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शिक्षा की शुरुआत: 3 वर्ष की आयु से (विस्तृत विश्लेषण)

1. 10+2 से 5+3+3+4 की ओर बदलाव

​पुरानी शिक्षा नीति में स्कूली शिक्षा कक्षा 1 (6 वर्ष की आयु) से शुरू मानी जाती थी। लेकिन नई नीति में पहले 5 वर्षों को ‘फाउंडेशनल स्टेज’ कहा गया है, जिसमें:

  • प्रथम 3 वर्ष: आंगनवाड़ी, प्री-स्कूल या बालवाटिका (आयु 3-6 वर्ष)।
  • अगले 2 वर्ष: कक्षा 1 और कक्षा 2 (आयु 6-8 वर्ष)।

2. ‘अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन’ (ECCE) पर ध्यान

​वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि बच्चे के मस्तिष्क का 85% विकास 6 वर्ष की आयु से पहले हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए 3 साल की उम्र से ही औपचारिक शिक्षा के ढांचे में बच्चों को शामिल किया गया है ताकि उनके मानसिक और शारीरिक विकास को सही दिशा मिल सके।

3. पाठ्यक्रम का स्वरूप: ‘खेल-आधारित’ शिक्षा

​3 से 6 साल तक के बच्चों के लिए कोई भारी-भरकम किताबें या परीक्षाएं नहीं होंगी। इसका स्वरूप पूरी तरह लचीला होगा:

  • गतिविधि आधारित: पहेलियाँ, पेंटिंग, मिट्टी के खिलौने और कहानियों के जरिए सीखना।
  • सामाजिक कौशल: अन्य बच्चों के साथ घुलना-मिलना, साझा करना (Sharing) और अनुशासन सीखना।
  • NCERT द्वारा नया ढांचा: छोटे बच्चों के लिए एक विशेष ‘नेशनल करिकुलर फ्रेमवर्क’ (NCF-ECC) तैयार किया गया है।

4. आंगनवाड़ियों का सुदृढ़ीकरण

​इस बदलाव को लागू करने के लिए सरकार आंगनवाड़ियों को आधुनिक बना रही है।

  • ​आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
  • ​जहाँ आंगनवाड़ियाँ स्कूल परिसर के बाहर हैं, उन्हें पास के प्राथमिक स्कूलों से जोड़ा जा रहा है ताकि बच्चा 3 साल की उम्र से ही स्कूल के माहौल में सहज हो जाए।

5. भविष्य की नींव: स्कूल रेडीनेस (School Readiness)

​अक्सर देखा गया है कि जो बच्चे सीधे कक्षा 1 में आते हैं, वे स्कूल के माहौल से घबराते हैं। 3 साल की उम्र से शुरुआत करने का उद्देश्य बच्चे को ‘स्कूल के लिए तैयार’ करना है। इससे आगे चलकर ‘ड्रॉपआउट’ (स्कूल छोड़ने की दर) में भारी कमी आएगी।

प्रमुख लाभ एक नजर में:

  • समानता: गरीब परिवारों के बच्चे भी अब प्राइवेट स्कूलों की तरह 3 साल की उम्र से ‘प्री-स्कूल’ शिक्षा पा सकेंगे।
  • बेहतर पोषण: शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य और मिड-डे मील जैसी सुविधाएं भी इसी उम्र से मिलेंगी।
  • भाषा का विकास: कम उम्र में बच्चा अधिक भाषाएं और शब्द जल्दी सीख पाता है।

One thought on “EARLY CHILDHOOD CARE AND EDUCATION: MOST IMPORTANT POINT”

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