पहला बैंक
बैंक ऑफ हिंदुस्तान (1770)
सबसे पुराना बैंक
भारतीय स्टेट बैंक (SBI)
केंद्रीय बैंक
भारतीय रिजर्व बैंक (1935)
बैंकिंग विकास के 5 मुख्य चरण
प्रथम चरण: भारत में आधुनिक बैंकिंग की शुरुआत (1770 - 1806)
यूरोपीय शुरुआतभारत में आधुनिक बैंकिंग की नींव 1770 में रखी गई थी, जब कोलकाता (तब कलकत्ता) में 'बैंक ऑफ हिंदुस्तान' (Bank of Hindostan) की स्थापना की गई थी। हालांकि यह बैंक लंबे समय तक नहीं चल सका और 1832 में बंद हो गया। इसके बाद 1786 में 'द जनरल बैंक ऑफ इंडिया' भी खुला, लेकिन वह भी असफल रहा। यह वह दौर था जब भारतीय व्यापार में यूरोपीय पद्धतियों का समावेश हो रहा था।
मुख्य तथ्य: भारत का पहला पूर्ण स्वामित्व वाला पहला भारतीय कमर्शियल बैंक 'औध कमर्शियल बैंक' (Oudh Commercial Bank) था, जिसकी शुरुआत 1881 में हुई थी।
द्वितीय चरण: प्रेसिडेंसी बैंकों का उदय और SBI का जन्म
ब्रिटिश कालब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में व्यापार को सुचारू रूप से चलाने के लिए तीन प्रेसिडेंसी बैंकों की स्थापना की:
- बैंक ऑफ बंगाल (1806)
- बैंक ऑफ बॉम्बे (1840)
- बैंक ऑफ मद्रास (1843)
1921 में इन तीनों बैंकों को आपस में मिलाकर 'इम्पीरियल बैंक ऑफ इंडिया' (Imperial Bank of India) बनाया गया। आज जिसे हम **भारतीय स्टेट बैंक (SBI)** के नाम से जानते हैं, वह इसी इम्पीरियल बैंक का बदला हुआ रूप है, जिसका 1 जुलाई 1955 को राष्ट्रीयकरण किया गया था।
तृतीय चरण: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की स्थापना (1935)
नियामक युगभारतीय बैंकिंग प्रणाली को नियंत्रित और मजबूत करने के लिए 1 अप्रैल 1935 को भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) की स्थापना की गई। इसकी स्थापना हिल्टन यंग कमीशन (Hilton Young Commission) की सिफारिशों के आधार पर की गई थी। शुरुआत में इसका मुख्य कार्यालय कोलकाता में था, जिसे 1937 में स्थायी रूप से मुंबई स्थानांतरित कर दिया गया। 1949 में RBI का राष्ट्रीयकरण हुआ और यह भारत का केंद्रीय बैंक बना।
चतुर्थ चरण: बैंकों का ऐतिहासिक राष्ट्रीयकरण (1969 और 1980)
क्रांतिकारी मोड़आजादी के बाद आम जनता तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने और साहुकारों के चंगुल से किसानों को बचाने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बैंकों के राष्ट्रीयकरण का साहसिक कदम उठाया:
- 19 जुलाई 1969: देश के 14 बड़े निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया, जिनकी जमा पूंजी 50 करोड़ रुपये से अधिक थी।
- 1980: दूसरे चरण में 6 और निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया।
इस ऐतिहासिक कदम ने भारतीय गांवों और कस्बों तक बैंकिंग तंत्र का विस्तार किया, जिसे भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
पंचम चरण: एलपीजी (LPG) सुधार और डिजिटल क्रांति (1991 - वर्तमान)
आधुनिक युग1991 के आर्थिक सुधारों के बाद भारत में निजी क्षेत्र के नए बैंकों (जैसे HDFC, ICICI, Axis Bank) को लाइसेंस दिए गए, जिससे बैंकिंग क्षेत्र में तकनीक और बेहतरीन कस्टमर सर्विस की शुरुआत हुई।
आज का भारतीय बैंकिंग क्षेत्र ATM, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के दम पर पूरी दुनिया में सबसे उन्नत डिजिटल पेमेंट सिस्टम्स में से एक बन चुका है। अब बैंक आपकी जेब में (स्मार्टफोन में) समा चुका है।