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हुआ सवेरा – कविता और व्याख्या
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हुआ सवेरा

हुआ सवेरा चिड़ियाँ बोलीं,
बच्चों ने तब आँखें खोलीं।
अच्छे बच्चे मंजन करते,
मंजन करके कुल्ला करते।
कुल्ला करके मुँह को धोते,
मुँह धो करके रोज नहाते।
रोज नहाकर खाना खाते,
खाना खाकर पढ़ने जाते।
“इस कविता का अर्थ है कि सुबह होते ही हमें आलस छोड़कर अच्छे बच्चों की तरह साफ़-सफाई करनी चाहिए और समय पर स्कूल जाना चाहिए।”

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