पञ्चदश: पाठ: – सदाचार:
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यह पाठ “सदाचार:” (अच्छा व्यवहार/नैतिक आचरण) हमें जीवन में अपनाए जाने वाले अच्छे गुणों और कर्तव्यों के बारे में बताता है। यहाँ इसका हिंदी अनुवाद और अभ्यास के उत्तर दिए गए हैं:
पाठ का हिंदी अर्थ (Line to Line)
रात्रौ शीघ्रं शयनीयम्।
(रात में जल्दी सो जाना चाहिए।)
प्रात: खलु जागरणीयम्।।
(सुबह निश्चित रूप से जल्दी जागना चाहिए।)
अप्रियवचनं त्यजनीयम्।
(कड़वे या अप्रिय वचन त्याग देने चाहिए।)
मधुरं वाक्यं वदनीयम्।।
(मीठे/मधुर वाक्य बोलने चाहिए।)
मातृवन्दनं करणीयम्।
(माता की वंदना/प्रणाम करना चाहिए।)
पितृवन्दनं करणीयम्।।
(पिता की वंदना/प्रणाम करना चाहिए।)
स्नात्वा ध्यानं करणीयम्।
(स्नान करके ध्यान/ईश्वर की प्रार्थना करनी चाहिए।)
पाठ्यपुस्तकं पठनीयम्।।
(अपनी पाठ्यपुस्तक पढ़नी चाहिए।)
वृक्ष-रक्षणं करणीयम्।
(वृक्षों की रक्षा करनी चाहिए।)
वन्य-रक्षणं करणीयम्।।
(वन्य जीवों/वनों की रक्षा करनी चाहिए।)
शस्य-वर्धनं करणीयम्।
(फसलों की वृद्धि/पैदावार बढ़ानी चाहिए।)
देश-रक्षणं करणीयम्।।
(अपने देश की रक्षा करनी चाहिए।)
अभ्यास के उत्तर (Exercises)
२. एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दें)
- (क) किं त्यजनीयम्? (क्या त्यागना चाहिए?) उत्तर: अप्रियवचनम्
- (ख) किं पठनीयम्? (क्या पढ़ना चाहिए?) उत्तर: पाठ्यपुस्तकम्
- (ग) किं किं करणीयम्? (क्या-क्या करना चाहिए?) उत्तर: मातृवन्दनं, पितृवन्दनं, ध्यानम् (या देश-रक्षणम्)
३. वाक्यानि पूरयत (वाक्यों को पूरा करें)
- (क) अप्रियवचनं त्यजनीयम्।
- (ख) मधुरं वाक्यं वदनीयम्।
- (ग) देशरक्षणं करणीयम्।
४. शब्दान् यथायोग्यं मेलयत (सही मिलान करें)
- प्रात:खलु — जागरणीयम्
- अप्रियवचनम् — त्यजनीयम्
- स्नात्वा ध्यानं — करणीयम्
- मधुरं वाक्यम् — वदनीयम्
५. विलोम-पदानि चित्वा लिखत (विलोम शब्द चुनकर लिखें)
- मंजूषा: (अप्रियम्, रात्रि:, सायम्, मन्दम्, शयनीयम्)
- दिवस: — रात्रि:
- प्रात: — सायम्
- शीघ्रं — मन्दम्
- प्रियम् — अप्रियम्
- जागरणीयम् — शयनीयम्