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​जहाँ शब्दों के विशिष्ट प्रयोग से काव्य में सौंदर्य आता है।

  • परिभाषा: जहाँ एक ही वर्ण की आवृत्ति बार-बार होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
  • उदाहरण: “तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाये।”
  • स्पष्टीकरण: यहाँ ‘त’ वर्ण की आवृत्ति बार-बार हुई है।
  • परिभाषा: जहाँ एक ही शब्द दो या दो से अधिक बार आए, परंतु हर बार उसका अर्थ भिन्न (अलग) हो।
  • उदाहरण: “कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय।”
  • स्पष्टीकरण: यहाँ पहले ‘कनक’ का अर्थ सोना है और दूसरे ‘कनक’ का अर्थ धतूरा है।
  • परिभाषा: जहाँ एक शब्द एक ही बार प्रयुक्त हो, लेकिन उसके एक से अधिक अर्थ निकलें।
  • उदाहरण: “रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून। पानी गये न ऊबरे, मोती मानुस चून॥”
  • स्पष्टीकरण: यहाँ ‘पानी’ शब्द के तीन अर्थ हैं: मोती के लिए (चमक), मनुष्य के लिए (इज्जत) और आटे के लिए (जल)।

​जहाँ अर्थ के माध्यम से काव्य में चमत्कार उत्पन्न होता है।

  • परिभाषा: जहाँ किसी प्रसिद्ध वस्तु या व्यक्ति की तुलना किसी अन्य समान गुण वाली वस्तु से की जाए। (पहचान: सा, सी, से, सरिस, सम)
  • उदाहरण: “पीपर पात सरिस मन डोला।”
  • स्पष्टीकरण: यहाँ ‘मन’ की तुलना ‘पीपल के पत्ते’ से की गई है।
  • परिभाषा: जहाँ उपमेय (जिसकी तुलना हो) और उपमान (जिससे तुलना हो) में कोई भेद न रहे, दोनों को एक ही मान लिया जाए।
  • उदाहरण: “चरन कमल बंदौ हरिराई।”
  • स्पष्टीकरण: यहाँ चरणों को ही सीधे ‘कमल’ कह दिया गया है (चरण रूपी कमल)।

उत्प्रेक्षा अलंकार

  • परिभाषा: जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना व्यक्त की जाए। (पहचान: मनु, मानो, जनु, जानो, मनहुँ)
  • उदाहरण: “सोहत ओढ़े पीत पटु, स्याम सलौने गात। मनहुँ नीलमनि सैल पर, आतपु परयो प्रभात॥”
  • स्पष्टीकरण: यहाँ कृष्ण के श्याम शरीर पर पीले वस्त्रों को देखकर ‘नीलमणि पर्वत पर सुबह की धूप’ की संभावना की गई है।
  • परिभाषा: जहाँ किसी बात का वर्णन इतना बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए कि वह लोक-मर्यादा के बाहर लगे।
  • उदाहरण: “आगे नदियाँ पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार। राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार॥”
  • स्पष्टीकरण: यहाँ राणा प्रताप के सोचने मात्र से घोड़े के नदी पार करने का वर्णन अतिशयोक्तिपूर्ण है।
  • परिभाषा: जहाँ जड़ प्रकृति (पेड़, बादल, फूल आदि) पर मानवीय चेष्टाओं या भावनाओं का आरोप किया जाए।
  • उदाहरण: “मेघ आये बड़े बन-ठन के सँवर के।”
  • स्पष्टीकरण: बादलों को मेहमान (दामाद) की तरह सजते-सँवरते हुए दिखाया गया है।
अलंकारमुख्य पहचान (Key)मुख्य तत्व
अनुप्रासवर्ण की आवृत्तिअक्षर (जैसे ‘क’, ‘ख’)
यमकशब्द की आवृत्तिशब्द अलग अर्थ के साथ
श्लेषएक शब्द, अनेक अर्थचिपका हुआ अर्थ
उपमासा, सी, से, सरिसतुलना (Comparison)
रूपकअभेद आरोपसमानता नहीं, वही मान लेना
उत्प्रेक्षामानो, जानो, मनहुँसंभावना (Supposition)

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