकार ने इस ऐतिहासिक भूल को सुधारा।
सम्मान समारोह का गौरवमयी क्षण
राष्ट्रपति भवन के भव्य दरबार हॉल में आयोजित इस समारोह में तत्कालीन राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन ने यह सम्मान प्रदान किया। डॉ. अंबेडकर की ओर से उनकी धर्मपत्नी, माई साहेब डॉ. सविता अंबेडकर ने इस पदक और प्रशस्ति पत्र को ग्रहण किया। यह दृश्य भावुक करने वाला था क्योंकि यह उस व्यक्ति का सम्मान था जिसने भारत को एक ऐसा संविधान दिया जो हर नागरिक को समानता का अधिकार देता है।
संविधान निर्माण और सामाजिक क्रांति
डॉ. अंबेडकर केवल ‘संविधान के जनक’ ही नहीं थे, बल्कि वे एक दूरदर्शी अर्थशास्त्री भी थे। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने श्रमिकों के लिए काम के घंटे तय किए, महिलाओं के लिए ‘हिंदू कोड बिल’ के माध्यम से समान अधिकारों की वकालत की और छुआछूत जैसी कुप्रथा के खिलाफ जीवनभर संघर्ष किया।
निष्कर्ष: विचारों की अमरता
भारत रत्न का सम्मान डॉ. अंबेडकर के कद को और ऊंचा नहीं करता, बल्कि यह सम्मान खुद बाबासाहेब के नाम से जुड़कर गौरवान्वित हुआ है। आज भी उनके विचार दुनिया भर के लोकतंत्रों के लिए मार्गदर्शक का कार्य करते हैं।
🇮🇳 डॉ. अंबेडकर क्विज 🇮🇳
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