1. उपसर्ग (Prefix)
परिभाषा: जो शब्दांश किसी शब्द के आरंभ (शुरुआत) में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन या विशेषता ला देते हैं, उन्हें ‘उपसर्ग’ कहते हैं।
विशेषता: उपसर्ग का अपना स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता, वे हमेशा मूल शब्द के साथ जुड़कर ही अर्थ देते हैं।
उपसर्ग के प्रमुख प्रकार और उदाहरण:
(क) संस्कृत के उपसर्ग (तत्सम)
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण (उपसर्ग + मूल शब्द) |
|---|---|---|
| अति | अधिक | अति + रिक्त = अतिरिक्त, अति + अंत = अत्यंत |
| अनु | पीछे/समान | अनु + चर = अनुचर, अनु + शासन = अनुशासन |
| अभि | सामने/पास | अभि + मान = अभिमान, अभि + नंदन = अभिनंदन |
| निर् | बिना/बाहर | निर् + दोष = निर्दोष, निर् + धन = निर्धन |
| प्र | अधिक/आगे | प्र + हार = प्रहार, प्र + गति = प्रगति |
(ख) हिन्दी के उपसर्ग (तद्भव)
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| अ/अन | अभाव/निषेध | अ + छूत = अछूत, अन + पढ़ = अनपढ़ |
| अध | आधा | अध + पका = अधपका, अध + खिला = अधखिला |
| बिन | बिना | बिन + देखा = बिनदेखा, बिन + खाया = बिनखाया |
| भर | पूरा | भर |
(ग) उर्दू/फ़ारसी के उपसर्ग (आगत)
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| खुश | अच्छा | खुश + बू = खुशबू, खुश + हाल = खुशहाल |
| बद | बुरा | बद + नाम = बदनाम, बद + सूरत = बदसूरत |
| ला | बिना | ला + वारिस = लावारिस, ला + जवाब = लाजवाब |
2. प्रत्यय (Suffix)
परिभाषा: जो शब्दांश शब्दों के अंत में जुड़कर उनके अर्थ में विशेषता या बदलाव लाते हैं, उन्हें ‘प्रत्यय’ कहते हैं।
ध्यान दें: प्रत्यय जुड़ने पर अक्सर शब्द के मूल स्वरूप में संधि के नियम लागू हो सकते हैं।
प्रत्यय के भेद:
प्रत्यय मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
I. कृत् प्रत्यय (Krit Pratyaya)
जो प्रत्यय क्रिया (धातु) के अंत में लगते हैं, उन्हें कृत् प्रत्यय कहते हैं। इनसे बने शब्दों को ‘कृदंत’ कहते हैं।
- अक्कड़: भूल + अक्कड़ = भुलक्कड़
- आई: लिख + आई = लिखाई, पढ़ + आई = पढ़ाई
- आवट: लिख + आवट = लिखावट, सज + आवट = सजावट
- आहू: बिक + आहू = बिकाऊ
- नी: मथ + नी = मथनी, कतर + नी = कतरनी
II. तद्धित प्रत्यय (Taddhit Pratyaya)
जो प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण के अंत में लगते हैं, उन्हें तद्धित प्रत्यय कहते हैं।
- ता (भाववाचक): सुंदर + ता = सुंदरता, मानव + ता = मानवता
- ई (संबंधवाचक): भारत + ईय = भारतीय, पंजाब + ई = पंजाबी
- वाला: दूध + वाला = दूधवाला, फल + वाला = फलवाला
- इत: हर्ष + इत = हर्षित, फल + इत = फलित
- वान/वती: धन + वान = धनवान, बल + वती = बलवती
3. उपसर्ग और प्रत्यय का एक साथ प्रयोग
कभी-कभी एक ही मूल शब्द में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों का प्रयोग होता है:
| उपसर्ग | मूल शब्द | प्रत्यय | नया शब्द |
|---|---|---|---|
| अ | धर्म | ई | अधर्मी |
| अप | मान | इत | अपमानित |
| परि | पूर्ण | ता | परिपूर्णता |
| सु | शिक्षित | ता | सुशिक्षितता |
“कभी नहीं भूलोगे” (
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