1. शब्दालंकार (Shabdalankar)
जहाँ शब्दों के विशिष्ट प्रयोग से काव्य में सौंदर्य आता है।
अनुप्रास अलंकार
- परिभाषा: जहाँ एक ही वर्ण की आवृत्ति बार-बार होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
- उदाहरण: “तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाये।”
- स्पष्टीकरण: यहाँ ‘त’ वर्ण की आवृत्ति बार-बार हुई है।
यमक अलंकार
- परिभाषा: जहाँ एक ही शब्द दो या दो से अधिक बार आए, परंतु हर बार उसका अर्थ भिन्न (अलग) हो।
- उदाहरण: “कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय।”
- स्पष्टीकरण: यहाँ पहले ‘कनक’ का अर्थ सोना है और दूसरे ‘कनक’ का अर्थ धतूरा है।
श्लेष अलंकार
- परिभाषा: जहाँ एक शब्द एक ही बार प्रयुक्त हो, लेकिन उसके एक से अधिक अर्थ निकलें।
- उदाहरण: “रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून। पानी गये न ऊबरे, मोती मानुस चून॥”
- स्पष्टीकरण: यहाँ ‘पानी’ शब्द के तीन अर्थ हैं: मोती के लिए (चमक), मनुष्य के लिए (इज्जत) और आटे के लिए (जल)।
2. अर्थालंकार (Arthalankar)
जहाँ अर्थ के माध्यम से काव्य में चमत्कार उत्पन्न होता है।
उपमा अलंकार
- परिभाषा: जहाँ किसी प्रसिद्ध वस्तु या व्यक्ति की तुलना किसी अन्य समान गुण वाली वस्तु से की जाए। (पहचान: सा, सी, से, सरिस, सम)
- उदाहरण: “पीपर पात सरिस मन डोला।”
- स्पष्टीकरण: यहाँ ‘मन’ की तुलना ‘पीपल के पत्ते’ से की गई है।
रूपक अलंकार
- परिभाषा: जहाँ उपमेय (जिसकी तुलना हो) और उपमान (जिससे तुलना हो) में कोई भेद न रहे, दोनों को एक ही मान लिया जाए।
- उदाहरण: “चरन कमल बंदौ हरिराई।”
- स्पष्टीकरण: यहाँ चरणों को ही सीधे ‘कमल’ कह दिया गया है (चरण रूपी कमल)।
उत्प्रेक्षा अलंकार
- परिभाषा: जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना व्यक्त की जाए। (पहचान: मनु, मानो, जनु, जानो, मनहुँ)
- उदाहरण: “सोहत ओढ़े पीत पटु, स्याम सलौने गात। मनहुँ नीलमनि सैल पर, आतपु परयो प्रभात॥”
- स्पष्टीकरण: यहाँ कृष्ण के श्याम शरीर पर पीले वस्त्रों को देखकर ‘नीलमणि पर्वत पर सुबह की धूप’ की संभावना की गई है।
अतिशयोक्ति अलंकार
- परिभाषा: जहाँ किसी बात का वर्णन इतना बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए कि वह लोक-मर्यादा के बाहर लगे।
- उदाहरण: “आगे नदियाँ पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार। राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार॥”
- स्पष्टीकरण: यहाँ राणा प्रताप के सोचने मात्र से घोड़े के नदी पार करने का वर्णन अतिशयोक्तिपूर्ण है।
मानवीयकरण अलंकार
- परिभाषा: जहाँ जड़ प्रकृति (पेड़, बादल, फूल आदि) पर मानवीय चेष्टाओं या भावनाओं का आरोप किया जाए।
- उदाहरण: “मेघ आये बड़े बन-ठन के सँवर के।”
- स्पष्टीकरण: बादलों को मेहमान (दामाद) की तरह सजते-सँवरते हुए दिखाया गया है।
तुलनात्मक सारणी (Quick Revision Table)
| अलंकार | मुख्य पहचान (Key) | मुख्य तत्व |
|---|---|---|
| अनुप्रास | वर्ण की आवृत्ति | अक्षर (जैसे ‘क’, ‘ख’) |
| यमक | शब्द की आवृत्ति | शब्द अलग अर्थ के साथ |
| श्लेष | एक शब्द, अनेक अर्थ | चिपका हुआ अर्थ |
| उपमा | सा, सी, से, सरिस | तुलना (Comparison) |
| रूपक | अभेद आरोप | समानता नहीं, वही मान लेना |
| उत्प्रेक्षा | मानो, जानो, मनहुँ | संभावना (Supposition) |