कक्षा 5 की ‘संस्कृत सुबोध’ के अनुसार, कर्ता और क्रिया का मेल संस्कृत व्याकरण की नींव है। इसे और भी सरल तरीके से समझने के लिए हम इसे चरणों में बाँट सकते हैं।
संस्कृत में क्रिया को ‘धातु’ कहते हैं और उसके रूपों को ‘लकार’। कक्षा 5 में मुख्य रूप से ‘लट् लकार’ (वर्तमान काल) पढ़ाया जाता है।
1. कर्ता और क्रिया का मिलान चक्र
संस्कृत में 3 पुरुष और 3 वचन होते हैं, जिससे कुल 9 स्थान बनते हैं। नियम यह है कि कर्ता जिस नंबर के स्थान पर होगा, क्रिया भी उसी नंबर वाली लगेगी।
| पुरुष | एकवचन (1) | द्विवचन (2) | बहुवचन (3) |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष (वह/नाम) | ति (-ti) | तः (-tah) | न्ति (-nti) |
| मध्यम पुरुष (तुम) | सि (-si) | थः (-thah) | थ (-tha) |
| उत्तम पुरुष (मैं) | आमि (-ami) | आवः (-avah) | आमः (-amah) |
2. ‘गम्’ (गच्छ – जाना) धातु के साथ उदाहरण
आइए ‘जाना’ क्रिया के साथ वाक्यों को जोड़कर देखते हैं:
A. प्रथम पुरुष (जब हम किसी और की बात करें)
- सः गच्छति (वह जाता है)
- तौ गच्छतः (वे दो जाते हैं)
- ते गच्छन्ति (वे सब जाते हैं)
- नोट: यहाँ ‘सः’ की जगह किसी का नाम भी हो सकता है, जैसे- ‘रामः गच्छति’।
B. मध्यम पुरुष (जब हम ‘तुम’ से बात करें)
- त्वम् गच्छसि (तुम जाते हो)
- युवाम् गच्छथः (तुम दोनों जाते हो)
- यूयम् गच्छथ (तुम सब जाते हो)
C. उत्तम पुरुष (जब मैं अपनी या हमारी बात करूँ)
- अहम् गच्छामि (मैं जाता हूँ)
- आवाम् गच्छावः (हम दोनों जाते हैं)
- वयम् गच्छामः (हम सब जाते हैं)
3. याद रखने योग्य ‘गोल्डन रूल्स’
- लिंग का प्रभाव नहीं: चाहे ‘बालक’ जाता हो या ‘बालिका’, क्रिया ‘गच्छति’ ही रहेगी। (बालकः गच्छति / बालिका गच्छति)।
- निश्चित कर्ता: मध्यम पुरुष के लिए त्वम्, युवाम्, यूयम् और उत्तम पुरुष के लिए अहम्, आवाम्, वयम् फिक्स (निश्चित) हैं। इनके अलावा दुनिया के सभी कर्ता (नाम, पशु, पक्षी, वह) प्रथम पुरुष में आते हैं।
- वचन की पहचान: यदि कर्ता दो हैं, तो क्रिया हमेशा ‘तः’ वाली ही लगेगी (जैसे: अश्वौ धावतः – दो घोड़े दौड़ते हैं)।
अभ्यास के लिए छोटा सा टेस्ट:
नीचे दिए गए वाक्यों को पूरा करने की कोशिश करें:
- बालकः _________ (पठति / पठसि)
- अहम् _________ (लिखति / लिखामि)
- त्वम् _________ (खादसि / खादति)
संस्कृत में कर्ता और क्रिया के मेल को ‘पद-संगति’ कहते हैं। इसे और गहराई से समझने के लिए हमें क्रिया के पीछे लगने वाले प्रत्ययों (Suffixes) को समझना होगा।
संस्कृत में क्रिया का रूप कभी नहीं बदलता चाहे वह लड़का हो या लड़की (लिंग का क्रिया पर प्रभाव नहीं पड़ता), लेकिन वचन और पुरुष बदलते ही क्रिया का रूप बदल जाता है।
1. क्रिया बनाने का सूत्र (लट् लकार – वर्तमान काल)
किसी भी धातु (जैसे: पठ्, लिख्, चल) के साथ निम्नलिखित प्रत्यय जोड़कर क्रिया बनाई जाती है:
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | -ति | -तः | -न्ति |
| मध्यम पुरुष | -सि | -थः | -थ |
| उत्तम पुरुष | -आमि | -आवः | -आमः |
2. विस्तार से तीनों पुरुषों का प्रयोग
क) प्रथम पुरुष (The Third Person)
जब हम किसी तीसरे व्यक्ति के बारे में बात करते हैं (जैसे- वह, राम, सीता, शेर, बालक)।
- नियम: कर्ता यदि ‘अस्मद्’ (मैं) और ‘युष्मद्’ (तुम) नहीं है, तो वह प्रथम पुरुष होगा।
- उदाहरण:
- गवाक्षः अस्ति (खिड़की है) – एकवचन
- सिंहौ गर्जतः (दो शेर गरजते हैं) – द्विवचन
- पुष्पाणि विकसन्ति (फूल खिलते हैं) – बहुवचन
ख) मध्यम पुरुष (The Second Person)
यह केवल सामने वाले (सुनने वाले) के लिए प्रयोग होता है। इसके कर्ता निश्चित हैं: त्वम्, युवाम्, यूयम्।
- नियम: इसके साथ हमेशा ‘सि, थः, थ’ वाले रूप ही लगेंगे।
- उदाहरण:
- त्वम् खादसि (तुम खाते हो)
- युवाम् खादथः (तुम दोनों खाते हो)
- यूयम् खादथ (तुम सब खाते हो)
ग) उत्तम पुरुष (The First Person)
यह स्वयं के लिए (बोलने वाले के लिए) प्रयोग होता है। इसके कर्ता निश्चित हैं: अहम्, आवाम्, वयम्।
- नियम: इसके साथ हमेशा ‘आमि, आवः, आमः’ वाले रूप ही लगेंगे।
- उदाहरण:
- अहम् गच्छामि (मैं जाता हूँ)
- आवाम् गच्छावः (हम दोनों जाते हैं)
- वयम् गच्छामः (हम सब जाते हैं)
3. लिंग का प्रभाव (एक महत्वपूर्ण जानकारी)
संस्कृत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कर्ता चाहे स्त्रीलिंग हो, पुल्लिंग हो या नपुंसकलिंग, क्रिया नहीं बदलती।
| पुल्लिंग (Boy) | स्त्रीलिंग (Girl) | क्रिया (Verb) |
|---|---|---|
| सः पठति (वह पढ़ता है) | सा पठति (वह पढ़ती है) | समान |
| बालकः लिखति | बालिका लिखति | समान |
| तौ गच्छतः | ते गच्छतः | समान |
4. याद रखने का आसान तरीका (Trick)
आप इसे एक छोटे चार्ट के रूप में याद कर सकते हैं:
- सः/सा/तत \rightarrow ति
- त्वम् \rightarrow सि
- अहम् \rightarrow आमि
संस्कृत कर्ता-क्रिया संगम
5 रैंडम प्रश्न – हर बार नया अभ्यास