बेसिक शिक्षा प्राथमिक स्तर कक्षा- 3, इकाई एक – हमारा पर्यावरण, सीखो – ‘आनंदमयी कविता’
पाठ १: सीखो (आनंदमयी कविता)
NCERT वीणा 1 | कक्षा 3 | विषय: हिन्दी
कविता और हिंदी अर्थ
1. फूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना।
अर्थ: हमें हमेशा खुश रहना और मीठा बोलना चाहिए।
2. फल से लदी डालियों से नित, सीखो शीश झुकाना।
अर्थ: हमें बड़ों का सम्मान और विनम्र रहना चाहिए।
3. सीख हवा के झोंकों से लो, कोमल-कोमल बहना।
अर्थ: हमें सबके साथ कोमलता से पेश आना चाहिए।
4. दूध तथा पानी से सीखो, मिलना और मिलाना।
अर्थ: हमें मिल-जुलकर एकता के साथ रहना चाहिए।
5. सूरज की किरणों से सीखो, जगना और जगाना।
अर्थ: हमें स्वयं अनुशासित होकर दूसरों को प्रेरित करना चाहिए।
महत्वपूर्ण शब्दावली
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| नित | प्रतिदिन / हमेशा |
| शीश | मस्तक / सिर |
| कोमल | नरम / सुकुमार |
| जगना | चेतना / जागृत होना |
प्रश्नोत्तरी (Q&A)
प्रश्न: डालियाँ झुककर हमें क्या सिखाती हैं?
उत्तर: डालियाँ हमें विनम्रता और दूसरों का सम्मान करना सिखाती हैं।
प्रश्न: एकता का पाठ हमें किससे मिलता है?
उत्तर: दूध और पानी के मिश्रण से हमें एकता का पाठ मिलता है।