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रस का मूल सूत्र

​रस सिद्धांत के प्रणेता आचार्य भरतमुनि हैं। उन्होंने अपने ग्रंथ ‘नाट्यशास्त्र’ में रस की निष्पत्ति के लिए यह सूत्र दिया है:

“विभावानुभावव्यभिचारीसंयोगाद्रसनिष्पत्तिः।”

अर्थ: विभाव, अनुभाव और व्यभिचारी (संचारी) भावों के संयोग से रस की निष्पत्ति (उत्पत्ति) होती है।

​रस की परिभाषा का श्लोक

​रस के स्वरूप को स्पष्ट करने के लिए साहित्य दर्पण में आचार्य विश्वनाथ ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण श्लोक कहा है:

“वाक्यं रसात्मकं काव्यम्।”

अर्थ: रसयुक्त वाक्य ही काव्य है। अर्थात जिस रचना को पढ़ने या सुनने से आनंद की अनुभूति हो, वही काव्य है।

​1. रस की परिभाषा और अंग

​काव्य को पढ़ने, सुनने या देखने से जिस ‘आनंद’ की अनुभूति होती है, उसे रस कहते हैं। इसे ‘काव्य की आत्मा’ माना जाता है।

रस के 4 प्रमुख अंग (अवयव):

  1. स्थायी भाव: जो हृदय में हमेशा विद्यमान रहते हैं।
  2. विभाव: रस को जगाने वाले कारण।
  3. अनुभाव: मन के भावों को व्यक्त करने वाली शारीरिक चेष्टाएं (जैसे पसीना आना, काँपना)।
  4. संचारी भाव: मन में उठने वाले अस्थाई विचार (इनकी संख्या 33 है)।

​2. रस और उनके स्थायी भाव (याद करने की धाकड़ ट्रिक)

ट्रिक कविता:

“करुण शोक से रोता है, वीर युद्ध में बढ़ता है।

श्रृंगार प्रेम की लीला है, रौद्र क्रोध में जलता है।

अद्भुत देख अचंभित हो, शांत निर्वेद में पलता है।

भय भयानक डराता है, वीभत्स घृणा को तलता है।”

क्रमरस का नामस्थायी भावट्रिक/पहचान
1श्रृंगार रसरति (प्रेम)नायक-नायिका का मिलन या बिछड़ना
2वीर रसउत्साहयुद्ध, दान या धर्म के प्रति जोश
3करुण रसशोकदुख, वियोग या किसी प्रिय वस्तु का विनाश
4हास्य रसहास (हँसी)अजीब वेशभूषा या बातों पर हँसी
5रौद्र रसक्रोधअपमान या शत्रु के कारण गुस्सा
6भयानक रसभय (डर)डरावनी वस्तु या जीव देखकर डरना
7वीभत्स रसजुगुप्सा (घृणा)मांस, हड्डी, खून आदि देखकर घिन आना
8अद्भुत रसविस्मय (आश्चर्य)कोई अनोखी या जादुई बात देखना
9शांत रसनिर्वेद (वैराग्य)भक्ति या संसार से विरक्ति
10वात्सल्य रसवत्सलताबच्चों के प्रति माता-पिता का प्रेम
11भक्ति रसअनुराग/भक्तिईश्वर के प्रति प्रेम

3. रसों के विस्तार से उदाहरण (भरपूर उदाहरण)

1. श्रृंगार रस (संयोग और वियोग)

  • उदाहरण 1 (संयोग): “बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय। सोह करें भौहनु हँसे, दैन कहै नटि जाय।” (राधा-कृष्ण का प्रेम)
  • उदाहरण 2 (वियोग): “निसिदिन बरसत नैन हमारे। सदा रहति पावस ऋतु हम पर, जब ते स्याम सिधारे।”

2. वीर रस

  • उदाहरण 1: “बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।”
  • उदाहरण 2: “वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो। सामने पहाड़ हो, सिंह की दहाड़ हो।”

3. करुण रस

  • उदाहरण 1: “अभी तो मुकुट बँधा था माथ, हुए कल ही हल्दी के हाथ। खुले भी न थे लाज के बोल, खिले थे चुम्बन शून्य कपोल।”
  • उदाहरण 2: “शोक विकल सब रोवहिं रानी। रूपु सीलु बलु तेजु बखानी।”

4. हास्य रस

  • उदाहरण 1: “हाथी जैसी देह, गेंडे जैसी खाल। तरबूजे सी खोपड़ी, खरबूजे से गाल।”
  • उदाहरण 2: “शीश पर गंगा हँसै, भुजनि भुजंगा हँसै, हास ही को दंगा भयो नंगा के विवाह में।”

5. रौद्र रस

  • उदाहरण 1: “उस काल मारे क्रोध के तन काँपने उनका लगा, मानों हवा के वेग से सोता हुआ सागर जगा।”
  • उदाहरण 2: “रे नृप बालक काल बस, बोलत तोहि न सँभार। धनुही सम तिपुरारि धनु, विदित सकल संसार।”

6. भयानक रस

  • उदाहरण 1: “एक ओर अजगरहि लखि, एक ओर मृगराय। विकल बटोही बीच ही, परयो मूरछा खाय।”
  • उदाहरण 2: “उधर गरजती सिंधु लहरियाँ, कुटिल काल के जालों सी।”

7. वीभत्स रस

  • उदाहरण 1: “सिर पर बैठ्यो काग, आँख दोउ खात निकारत। खींचत जीभहिं स्यार, अतिहि आनंद उर धारत।” (युद्ध क्षेत्र के शव)
  • उदाहरण 2: “निकल रही है आँखें, मुँह फाड़ते हैं, शव जीभ खींचकर कौवे चुभला-चुभला कर खाते हैं।”

8. अद्भुत रस

  • उदाहरण 1: “अखिल भुवन चर-अचर सब, हरि मुख में लखि मातु। चकित भई गदगद वचन, विकसित दृग पुलकातु।”
  • उदाहरण 2: “बिनु पद चलै सुनै बिनु काना। कर बिनु कर्म करै विधि नाना।”

9. शांत रस

  • उदाहरण 1: “मन रे तन कागद का पुतला। लागै बूँद बिनसि जाय छिन में, गरब करै क्यों इतना।”
  • उदाहरण 2: “जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं। सब अँधियारा मिटि गया, दीपक देख्या माहिं।”

10. वात्सल्य रस

  • उदाहरण 1: “किलकत कान्ह घुटुरुवनि आवत। मनिमय कनक नंद कै आँगन, बिम्ब पकरिबै धावत।”
  • उदाहरण 2: “मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो।”

परीक्षा के लिए जरूरी टिप्स:

  1. स्थायी भाव हमेशा रट लें, 90% सवाल यहीं से आते हैं।
  2. ​श्रृंगार रस को ‘रसराज’ कहा जाता है।
  3. ​भरत मुनि ने रसों की संख्या 8 मानी है (उन्होंने शांत रस को नहीं गिना था)।
  4. ​’उत्साह’ वीर रस का है, कंफ्यूज न हों।

​आशा है यह आपकी परीक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा!

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