भारतीय संविधान का अनुच्छेद 125 उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों के वेतन, भत्ते, छुट्टी और पेंशन से संबंधित है। यह अनुच्छेद न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
2. संसद की शक्ति और निर्धारण
अनुच्छेद 125(1) के अनुसार, न्यायाधीशों को ऐसा वेतन दिया जाएगा जो संसद विधि (Law) द्वारा समय-समय पर निर्धारित करे। जब तक संसद ऐसा कानून नहीं बनाती, तब तक दूसरी अनुसूची (Second Schedule) में निर्दिष्ट वेतन दिया जाता है।
3. वित्तीय सुरक्षा और स्वतंत्रता
न्यायपालिका की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह प्रावधान है कि न्यायाधीश की नियुक्ति के बाद उसके अधिकारों, भत्तों या वेतन में उसके लिए अलाभकारी (Disadvantageous) परिवर्तन नहीं किया जा सकता। इसका अर्थ है कि उनके कार्यकाल के दौरान उनका वेतन कम नहीं किया जा सकता (केवल अनुच्छेद 360 के तहत वित्तीय आपातकाल के दौरान ही कटौती संभव है)।
4. संचित निधि पर भारित व्यय
न्यायाधीशों का वेतन भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) पर भारित (Charged) होता है। इसका मतलब है कि इस पर संसद में चर्चा तो हो सकती है, लेकिन मतदान (Voting) नहीं होता, जिससे राजनीतिक हस्तक्षेप की गुंजाइश खत्म हो जाती है।
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