77वां गणतंत्र दिवस: “संवैधानिक चेतना, शिक्षा और सशक्त भारत का संकल्प”
आदरणीय मुख्य अतिथि महोदय, माननीय प्रधानाचार्य जी, समस्त शिक्षक वृंद, पधारे हुए अभिभावक गण और मेरे देश की धड़कन—मेरे प्रिय सहपाठियों!
मैं [अपना नाम], इस विद्यालय का छात्र/छात्रा, आज भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के गौरवशाली अवसर पर आप सभी का हृदय से वंदन करता हूँ/करती हूँ। आज का दिन केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं है, बल्कि यह उत्सव है उस महान संविधान का जिसने 140 करोड़ भारतीयों को एक सूत्र में पिरोया है। 26 जनवरी 1950 को जब हमारा संविधान लागू हुआ, तो वह केवल कागजों का संकलन नहीं था, बल्कि वह करोड़ों भारतीयों की आजादी का सुरक्षा कवच था।
लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है,
उछल रहा है जमाने में नाम-ए-आजादी।
न पूछो कितनी कुर्बानियों के बाद हमने,
ये गणतंत्र की अनमोल सुबह पायी है।
गणतंत्र दिवस: स्वाभिमान और पूर्ण स्वराज का इतिहास
इतिहास गवाह है कि हमने इस दिन को पाने के लिए कितनी लंबी और कठिन लड़ाई लड़ी है। 1929 के लाहौर अधिवेशन में जब रावी नदी के तट पर ‘पूर्ण स्वराज’ का संकल्प लिया गया था, तभी से भारत की वास्तविक स्वतंत्रता की पटकथा लिखी जाने लगी थी। डॉ. बी.आर. अंबेडकर, पंडित नेहरू, सरदार पटेल और मौलाना आज़ाद जैसे मनीषियों ने 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन तक अथक परिश्रम किया ताकि हमें दुनिया का सबसे श्रेष्ठ और लचीला संविधान मिल सके। आज जब मैं यहाँ खड़ा हूँ/खड़ी हूँ, तो मुझे गर्व होता है कि मैं उस देश का नागरिक हूँ जहाँ कानून का शासन सर्वोपरि है और जहाँ हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का समान अधिकार है।
मतदान का अधिकार: लोकतंत्र का ब्रह्मास्त्र
गणतंत्र का असली अर्थ है ‘जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा शासन’। हमारे संविधान के अनुच्छेद 326 (Article 326) ने हमें ‘वयस्क मताधिकार’ दिया है। यह वह शक्ति है जो एक आम नागरिक को देश की दिशा तय करने की ताकत देती है। एक युवा होने के नाते, मैं यह संकल्प लेता हूँ/लेती हूँ कि जब मैं 18 वर्ष का/की हो जाऊंगा/जाऊंगी, तो अपने मत का प्रयोग पूरी जिम्मेदारी से करूँगा/करूँगी। मतदान केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय यज्ञ है जिसमें हर नागरिक की आहुति अनिवार्य है। अगर हम आज सही प्रतिनिधि नहीं चुनते, तो हम कल व्यवस्था की आलोचना करने का नैतिक आधार खो देते हैं।
वक्त की धारा को बदलना सीखो,
खुद अपनी किस्मत को लिखना सीखो।
वोट की ताकत से बदलो ये निजाम,
तुम ही देश के मुकद्दर को संवारना सीखो।
आधुनिक शिक्षा व्यवस्था: विकसित भारत की नींव
संविधान का अनुच्छेद 21A शिक्षा को हर बच्चे का मौलिक अधिकार बनाता है। आज 77वें गणतंत्र दिवस पर हमें आत्ममंथन करना होगा कि क्या हमारी शिक्षा हमें केवल रोजगार के लिए तैयार कर रही है या हमें एक ‘बेहतर इंसान’ बना रही है? नई शिक्षा नीति (NEP 2020) भारत को रटने की पुरानी पद्धति से मुक्त कर नवाचार और कौशल आधारित शिक्षा की ओर ले जा रही है। मैं मानता हूँ/मानती हूँ कि एक शिक्षित नागरिक ही समाज में फैली कुरीतियों, अंधविश्वास और भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे सशक्त हथियार बन सकता है। भविष्य का भारत तकनीकी रूप से उन्नत होगा, और उस डिजिटल क्रांति का नेतृत्व हम विद्यार्थी ही करेंगे।
जला दो मशालें ज्ञान की अंधेरा दूर हो जाए,
कलम की नोक से फिर एक नया दस्तूर हो जाए।
जो पढ़ लिख कर बनेंगे देश की पहचान दुनिया में,
उन्हीं के नाम से भारत का हर जर्रा नूर हो जाए।
नारी सशक्तिकरण: आधी आबादी, पूरा आसमान
भारत का संविधान अनुच्छेद 14, 15 और 16 के माध्यम से महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार और सुरक्षा का वचन देता है। आज की नारी अब किसी की दया की पात्र नहीं, बल्कि स्वयं अपनी नियति की निर्माता है। रानी लक्ष्मीबाई और सावित्रीबाई फुले से शुरू हुआ यह सफर आज की फाइटर पायलटों और इसरो की महिला वैज्ञानिकों तक पहुँच चुका है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ ने राजनीतिक पटल पर भी महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की है। मैं एक छात्र/छात्रा के रूप में शपथ लेता हूँ/लेती हूँ कि महिलाओं के सम्मान और उनकी गरिमा की रक्षा के लिए मैं सदैव तत्पर रहूँगा/रहूँगी।
कोमल है कमजोर नहीं तू, शक्ति का नाम ही नारी है,
जग को जीवन देने वाली, मौत भी तुझसे हारी है।
अब उठो ओ भारत की वीर और वीरांगनाओं अपना हक पहचानो,
तुम्हारे कंधों पर ही टिकी, ये दुनिया सारी है।
संवैधानिक अनुच्छेद और नागरिकों के अधिकार
हमारे संविधान ने हमें अधिकार तो दिए हैं, लेकिन उनके साथ कर्तव्यों की एक लंबी सूची भी दी है। जहाँ अनुच्छेद 19 हमें बोलने की आजादी देता है, वहीं अनुच्छेद 51A हमें यह याद दिलाता है कि सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना और देश की एकता बनाए रखना हमारा परम कर्तव्य है। हमें केवल यह नहीं पूछना चाहिए कि देश ने हमारे लिए क्या किया, बल्कि यह सोचना चाहिए कि हम देश के लिए क्या कर सकते हैं। मैं संविधान के इन आदर्शों को अपने आचरण में ढालने का प्रयास करूँगा/करूँगी।
कानून की ताकत से चलता ये देश महान है,
हर नागरिक के हाथ में यहाँ संविधान है।
अधिकारों की बातें तो सब करते हैं यहाँ,
जो कर्तव्यों को निभाए वही सच्चा इंसान है।
महापुरुषों का ऋण और भावी पीढ़ी का कर्तव्य
आज हम उन महापुरुषों को नमन करते हैं जिन्होंने अपना वर्तमान हमारे भविष्य के लिए बलिदान कर दिया। शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत हो, या नेताजी सुभाष चंद्र बोस का आह्वान—इन सभी के लहू से हमारे गणतंत्र की नींव सींची गई है। हम बाबा साहब अंबेडकर के ऋणी हैं जिन्होंने एक ऐसा सामाजिक ढांचा दिया जहाँ हर व्यक्ति सर उठाकर जी सके। इन महान आत्माओं के सपनों का भारत बनाना अब हमारी जिम्मेदारी है। मैं उनके पदचिह्नों पर चलने का संकल्प लेता हूँ/लेती हूँ।
वतन की मोहब्बत में खुद को तपाए बैठे हैं,
हम मर मिटने की कसम खाए बैठे हैं।
जो शहीद हुए उनकी शहादत को नमन करो,
हम उन्हीं के लहू से तिरंगा सजाए बैठे हैं।
विकसित भारत @ 2047 का संकल्प
आने वाले दो दशकों में जब भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा, तब हमारा देश दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति होगा। लेकिन यह तभी संभव है जब हम आज एक अनुशासित और कर्मठ नागरिक बनें। हमें एक ऐसा भारत बनाना है जहाँ जातिवाद और नफरत का कोई स्थान न हो। हमें तकनीक में आगे बढ़ना है, लेकिन अपनी संस्कृति की जड़ों को भी थामे रखना है। मैं प्रतिज्ञा करता हूँ/करती हूँ कि मैं भारत की अखंडता को बनाए रखने के लिए अपना सर्वोच्च योगदान दूँगा/दूँगी।
नफरत की दीवारों को गिराकर दम लेंगे,
हम नए भारत की नींव उठाकर दम लेंगे।
वो दिन दूर नहीं जब विश्व गुरु कहलाएगा भारत,
हम आसमां में फिर तिरंगा फहराकर दम लेंगे।
निष्कर्ष
अंत में, मैं यही कहना चाहता हूँ/चाहती हूँ कि हमारा संविधान हमारी सबसे बड़ी ढाल है। जब तक हम अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहेंगे, हमारा गणतंत्र अमर रहेगा। आइए, इस 77वें गणतंत्र दिवस पर हम सब मिलकर यह प्रण लें कि हम अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग केवल अपने स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए करेंगे।
कुछ नशा तिरंगे की आन का है, कुछ नशा मातृभूमि की शान का है,
हम लहराएंगे हर जगह ये तिरंगा, नशा ये हिंदुस्तान की शान का है!
जय हिन्द! जय भारत! वन्दे मातरम्! जय संविधान!
- 77वां गणतंत्र दिवस भाषण 2026
- संवैधानिक अधिकार और कर्तव्य
- नारी सशक्तिकरण पर भाषण
- मतदान का अधिकार (Right to Vote)
- विकसित भारत @ 2047
- नई शिक्षा नीति (NEP) और युवा
- डॉ. बी.आर. अंबेडकर और संविधान
- देशभक्ति शायरी और ओजस्वी भाषण
- गणतंत्र दिवस विशेष संबोधन 2026
- भारत का संविधान और अनुच्छेद
#RepublicDay2026 #77thRepublicDay #गणतंत्रदिवस #26January #RepublicDaySpeech #VandeMataram #JaiHind
#IndianConstitution #RightToVote #WomenEmpowerment #ViksitBharat2047 #NariShakti #YouthPower #EducationFirst
#DeshBhakti #ConstitutionalRights #BabaSahebAmbedkar #IndianYouth #Tiranga #PatrioticSpeech #AmritKaal
[…] A REVOLUTIONARY SPEECH ON 26TH JANUARY […]