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कठिन शब्द (ब्रज/राजस्थानी)हिंदी अर्थ
बंसीवारेबाँसुरी बजाने वाले (कृष्ण)
ललनाप्यारा बच्चा / पुत्र
रजनीरात
भोरसुबह / सवेरा
किंवारेकिवाड़ / दरवाज़े
मथतमथना (दही से मक्खन निकालना)
झनकारेखनक / झंकार
सुर-नरदेवता और मनुष्य
ठाढ़ेखड़े हैं
द्वारेदरवाज़े पर
ग्वाल-बालगाय चराने वाले बच्चे / सखा
कुलाहलशोर / कोलाहल
सबदशब्द / आवाज़
उचारैउच्चारण करना / बोलना
माखनमक्खन
गउवनगायों के
रखवारेरखवाले / रक्षक
गिरधर नागरचतुर कृष्ण (पर्वत को धारण करने वाले)
तरैउद्धार करना / पार लगाना
बरसेबरसना
बदरियाबादल / बदली
सावनश्रावण मास (वर्षा ऋतु का महीना)
मन-भावनमन को अच्छा लगने वाला
उमग्योउमंग से भरना / उत्साहित होना
मनवामन
भनकआहट / कानों में पड़ने वाली आवाज़
हरिभगवान (कृष्ण)
आवनआने की
उमड़-घुमड़बादलों का घिरकर आना
चहुँदिसचारों दिशाओं से
दामिनबिजली
दमकैचमकना
झर लावनवर्षा की झड़ी लगना
नन्हीं-नन्हींछोटी-छोटी
बूंदनबूँदें
मेहाबादल / वर्षा
सीतलशीतल / ठंडी
पवनहवा
सुहावनसुहावनी / सुखद
मंगल गावनमंगल गीत गाना

पद – 1 (भोर)

संकेत: “जागो बंसीवारे ललना!… सरण आयाँ को तारै।”

सन्दर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘बसंत’ के ‘भोर और बरखा’ नामक पाठ से ली गई हैं। इसकी कवयित्री कृष्ण-भक्त मीराबाई हैं।

प्रसंग: इस पद में मीराबाई ने सुबह के मनोरम दृश्य का वर्णन किया है, जहाँ माता यशोदा बाल कृष्ण को सुबह होने पर जगाने का प्रयास कर रही हैं।

अर्थ (व्याख्या):

  • बाल कृष्ण को जगाना: माता यशोदा कहती हैं—हे बंसी बजाने वाले मेरे प्यारे लाल! अब जाग जाओ। रात बीत गई है और सुबह हो गई है (रजनी बीती, भोर भयो है)।
  • प्रातः काल का दृश्य: सुबह होने के कारण घर-घर के दरवाज़े (किंवारे) खुल गए हैं। गोपियाँ दही मथ रही हैं और उनके कंगन की झंकार (खनक) सुनाई दे रही है।
  • द्वार पर प्रतीक्षारत: हे लाल जी! उठिए, द्वार पर देवता और मनुष्य (सुर-नर) आपके दर्शनों के लिए खड़े हैं। ग्वाल-बाल शोर मचा रहे हैं और आपकी जय-जयकार कर रहे हैं।
  • गायों की सेवा: गायों के रखवाले ग्वालों ने अपने हाथों में माखन और रोटी ले ली है। मीराबाई अंत में कहती हैं कि मेरे प्रभु चतुर गिरधर नागर (कृष्ण) हैं, जो अपनी शरण में आने वालों का उद्धार कर देते हैं।

पद – 2 (बरखा)

संकेत: “बरसे बदरिया सावन की!… आनंद-मंगल गावन की।”

सन्दर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘बसंत’ के ‘भोर और बरखा’ नामक पाठ से ली गई हैं। इसकी कवयित्री मीराबाई हैं।

प्रसंग: इस पद में मीराबाई ने सावन की वर्षा ऋतु और उससे उत्पन्न होने वाली प्रसन्नता का वर्णन किया है। उन्हें वर्षा की बूंदों में कृष्ण के आने का सुखद अहसास होता है।

अर्थ (व्याख्या):

  • सावन की वर्षा: मीराबाई कहती हैं कि सावन के मनभावन बादल बरस रहे हैं। सावन की फुहारें मन को बहुत अच्छी लग रही हैं।
  • कृष्ण के आगमन का आभास: जब मीरा को प्रभु (कृष्ण) के आने की भनक (आहट) सुनाई दी, तो उनका मन उमंग और उत्साह से भर गया।
  • प्राकृतिक दृश्य: उमड़-घुमड़ कर बादल चारों दिशाओं से घिर आए हैं। आसमान में बिजली चमक रही है (दामिन दमकै) और वर्षा की झड़ी लग गई है।
  • सुहावना मौसम: नन्हीं-नन्हीं बूंदें बरस रही हैं और शीतल व सुहावनी हवा चल रही है। मीराबाई कहती हैं कि मेरे प्रभु गिरधर नागर हैं और यह समय मंगल गीत गाने और खुशियाँ मनाने का है।
भोर और बरखा – Quiz
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‘भोर और बरखा’ – महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)

1. यशोदा कृष्ण को जगाने के लिए क्या-क्या तर्क देती हैं?

उत्तर: माता यशोदा कृष्ण को जगाने के लिए कहती हैं कि रात बीत गई है और सुबह हो गई है। सभी घरों के दरवाजे खुल गए हैं, गोपियाँ दही मथ रही हैं जिनसे उनके कंगन की झंकार सुनाई दे रही है। वे यह भी कहती हैं कि द्वार पर देवता और मनुष्य उनके दर्शनों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

2. ‘भोर और बरखा’ कविता में सुबह का क्या दृश्य बताया गया है?

उत्तर: कविता के अनुसार, सुबह होते ही ब्रज में हलचल शुरू हो जाती है। घर-घर के किवाड़ खुल जाते हैं। गोपियाँ दही मथने लगती हैं और उनके कंगन खनकने लगते हैं। ग्वाल-बाल गाय चराने जाने की तैयारी में शोर मचाते हुए कृष्ण की जय-जयकार करते हैं।

3. मीराबाई को सावन मनभावन क्यों लगता है?

उत्तर: मीराबाई को सावन इसलिए मनभावन लगता है क्योंकि सावन की वर्षा उन्हें कृष्ण के आने का अहसास कराती है। वर्षा की फुहारों से उनके मन में उमंग और प्रेम जाग उठता है, जिससे उन्हें अपने आराध्य के समीप होने का अनुभव होता है।

4. “माखन-रोटी हाथ महँ लीनी, गउवन के रखवारे” – इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: इस पंक्ति का आशय है कि गायों की रक्षा करने वाले (ग्वाल-बाल) सुबह होते ही गायों को चराने जाने के लिए तैयार हैं और उन्होंने अपने हाथों में सुबह का जलपान (मक्खन और रोटी) ले लिया है।

5. वर्षा ऋतु में प्रकृति में क्या-क्या परिवर्तन आते हैं?

उत्तर: वर्षा ऋतु में चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़ कर आते हैं, आसमान में बिजली चमकने लगती है और वर्षा की नन्हीं-नन्हीं बूँदें बरसने लगती हैं। शीतल और सुहावनी हवा चलने लगती है जिससे वातावरण अत्यंत सुखद हो जाता है।

6. मीराबाई ने कृष्ण को ‘गिरधर नागर’ क्यों कहा है?

उत्तर: ‘गिरधर’ का अर्थ है पर्वत को धारण करने वाला। मीराबाई कृष्ण की अनन्य भक्त हैं और वे उन्हें चतुर और सामर्थ्यवान मानती हैं जिन्होंने गोवर्धन पर्वत उठाकर सबकी रक्षा की थी, इसलिए वे उन्हें सम्मान और प्रेम से ‘गिरधर नागर’ कहती हैं।

7. इस पाठ के आधार पर मीरा की भक्ति भावना पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: मीराबाई की भक्ति ‘माधुर्य भाव’ की है। वे कृष्ण को अपना सर्वस्व मानती हैं। इस पाठ में सावन के माध्यम से उनकी विरह-वेदना और मिलन की व्याकुलता स्पष्ट दिखती है। वे कृष्ण के दर्शन के लिए आतुर हैं और उनकी शरण में आए हुए भक्तों का उद्धार करने वाले के रूप में उनकी स्तुति करती हैं।

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