पाठ 11: समर्पण (श्री रामावतार त्यागी)
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२५ महत्वपूर्ण शब्दावली (शब्द-अर्थ)
१. अकिंचन: अत्यंत निर्धन
२. अर्पण: सौंपना
३. भाल: मस्तक या माथा
४. आशीष: आशीर्वाद
५. ऋण: कर्ज
६. किंचित: थोड़ा सा
७. निवेदन: विनती
८. समर्पित: भेंट किया हुआ
९. सुमन: फूल
१०. कंटक: काँटा
११. नीड़: घोंसला
१२. तृण: तिनका
१३. क्षण: पल
१४. मातृभूमि: जन्मभूमि
१५. लहू: रक्त/खून
१६. ध्वज: झंडा
१७. शीश: सिर
१८. चरण: पाँव
१९. प्रार्थना: विनती
२०. मोह: लगाव या ममता
२१. बंधन: बेड़ियाँ
२२. द्वार: दरवाजा
२३. आँगन: प्रांगण
२४. घनेरी: बहुत ज्यादा
२५. तलवार: खड्ग
सम्पूर्ण प्रश्नावली (अभ्यास कार्य)
(क) कुछ पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए:
१. “मां तुम्हारा ऋण बहुत है, मैं अकिंचन” उत्तर: कवि कहता है कि देश की धरती का मुझ पर बहुत कर्ज है, जबकि मैं बहुत गरीब हूँ, मेरे पास चुकाने को कुछ नहीं है। २. “नीड़ का तृण-तृण समर्पित” उत्तर: कवि अपने घर (घोंसले) की हर एक वस्तु और सुख-सुविधा को देश के लिए त्यागने को तैयार है।(ख) बोध प्रश्न:
प्रश्न: कवि माँझने के लिए किसे कह रहा है? उत्तर: कवि अपनी तलवार को धारदार बनाने (माँझने) के लिए कह रहा है। प्रश्न: ‘थाल में लाऊँ सजाकर भाल’ से क्या तात्पर्य है? उत्तर: इसका तात्पर्य है कि कवि देश की रक्षा के लिए अपना सिर (बलिदान) देने को तैयार है।(ग) भाषा की बात (व्याकरण):
१. देशभक्ति: देश के लिए भक्ति (तत्पुरुष समास)२. हृदय: उर, हिय, मन
३. हाथ: कर, हस्त, पाणि