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​छंद पहचानने की जादुई ट्रिक | मात्र 2 सेकंड में मात्राएँ गिनें!

छंद किसे कहते हैं?

​जिस रचना में अक्षरों एवं मात्राओं की संख्या, गणना, यति (विराम) और गति (लय) के विशेष नियमों का पालन किया जाता है, उसे छंद कहते हैं। इसे ‘पिंगल शास्त्र’ भी कहा जाता है क्योंकि इसके प्रणेता पिंगल ऋषि थे।

​छंद के प्रमुख प्रकार

​मुख्य रूप से छंद के दो प्रमुख प्रकार सबसे ज्यादा प्रचलित हैं:

  1. मात्रिक छंद: जिनमें मात्राओं की गणना की जाती है।
  2. वर्णिक छंद: जिनमें वर्णों (अक्षरों) की संख्या और क्रम का ध्यान रखा जाता है

1. मात्रिक छंद के उदाहरण

​मात्रिक छंदों में ‘दोहा’ और ‘चौपाई’ सबसे प्रसिद्ध हैं।

उदाहरणछंद का प्रकारविवरण
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।दोहाइसके पहले और तीसरे चरण में 13-13 तथा दूसरे और चौथे में 11-11 मात्राएँ होती हैं।
मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी।चौपाईइसके प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं।
रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून।दोहायह भी दोहा छंद का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

2. वर्णिक छंद के उदाहरण

​इनमें मात्राओं के बजाय वर्णों (Letters) की गिनती की जाती है।

  1. इन्द्रवज्रा: इसमें प्रत्येक चरण में 11 वर्ण होते हैं। ​जागो उठो भारत देशवासी, आलस्य त्यागो अब पूर्ण रूपे।

मात्राओं को गिनने के लिए बस दो बुनियादी नियम याद रखें:

  1. लघु (।): छोटे स्वर (अ, इ, उ, ऋ) — इसे 1 गिना जाता है।
  2. गुरु (ऽ): बड़े स्वर (आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ) और अनुस्वार (अं) — इसे 2 गिना जाता है।

​मात्रा गिनने के 3 ‘गोल्डन रूल्स’:

  1. संयुक्त अक्षर: यदि कोई आधा अक्षर (जैसे ‘न’ इन ‘नित्य’) आता है, तो उससे पहले वाला अक्षर गुरु (2) हो जाता है।
  2. चंद्रबिंदु (ँ): इसे लघु (1) ही गिना जाता है (जैसे ‘हँसना’ में ‘हँ’ = 1)।
  3. विसर्ग (ः): विसर्ग वाले वर्ण को गुरु (2) गिना जाता है (जैसे ‘अतः’ में ‘तः’ = 2)।

​दोहा छंद का विश्लेषण

​दोहा एक अर्धसम मात्रिक छंद है। इसके पहले और तीसरे चरण में 13-13 मात्राएँ और दूसरे और चौथे चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं।

यहाँ छंद की पंक्तियों के ठीक नीचे उनके शास्त्रीय संकेतों ( और ) को लिखकर समझाया गया है।

​याद रखें:

  • (लघु) = 1 मात्रा
  • (गुरु) = 2 मात्राएँ

​1. दोहा छंद (13 + 11 = 24 मात्राएँ)

​दोहे की पहचान है कि इसके अंत में एक गुरु और एक लघु (ऽ ।) का होना सुखद माना जाता है।

श्री  गु  रु   च  र  न   स  रो  ज   र  ज,

ऽ   ।   ।   ।   ।   ।   ।  ऽ  ।   ।   ।

(2 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 2 + 1 + 1 + 1 = 13)

नि  ज   म  नु   मु  कु  रु   सु  धा  रि।

।   ।   ।   ।   ।   ।   ।   ।  ऽ  ।

(1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 2 + 1 = 11)

2. चौपाई छंद (प्रत्येक चरण 16 मात्राएँ)

​चौपाई एक सम मात्रिक छंद है, जिसकी लय बहुत तीव्र और सुरीली होती है।

मं  ग  ल   भ  व  न   अ  मं  ग  ल   हा  री।

ऽ   ।   ।   ।   ।   ।   ।  ऽ  ।   ।   ऽ  ऽ

(2 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 2 + 1 + 1 + 2 + 2 = 16)

द्र  व  हु   सु  द  स  र  थ   अ  जि  र   बि  हा  री।

।   ।   ।   ।   ।   ।   ।   ।   ।   ।   ।   ।  ऽ  ऽ

(1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 2 + 2 = 16)

3. सोरठा छंद (11 + 13 = 24 मात्राएँ)

​सोरठा, दोहे का ठीक उल्टा होता है। इसके पहले चरण में 11 और दूसरे में 13 मात्राएँ होती हैं।

कुं  द   इं  दु   दे  ह,

ऽ   ।   ऽ   ।   ऽ  ।

(2 + 1 + 2 + 1 + 2 + 1 = 11)

उ  मा   र  म  न   क  रु  ना   अ  य  न।

।  ऽ   ।   ।   ।   ।   ।  ऽ   ।   ।   ।

(1 + 2 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 2 + 1 + 1 + 1 = 13)

मात्रा लगाने का एक छोटा-सा ‘मास्टर’ नियम:

  • आधा अक्षर: जैसे ‘मं’ में बिंदी है या ‘द्र’ में संयुक्त वर्ण है, तो वहाँ भार बढ़ जाता है और उसे गुरु (ऽ) गिना जाता है।
  • साधारण अक्षर: अ, इ, उ वाले वर्णों को हमेशा लघु (।) ही रखें।
MASTERKEY – छंद शिक्षा

छंद ज्ञान – MASTERKEY स्पेशल

परिभाषा: अक्षरों की संख्या, मात्रा, गणना, यति और गति के नियमों से बंधी हुई काव्य रचना को छंद कहते हैं।

1. मात्रिक छंद (Matrik Chhand)

जिन छंदों की रचना मात्राओं की गणना के आधार पर होती है।

A. दोहा (13-11 का योग)

रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून। । । । । ऽ ऽ ऽ । ऽ, । । ऽ ऽ । । ऽ । पानी गये न ऊबरे, मोती मानुष चून॥ ऽ ऽ । ऽ । ऽ । ऽ, ऽ ऽ ऽ । । ऽ ।

B. चौपाई (16 मात्राएँ)

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। । । । । ऽ । ऽ । । । ऽ । । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ । । । ऽ । । । ऽ । । ऽ । ।

C. सोरठा (11-13 का योग)

जो सुमिरत सिधि होय, गन नायक करिबर बदन। ऽ । । । । । । ऽ । , । । ऽ । । । । । । । । ।

2. वर्णिक छंद (Varnik Chhand)

जिन छंदों में वर्णों (अक्षरों) की संख्या और क्रम का ध्यान रखा जाता है।

उदाहरण (प्रमुख वर्णिक छंद)

  • इन्द्रवज्रा: (11 वर्ण) – जागो उठो भारत देशवासी…
  • मालिनी: (15 वर्ण) – प्रिय पति वह मेरा, प्राण प्यारा कहाँ है…
  • सवैया: (22-26 वर्ण) – मानुष हों तो वही रसखानि…

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