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आइए कक्षा 5 का एक बहुत ही रोमांचक टॉपिक समझते हैं: “हमारा पाचन तंत्र” (The Human Digestive System)

​क्या आपने कभी सोचा है कि जो खाना (जैसे रोटी या सेब) हम खाते हैं, वह हमारे शरीर को शक्ति (Energy) कैसे देता है? हमारा शरीर खाने को सीधे इस्तेमाल नहीं कर सकता, उसे पहले बहुत छोटे टुकड़ों में तोड़ना पड़ता है। इसी प्रक्रिया को पाचन (Digestion) कहते हैं।

​पाचन की यात्रा: चरण-दर-चरण

​पाचन की प्रक्रिया हमारे मुँह से शुरू होती है और पेट के निचले हिस्से तक जाती है:

​1. मुँह (The Mouth)

​पाचन यहीं से शुरू होता है। हमारे दाँत खाने को पीसते हैं और मुँह में मौजूद लार (Saliva) खाने को नरम बनाती है। लार खाने में मौजूद स्टार्च को चीनी में बदलना शुरू कर देती है।

​2. ग्रास नली (Food Pipe / Esophagus)

​चबाया हुआ खाना एक लंबी नली के ज़रिए पेट में जाता है। यह नली एक पाइप की तरह काम करती है जो मुँह को पेट से जोड़ती है।

​3. आमाशय यानी पेट (The Stomach)

​यहाँ खाना लगभग 3-4 घंटे रहता है। पेट की दीवारें कुछ पाचक रस (Digestive Juices) निकालती हैं जो खाने को एक गाढ़े सूप (Paste) जैसा बना देते हैं।

​4. छोटी आँत (Small Intestine)

​यह एक बहुत लंबी और मुड़ी हुई नली होती है। पाचन का सबसे मुख्य काम यहीं होता है। यहाँ लीवर (Liver) और अग्न्याशय (Pancreas) से भी पाचक रस आकर मिलते हैं। अब खाना इतना बारीक हो जाता है कि वह खून में मिल सके। खून इस पोषण को पूरे शरीर में ले जाता है।

​5. बड़ी आँत (Large Intestine)

​जो खाना पच नहीं पाता, वह बड़ी आँत में चला जाता है। यहाँ शरीर फालतू पानी को सोख लेता है और बचा हुआ कचरा मल (Waste) के रूप में शरीर से बाहर निकल जाता है।

​पाचन को अच्छा रखने के कुछ नियम:

  • खाना धीरे-धीरे चबाकर खाएं: चबाने से लार अच्छी तरह मिलती है।
  • ढेर सारा पानी पिएं: पानी पाचन में मदद करता है।
  • फाइबर युक्त भोजन करें: जैसे फल और हरी सब्जियाँ, जो पेट साफ रखने में मदद करती हैं।

​एक मज़ेदार तथ्य (Fact):

​हमारी छोटी आँत की लंबाई लगभग 6 से 7 मीटर होती है! यह हमारे शरीर की लंबाई से भी लगभग चार गुना लंबी है, लेकिन यह हमारे पेट के अंदर बहुत ही सिमट कर रहती है।

​1. एंजाइम्स का जादू (The Role of Enzymes)

​हमारा शरीर भोजन को सिर्फ पीसता नहीं है, बल्कि उसे रसायनिक रूप से तोड़ता है। इसके लिए Enzymes जिम्मेदार होते हैं:

  • पेप्सिन (Pepsin): यह पेट में प्रोटीन को तोड़ता है।
  • लाइपेज (Lipase): यह वसा (Fats) को पचाने का काम करता है।
  • लार एमाइलेज: यह कार्बोहाइड्रेट्स को ग्लूकोज में बदलना शुरू करता है।

​2. “दूसरा दिमाग” (The Second Brain)

​क्या आप जानते हैं कि आपके पाचन तंत्र में अपना खुद का नर्वस सिस्टम होता है? इसे Enteric Nervous System कहते हैं।

  • ​यही कारण है कि जब आप घबराते हैं, तो आपके पेट में अजीब सा महसूस होता है (Butterflies in stomach)।
  • ​दिमाग और पेट एक-दूसरे को लगातार सिग्नल भेजते रहते हैं।

​3. गट माइक्रोबायोम (Good Bacteria)

​हमारी बड़ी आंत में खरबों की संख्या में Bacteria रहते हैं।

  • ​ये बैक्टीरिया विटामिन K और विटामिन B12 बनाने में मदद करते हैं।
  • ​ये हमारे इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को भी मजबूत रखते हैं। इसलिए दही जैसे ‘Probiotics’ खाना अच्छा माना जाता है।

​4. लीवर (Liver) के अद्भुत काम

​लीवर केवल पाचन में मदद नहीं करता, यह शरीर की “केमिकल फैक्ट्री” है:

  • ​यह खून से ज़हरीले पदार्थों (Toxins) को साफ करता है।
  • ​यह ऊर्जा को ‘ग्लाइकोजन’ के रूप में स्टोर करता है ताकि ज़रूरत पड़ने पर शरीर उसे इस्तेमाल कर सके।

​5. पाचन को बेहतर रखने के कुछ टिप्स

  • फाइबर (Fiber): फल, सब्जियां और साबुत अनाज खाने से खाना आसानी से पचता है और कब्ज (Constipation) नहीं होता।
  • पानी: पानी पाचन प्रक्रिया को सुचारू रखता है और पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है।
  • चबाकर खाना: जितना ज्यादा आप खाने को मुँह में चबाएंगे, पेट को उतना ही कम काम करना पड़ेगा।

एक मज़ेदार बात: जब आप “उल्टा” (सिर नीचे, पैर ऊपर) होकर भी खाना खाएंगे, तब भी खाना आपके पेट में ही जाएगा। ऐसा ग्रास नली की मांसपेशियों की Peristalsis गति के कारण होता है, जो गुरुत्वाकर्षण (Gravity) पर निर्भर नहीं करती।

एसिडिटी (Acidity) क्यों होती है?

​हमारे पेट में भोजन पचाने के लिए Hydrochloric Acid (HCl) बनता है।

  • समस्या कब होती है? जब हम ज्यादा मसालेदार खाना खाते हैं, भूखे पेट रहते हैं या बहुत अधिक कैफीन (चाय/कॉफी) लेते हैं, तो यह एसिड जरूरत से ज्यादा बनने लगता है।
  • सीने में जलन (Heartburn): जब पेट और ग्रास नली (Oesophagus) के बीच का वॉल्व ढीला हो जाता है, तो एसिड ऊपर की ओर आने लगता है। इसी को हम ‘सीने में जलन’ कहते हैं।

​2. अपच (Indigestion) और गैस

​जब हम खाना बहुत जल्दी-जल्दी खाते हैं या बिना चबाए निगल लेते हैं, तो पेट को उसे तोड़ने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है।

  • कारण: अधपचा भोजन जब बड़ी आंत में पहुँचता है, तो वहां मौजूद बैक्टीरिया उसे फर्मेंट (Ferment) करने लगते हैं, जिससे गैस पैदा होती है।
  • उपाय: खाने के साथ पानी कम पिएं (खाने के 30 मिनट बाद पीना बेहतर है) ताकि पाचक एंजाइम पतले न हों।

​3. पाचन तंत्र के बारे में कुछ “हैरान करने वाले तथ्य”

  • पेट का एसिड: आपके पेट में मौजूद एसिड इतना शक्तिशाली होता है कि वह एक स्टील की ब्लेड को भी गला सकता है! लेकिन पेट की अंदरूनी दीवार (Mucus Lining) खुद को इस एसिड से बचाए रखती है।
  • डकार (Burp): डकार असल में वह हवा है जो हम खाना खाते समय या बात करते समय निगल लेते हैं।
  • लंबाई: अगर आप पूरे पाचन तंत्र (मुँह से गुदा तक) को सीधा फैलाएं, तो इसकी लंबाई लगभग 9 मीटर (30 फीट) होगी।

​4. लीवर (Liver) की खास क्षमता

​लीवर शरीर का इकलौता ऐसा अंग है जो खुद को दोबारा बना (Regenerate) सकता है। अगर लीवर का 75% हिस्सा काट भी दिया जाए, तो वह वापस अपने पूरे आकार में बढ़ सकता है।

​पाचन को ‘सुपर फ़ास्ट’ और हेल्दी रखने के लिए 3 छोटे बदलाव:

  1. वॉक (Walk): खाना खाने के तुरंत बाद लेटने के बजाय 10-15 मिनट टहलें।
  2. प्रोबायोटिक्स: अपनी डाइट में दही या छाछ शामिल करें। ये “अच्छे बैक्टीरिया” के घर हैं।
  3. निश्चित समय: रोज एक ही समय पर खाना खाने से शरीर का ‘Digestive Clock’ सेट हो जाता है।
पाचन तंत्र: बोलती प्रश्नोत्तरी

पाचन तंत्र क्विज 🩺

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