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कक्षा 5 (Class 5) के विज्ञान के पाठ्यक्रम में एक बहुत ही महत्वपूर्ण और दिलचस्प चैप्टर है: “पौधों में प्रजनन” (Reproduction in Plants)।

​आइए इसे बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं।

​1. बीज से नन्हा पौधा (Germination)

​ज्यादातर पौधे बीजों से उगते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक नन्हा सा बीज इतना बड़ा पेड़ कैसे बन जाता है? इस प्रक्रिया को अंकुरण (Germination) कहते हैं।

​अंकुरण के लिए तीन चीजें सबसे जरूरी हैं:

  • पानी: बीज को नरम करने के लिए।
  • हवा (ऑक्सीजन): सांस लेने के लिए।
  • उचित तापमान (गर्मी): बढ़ने के लिए।

2. बीज की संरचना (Structure of a Seed)

​एक बीज के मुख्य तीन भाग होते हैं:

  1. बीज चोल (Seed Coat): यह बीज का बाहरी कठोर हिस्सा है जो अंदर के नन्हे पौधे की रक्षा करता है।
  2. बीज पत्र (Cotyledons): यह नन्हे पौधे के लिए भोजन जमा रखता है।
  3. भ्रूण (Embryo): यह बीज के अंदर छिपा हुआ नन्हा पौधा है।

​3. बीजों का प्रकीर्णन (Dispersal of Seeds)

​अगर सारे बीज एक ही पेड़ के नीचे गिर जाएं, तो उन्हें बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह, धूप और पानी नहीं मिलेगा। इसलिए प्रकृति ने बीजों को दूर-दूर फैलाने के तरीके बनाए हैं:

  • हवा द्वारा: कुछ बीज बहुत हल्के और पंख जैसे होते हैं (जैसे- डेंडेलियन या मदार), जो हवा में उड़कर दूर चले जाते हैं।
  • पानी द्वारा: जो पौधे पानी के पास उगते हैं (जैसे- नारियल), उनके बीज पानी में तैरकर दूसरी जगह पहुँच जाते हैं।
  • जानवरों द्वारा: कुछ बीजों में कांटे या हुक होते हैं जो जानवरों के शरीर से चिपक जाते हैं। हम इंसान भी फल खाकर बीज इधर-उधर फेंक देते हैं।
  • फटने से (Explosion): कुछ फल पकने पर झटके से फट जाते हैं (जैसे- मटर या भिंडी) और बीज दूर बिखर जाते हैं।

​4. पौधों में प्रजनन

पौधों में प्रजनन (Reproduction in Plants) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पौधे अपनी प्रजाति को बनाए रखने के लिए नए पौधे उत्पन्न करते हैं। मुख्य रूप से पौधों में प्रजनन दो प्रकार से होता है: अलैंगिक (Asexual) और लैंगिक (Sexual)

​नीचे इसकी विस्तार से जानकारी दी गई है:

​1. अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)

​इस प्रक्रिया में नए पौधे बीजों के बिना ही उत्पन्न होते हैं। इसमें केवल एक ही जनक (Parent) की आवश्यकता होती है। इसकी प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं:

  • कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation): जब पौधे के किसी कायिक भाग जैसे जड़, तना या पत्ती से नया पौधा बनता है।
    • उदाहरण: गुलाब की कलम (तना), आलू की आँख (तना), और पत्थरचट्टा (पत्ती)।
  • मुकुलन (Budding): इसमें जनक के शरीर पर एक छोटी सी कली या उभार (Bud) निकलता है, जो धीरे-धीरे विकसित होकर अलग हो जाता है।
    • उदाहरण: यीस्ट (Yeast)।
  • खंडन (Fragmentation): इसमें पौधा दो या दो से अधिक खंडों में टूट जाता है और प्रत्येक खंड एक नए पौधे के रूप में विकसित होता है।
    • उदाहरण: स्पाइरोगाइरा (Spirogyra)।
  • बीजाणु निर्माण (Spore Formation): पौधे बीजाणु उत्पन्न करते हैं, जो अनुकूल परिस्थितियों में अंकुरित होकर नए पौधे बनाते हैं।
    • उदाहरण: फर्न और काई (Moss)।

​2. लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)

​इस प्रक्रिया में नए पौधे बीजों के माध्यम से उत्पन्न होते हैं। इसमें नर और मादा दोनों युग्मकों (Gametes) की आवश्यकता होती है।

  • पुष्प (Flower): यह पौधे का प्रजनन अंग है।
    • पुंकेसर (Stamen): नर जनन अंग (इसमें परागकण होते हैं)।
    • स्त्रीकेसर (Pistil/Carpel): मादा जनन अंग (इसमें अंडाशय और बीजांड होते हैं)।
  • परागण (Pollination): परागकोश से परागकणों का स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र (Stigma) तक पहुँचने की प्रक्रिया। यह हवा, पानी या कीटों द्वारा हो सकता है।
  • निषेचन (Fertilization): जब नर युग्मक और मादा युग्मक मिलते हैं, तो उसे निषेचन कहते हैं। इससे युग्मनज (Zygote) बनता है, जो बाद में भ्रूण और फिर बीज में विकसित होता है।
  • जड़ से: जैसे शकरकंद और गाजर।
  • तने से: जैसे आलू (आलू पर बनी ‘आंख’ से नया पौधा निकलता है) और गुलाब (कलम लगाकर)।
  • पत्तियों से: जैसे अजूबा (Bryophyllum) की पत्तियों के किनारों से नन्हे पौधे निकलते हैं।

मुख्य बात याद रखें: पौधों का बढ़ना जीवन चक्र को बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि पौधे हमें ऑक्सीजन और भोजन देते हैं।

पौधों में प्रजनन – 10 प्रश्न क्विज
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