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ध्वनि (Sound) – पाठ सारांश

इकाई 14: ध्वनि (Sound)

1. ध्वनि की उत्पत्ति और कम्पन्न

ध्वनि वस्तुओं में कम्पन्न (Vibration) के कारण उत्पन्न होती है। जब कम्पन्न बंद हो जाता है, तो ध्वनि भी बंद हो जाती है।

  • उदाहरण: खींचा हुआ रबर बैंड, स्कूल की बजती हुई घंटी।
  • आयाम (Amplitude): माध्य स्थिति से अधिकतम विस्थापन।
  • आवृत्ति (Frequency): प्रति सेकंड कम्पन्नों की संख्या (मात्रक: हर्ट्ज – Hz)।

2. ध्वनि के प्रकार (आवृत्ति के आधार पर)

श्रेणी आवृत्ति सीमा विवरण
अपश्रव्य (Infrasonic) 20 Hz से कम मनुष्य नहीं सुन सकते (उदा: हाथी)
श्रव्य (Audible) 20 Hz – 20,000 Hz मनुष्य के कान सुन सकते हैं
पराव्रव्य (Ultrasonic) 20,000 Hz से अधिक मनुष्य नहीं सुन सकते (उदा: चमगादड़)

3. ध्वनि का संचरण (Propagation)

ध्वनि के चलने के लिए माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) जरूरी है। निर्वात (Vacuum) में ध्वनि नहीं चल सकती।

याद रखें: ध्वनि की चाल ठोस में सबसे अधिक और गैस में सबसे कम होती है। वायु में इसकी चाल 332 मीटर/सेकंड होती है।

4. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

  • प्रबलता (Loudness): यह आयाम पर निर्भर करती है। आयाम अधिक होने पर ध्वनि तेज सुनाई देती है।
  • तारत्व (Pitch): यह आवृत्ति पर निर्भर करता है। उच्च आवृत्ति मतलब तीखी/पतली आवाज (जैसे: बिल्ली या महिला की आवाज)।
  • प्रतिध्वनि (Echo): ध्वनि का किसी सतह से टकराकर वापस सुनाई देना।
  • शोर (Noise): अनियमित कम्पन्न जो कानों को अप्रिय लगें।

अपनी समझ जाँचें

क्या ध्वनि निर्वात (जहाँ हवा न हो) में यात्रा कर सकती है?

​1. ध्वनि की उत्पत्ति (Origin of Sound)

​ध्वनि वस्तुओं में कम्पन (Vibration) के कारण उत्पन्न होती है। जब कोई वस्तु अपनी माध्य स्थिति के इधर-उधर गति करती है, तो उसे कम्पन कहते हैं।

  • उदाहरण: रबर बैंड को खींचकर छोड़ने पर वह कम्पन करता है और आवाज पैदा होती है। स्कूल की घंटी बजने पर उसे छूने से कम्पन महसूस किया जा सकता है।

​2. कम्पन के गुण (Properties of Vibration)

  • आयाम (Amplitude): कम्पन करने वाली वस्तु का अपनी माध्य स्थिति से अधिकतम विस्थापन ‘आयाम’ कहलाता है।
  • आवर्तकाल (Time Period): एक कम्पन पूरा करने में लगा समय ‘आवर्तकाल’ कहलाता है।
  • आवृत्ति (Frequency): प्रति सेकंड होने वाले कम्पनों की संख्या को आवृत्ति कहते हैं। इसका मात्रक हर्ट्ज (Hz) है।

​3. ध्वनि की प्रबलता एवं तारत्व

  • प्रबलता (Loudness): यह ध्वनि का वह गुण है जिससे ध्वनि धीमी या तेज सुनाई देती है। यह कम्पन के आयाम पर निर्भर करती है। (जैसे: धीरे बोलना vs चिल्लाना)
  • तारत्व (Pitch): इससे ध्वनि के मोटे या पतले (तीखे) होने का पता चलता है। यह आवृत्ति पर निर्भर करता है।
    • उदाहरण: बिल्ली की आवाज का तारत्व उच्च (पतली आवाज) होता है, जबकि कुत्ते के भौंकने का तारत्व निम्न (मोटी आवाज) होता है।

​4. ध्वनि का वर्गीकरण (Classification of Sound)

​आवृत्ति के आधार पर ध्वनि तीन प्रकार की होती है:

प्रकारआवृत्ति सीमाविवरण
अपश्रव्य (Infrasonic)20 Hz से कममनुष्य नहीं सुन सकते। (उदा: हाथी, कबूतर)
श्रव्य (Audible)20 Hz – 20,000 Hzइसे मनुष्य के कान सुन सकते हैं।
पराव्रव्य (Ultrasonic)20,000 Hz से अधिकमनुष्य नहीं सुन सकते। (उदा: चमगादड़, डॉल्फिन)

5. ध्वनि का संचरण (Propagation of Sound)

​ध्वनि को चलने के लिए माध्यम (Solid, Liquid, Gas) की आवश्यकता होती है। निर्वात (Vacuum) में ध्वनि नहीं चल सकती।

  • ठोस में: सबसे तेज चलती है (जैसे: रेल की पटरी या धागे वाला खिलौना टेलीफोन)।
  • द्रव में: पानी के अंदर पत्थरों को टकराने पर आवाज सुनाई देना।
  • गैस में: हवा के माध्यम से हम एक-दूसरे की बातें सुनते हैं।

​6. ध्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound)

​जब ध्वनि किसी सतह से टकराकर वापस लौटती है, तो उसे परावर्तन कहते हैं।

  • प्रतिध्वनि (Echo): किसी पहाड़ी या बड़े हॉल में आवाज का टकराकर दोबारा सुनाई देना। इसके लिए परावर्तक सतह की दूरी कम से कम 16.6 मीटर होनी चाहिए।
  • गूँज (Reverberation): बार-बार होने वाले परावर्तन के कारण ध्वनि का कुछ समय तक बने रहना।

​7. सुस्वर (Music) और शोर (Noise)

  • सुस्वर: नियमित कम्पनों से उत्पन्न ध्वनि जो कानों को प्रिय लगे (जैसे: वीणा, बाँसुरी)।
  • शोर: अनियमित कम्पनों से उत्पन्न ध्वनि जो कानों को अप्रिय लगे (जैसे: पटाखों की आवाज, भारी ट्रैफिक)।
  • हानिकारक प्रभाव: अत्यधिक शोर से बहरापन, अनिद्रा, तनाव और चिंता जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

मुख्य सारांश बिंदु:

  1. ​ध्वनि की चाल ठोस में सबसे अधिक और गैस में सबसे कम होती है।
  2. ​वायु में ध्वनि की चाल लगभग 332 मीटर/सेकंड होती है।
  3. ​ध्वनि संचरण के लिए माध्यम अनिवार्य है।

पाठ्य पुस्तक में दिए गए प्रश्नों के उत्तर

1. सही विकल्प का चयन (बहुविकल्पीय प्रश्न)

  • क. निम्नलिखित में किस ध्वनि का तारत्व अधिकतम है?
    • ​(अ) शेर की दहाड़
    • ​(ब) नदी का कलकल
    • ​(स) मेघ गर्जन
    • उत्तर: (द) मच्छरों की भिनभिनाहट
    • कारण: मच्छर के पंखों के कम्पन की आवृत्ति बहुत अधिक होती है, जिससे तारत्व (Pitch) बढ़ जाता है।
  • ख. SI पद्धति में आवृत्ति का मात्रक है –
    • ​(अ) सेकंड
    • ​(स) किलोग्राम
    • ​(द) मीटर
    • उत्तर: (ब) हर्ट्ज (Hz)
  • ग. 20 हर्ट्ज आवृत्ति से कम आवृत्ति की उत्पन्न ध्वनि कहलाती है –
    • ​(अ) श्रव्य
    • ​(ब) कर्कश
    • ​(द) पराश्रव्य
    • उत्तर: (स) अपश्रव्य
  • घ. ढोलक में ध्वनि उत्पन्न होती है –
    • ​(अ) रगड़ने से
    • ​(ब) खींचने से
    • ​(स) फूँक मारने से
    • उत्तर: (द) आघात से
  • ड. ध्वनि की चाल सबसे अधिक होती है –
    • ​(ब) गैस में
    • ​(स) द्रव में
    • ​(द) निर्वात में
    • उत्तर: (अ) ठोस में

2. सही जोड़े बनाइए (मिलान)

स्तम्भ (क)स्तम्भ (ख)
क. सुस्वर ध्वनिद. हारमोनियम, ढोलक से उत्पन्न ध्वनि
ख. श्रव्य ध्वनिस. मनुष्यों द्वारा सुनी जा सके वाली ध्वनि
ग. अपश्रव्य ध्वनिब. 20 कम्पन प्रति सेकंड से कम आवृत्ति की ध्वनि
घ. बाँसुरी से ध्वनिअ. फूँक मारकर उत्पन्न करते हैं

3. सही (✓) और गलत (✗) का चिह्न लगाइए

  • क. ध्वनि का वेग प्रकाश के वेग से अधिक होता है। -> (✗) (प्रकाश का वेग बहुत अधिक होता है)।
  • ख. उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि का तारत्व अधिक होता है। -> (✓)
  • ग. एक हर्ट्ज का अर्थ एक कम्पन प्रति सेकण्ड है। -> (✓)
  • घ. वीणा में कर्कश ध्वनि उत्पन्न होती है। -> (✗) (वीणा सुस्वर/मीठी ध्वनि उत्पन्न करती है)।
  • ड. ध्वनि संचरण के लिए माध्यम आवश्यक नहीं है। -> (✗) (माध्यम अनिवार्य है)।

​4. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  • क. कम्पन करती हुई वस्तु का अधिकतम विस्थापन आयाम कहलाता है।
  • ख. ध्वनि संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है।
  • ग. कम्पन करने वाली वस्तु द्वारा एक कम्पन में लगे समय को उसका आवर्तकाल कहते हैं।
  • घ. ध्वनि की चाल ठोस में अधिकतम होती है।
  • ड. किसी माध्यम में निश्चित ताप पर ध्वनि की चाल निश्चित (स्थिर) होती है।

​5. प्रश्नों के उत्तर (परिभाषाएँ)

  • क. प्रतिध्वनि: जब ध्वनि किसी पहाड़ी या दीवार से टकराकर परावर्तित होकर दोबारा सुनाई देती है, तो उसे प्रतिध्वनि कहते हैं।
  • ख. तारत्व: ध्वनि का वह गुण जिससे हम मोटी (भारी) या पतली (तीखी) ध्वनि के बीच अंतर कर सकते हैं। उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि पतली और निम्न आवृत्ति वाली ध्वनि मोटी होती है।
  • ग. ध्वनि प्रदूषण: वातावरण में अत्यधिक या अवांछित ध्वनियाँ ध्वनि प्रदूषण कहलाती हैं। निवारण: वाहनों का रखरखाव, लाउडस्पीकर का कम उपयोग और पेड़ लगाना।
  • घ. ध्वनि कैसे उत्पन्न होती है? वस्तुओं में कम्पन (Vibration) के कारण ध्वनि उत्पन्न होती है।

​6. न्यूमेरिकल/तार्किक प्रश्न

  • क. तारत्व का घटता क्रम: आवृत्ति जितनी अधिक, तारत्व उतना अधिक।
    • क्रम: C (1024 Hz) > B (512 Hz) > A (256 Hz)
  • ख. प्रतिध्वनि और गूँज:
    • ​व्यक्ति A (एक परावर्तन) -> प्रतिध्वनि
    • ​व्यक्ति B (दस परावर्तन) -> गूँज (Reverberation)

​7. बाँसुरी सुरीली क्यों लगती है?

​बाँसुरी से नियमित और आवर्ती कम्पन उत्पन्न होते हैं जो कान को सुखद लगते हैं (सुस्वर), जबकि लाउडस्पीकर की तीव्र आवाज अनियमित होती है जो कान पर कर्कश प्रभाव डालती है (शोर)।

​8. सुस्वर तथा शोर में अंतर

  • सुस्वर: नियमित कम्पन, सुनने में सुखद (जैसे: वीणा, कोयल की कूक)।
  • शोर: अनियमित कम्पन, सुनने में कष्टदायक (जैसे: पटाखों की आवाज, भारी ट्रैफिक)।

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