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सदाचार: – पूर्ण 12 पंक्तियाँ

पञ्चदश: पाठ: – सदाचार:

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1. रात्रौ शीघ्रं शयनीयम्। अर्थ: रात में जल्दी सोना चाहिए।
2. प्रात: खलु जागरणीयम्।। अर्थ: सुबह निश्चित ही जागना चाहिए।
3. अप्रियवचनं त्यजनीयम्। अर्थ: कड़वे (अप्रिय) वचन त्याग देने चाहिए।
4. मधुरं वाक्यं वदनीयम्।। अर्थ: मीठे वाक्य बोलने चाहिए।
5. मातृवन्दनं करणीयम्। अर्थ: माता को प्रणाम (वंदना) करना चाहिए।
6. पितृवन्दनं करणीयम्।। अर्थ: पिता को प्रणाम (वंदना) करना चाहिए।
7. स्नात्वा ध्यानं करणीयम्। अर्थ: स्नान करके ईश्वर का ध्यान करना चाहिए।
8. पाठ्यपुस्तकं पठनीयम्।। अर्थ: अपनी पाठ्यपुस्तक पढ़नी चाहिए।
9. वृक्ष-रक्षणं करणीयम्। अर्थ: पेड़ों की रक्षा करनी चाहिए।
10. वन्य-रक्षणं करणीयम्।। अर्थ: वनों और वन्य जीवों की रक्षा करनी चाहिए।
11. शस्य-वर्धनं करणीयम्। अर्थ: फसलों की पैदावार (वृद्धि) बढ़ानी चाहिए।
12. देश-रक्षणं करणीयम्।। अर्थ: अपने देश की रक्षा करनी चाहिए।

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यह पाठ “सदाचार:” (अच्छा व्यवहार/नैतिक आचरण) हमें जीवन में अपनाए जाने वाले अच्छे गुणों और कर्तव्यों के बारे में बताता है। यहाँ इसका हिंदी अनुवाद और अभ्यास के उत्तर दिए गए हैं:

पाठ का हिंदी अर्थ (Line to Line)

(रात में जल्दी सो जाना चाहिए।)

(सुबह निश्चित रूप से जल्दी जागना चाहिए।)

(कड़वे या अप्रिय वचन त्याग देने चाहिए।)

(मीठे/मधुर वाक्य बोलने चाहिए।)

(माता की वंदना/प्रणाम करना चाहिए।)

(पिता की वंदना/प्रणाम करना चाहिए।)

(स्नान करके ध्यान/ईश्वर की प्रार्थना करनी चाहिए।)

(अपनी पाठ्यपुस्तक पढ़नी चाहिए।)

(वन्य जीवों/वनों की रक्षा करनी चाहिए।)

शस्य-वर्धनं करणीयम्।

अभ्यास के उत्तर (Exercises)

२. एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दें)

  • (क) किं त्यजनीयम्? (क्या त्यागना चाहिए?) उत्तर: अप्रियवचनम्
  • (ख) किं पठनीयम्? (क्या पढ़ना चाहिए?) उत्तर: पाठ्यपुस्तकम्
  • (ग) किं किं करणीयम्? (क्या-क्या करना चाहिए?) उत्तर: मातृवन्दनं, पितृवन्दनं, ध्यानम् (या देश-रक्षणम्)

३. वाक्यानि पूरयत (वाक्यों को पूरा करें)

  • (क) अप्रियवचनं त्यजनीयम्
  • (ख) मधुरं वाक्यं वदनीयम्
  • (ग) देशरक्षणं करणीयम्

४. शब्दान् यथायोग्यं मेलयत (सही मिलान करें)

  • ​प्रात:खलु — जागरणीयम्
  • ​अप्रियवचनम् — त्यजनीयम्
  • ​स्नात्वा ध्यानं — करणीयम्
  • ​मधुरं वाक्यम् — वदनीयम्

५. विलोम-पदानि चित्वा लिखत (विलोम शब्द चुनकर लिखें)

  • ​मंजूषा: (अप्रियम्, रात्रि:, सायम्, मन्दम्, शयनीयम्)
  • ​दिवस: — रात्रि:
  • ​प्रात: — सायम्
  • ​शीघ्रं — मन्दम्
  • ​प्रियम् — अप्रियम्
  • ​जागरणीयम् — शयनीयम्

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