77वें गणतन्त्र दिवस के शुभ अवसर पर देश के समस्त नगरिकों को हार्दिक शुभ कामनाएं
77वां गणतंत्र दिवस: “अतीत का बलिदान, भविष्य का निर्माण” 🇮🇳
- मंगलाचरण और संबोधन
माननीय मुख्य अतिथि महोदय, आदरणीय प्रधानाचार्य जी, विद्वान शिक्षकगण, यहाँ उपस्थित देश के भविष्य मेरे सहपाठियों और समस्त राष्ट्रप्रेमियों। 🎤
आज 26 जनवरी 2026 की यह सुनहरी सुबह केवल एक तारीख नहीं है, बल्कि उन करोड़ों बलिदानों की गूँज है जिन्होंने इस मिट्टी को सींचा है। आज जब हम अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं, तो हमें गर्व होना चाहिए कि हम दुनिया के सबसे जीवंत लोकतंत्र का हिस्सा हैं। 🌟 - स्वतंत्रता का अग्निपथ: महानायकों का स्मरण ⚔️
हमारा गणतंत्र उन नीवों पर खड़ा है जिन्हें हमारे क्रांतिकारियों ने अपने रक्त से मज़बूत किया था। आइए याद करते हैं उन चेहरों को जिनके नाम से इतिहास कांपता है:
- मंगल पांडे और 1857 का शंखनाद: वह बैरकपुर की छावनी और ‘कारतूस’ का वो विवाद, जिसने सुप्त भारत को जगा दिया। 🔫
- शहीद-ए-आजम भगत सिंह: मात्र 23 साल की उम्र, हाथ में ‘इंकलाब’ का नारा और चेहरे पर वो निडर मुस्कान। जब वे फांसी के फंदे की ओर बढ़े, तो मानो मौत खुद कांप रही थी। उनकी वह डायरी आज भी हमें वैचारिक क्रांति की सीख देती है। 📖🖋️
- नेताजी सुभाष चंद्र बोस: “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा।” आज़ाद हिंद फ़ौज का गठन और ‘दिल्ली चलो’ का नारा आज भी हमारी रगों में बिजली दौड़ा देता है। 🫡
- झांसी की रानी लक्ष्मीबाई: “खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी।” उनकी तलवार की चमक आज भी भारतीय नारी की शक्ति का प्रतीक है। ⚔️🐎
- ऐतिहासिक प्रतीक और घटनाएँ: हमारी विरासत 🏛️
हमारे गणतंत्र की यात्रा में कुछ चीज़ें केवल वस्तुएं नहीं, बल्कि भावनाएं हैं:
- चरखा (गांधी जी की शक्ति): साबरमती के संत का वह चरखा केवल सूत नहीं काटता था, बल्कि अंग्रेजों के आर्थिक साम्राज्य की जड़ें काट रहा था। वह स्वावलंबन का प्रतीक है। 🧶
- दांडी की मुट्ठी भर नमक: 1930 की वह नमक यात्रा, जिसने दुनिया को दिखाया कि अहिंसा में कितनी ताकत होती है। 🧂🌊
- जलियांवाला बाग की मिट्टी: अमृतसर के उस बाग की लाल मिट्टी आज भी जनरल डायर की क्रूरता और हमारे शहीदों की चीखें समेटे हुए है। वह मिट्टी हमें याद दिलाती है कि स्वतंत्रता की कीमत क्या है। 🥀
- संविधान की मूल प्रति: प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा के हाथों से लिखी गई हमारे संविधान की वह खूबसूरती, जिसे नंदलाल बोस के चित्रों ने सजाया। वह किताब हमारा ‘राष्ट्रीय धर्मग्रंथ’ है। 📜✍️
- डॉ. अंबेडकर और संविधान की शक्ति ⚖️
गणतंत्र का अर्थ है— ‘कानून का शासन’। बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जिस संविधान की संरचना की, उसने एक राजा के बेटे और एक गरीब के बेटे को बराबर का अधिकार दिया।
“संविधान केवल वकीलों का दस्तावेज़ नहीं है, यह जीवन का एक माध्यम है।” 🏛️✨
- आज का भारत: उपलब्धियों का आसमान 🚀
2026 का भारत वह भारत नहीं है जो सहायता माँगता था, आज का भारत वह है जो दुनिया को राह दिखाता है:
- डिजिटल इंडिया: गाँव के छोटे से ठेले से लेकर बड़े मॉल्स तक, ‘UPI’ की गूँज पूरी दुनिया सुन रही है। 📱💸
- अंतरिक्ष में धाक: ‘चंद्रयान’ की सफलता के बाद अब हम ‘गगनयान’ के जरिए अंतरिक्ष में तिरंगा फहराने को तैयार हैं। 🚀🌕
- नारी शक्ति: आज की ‘बेटी’ सीमा पर फाइटर प्लेन भी उड़ा रही है और ओलंपिक में मेडल भी ला रही है। 👩범✈️🏅
- युवाओं का उत्तरदायित्व: 2047 का सपना 🚩
मेरे युवा साथियों, आज जब हम 77वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि हम ‘अमृत काल’ के यात्री हैं।
- क्या हम केवल भ्रष्टाचार की शिकायत करेंगे, या खुद ईमानदार बनेंगे? 🚫💰
- क्या हम गंदगी फैलाएंगे, या ‘स्वच्छ भारत’ का हिस्सा बनेंगे? 🧹🚮
- क्या हम सोशल मीडिया पर केवल नफरत फैलाएंगे, या देश की एकता को मज़बूत करेंगे? 🤝🌐
हमें ‘विकसित भारत 2047’ के उस सपने को सच करना है जहाँ कोई भूखा न सोए, जहाँ शिक्षा हर घर तक पहुँचे और जहाँ विज्ञान और संस्कार साथ-साथ चलें।
- ओजस्वी समापन 🇮🇳
अंत में, मैं उन सभी गुमनाम शहीदों को भी नमन करता हूँ जिनका नाम इतिहास के पन्नों में कहीं खो गया, लेकिन जिनकी शहादत की वजह से आज हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं।
आइए एक साथ जोश के साथ बोलें:
मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना,
हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोस्तां हमारा। 🌍❤️उठो! जागो! और तब तक मत रुको जब तक भारत विश्व गुरु के सिंहासन पर दोबारा विराजमान न हो जाए।
भारत माता की जय! 🚩
वंदे मातरम्! 👋
जय हिंद! 🇮🇳
क्या आप चाहते हैं कि मैं इस भाषण में आपके स्कूल या संस्थान का विशिष्ट नाम जोड़कर इसे और अधिक व्यक्तिगत बना दूँ?
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