1. आदिकाल (वीरगाथा काल)
इस काल में चारण कवियों ने राजाओं की प्रशंसा और वीरता का वर्णन किया।
| कवि | प्रमुख रचनाएँ |
|---|---|
| चंदबरदाई | पृथ्वीराज रासो (हिंदी का प्रथम महाकाव्य) |
| नरपति नाल्ह | बीसलदेव रासो |
| जगनिक | परमाल रासो (आल्हा-खण्ड) |
| अमीर खुसरो | पहेलियाँ और मुकरियाँ |
| विद्यापति | कीर्तिलता, कीर्तिपताका, पदावली |
भक्तिकाल (स्वर्ण युग)
इसे हिंदी साहित्य का ‘स्वर्ण युग’ माना जाता है, जो दो धाराओं (सगुण और निर्गुण) में बँटा था।
निर्गुण धारा (ज्ञानाश्रयी एवं प्रेमाश्रयी)
- कबीरदास: बीजक (साखी, सबद, रमैनी)
- मलिक मोहम्मद जायसी: पद्मावत, अखरावट, आखिरी कलाम
सगुण धारा (रामभक्ति एवं कृष्णभक्ति)
- तुलसीदास: रामचरितमानस, विनय पत्रिका, कवितावली, गीतावली
- सूरदास: सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य लहरी
- मीराबाई: नरसी जी का मायरा, राग गोविंद
- रसखान: प्रेम वाटिका, सुजान रसखान
3. रीतिकाल
इस काल में श्रृंगार रस और लक्षण ग्रंथों की प्रधानता रही।
| कवि | प्रमुख रचनाएँ |
|---|---|
| केशवदास | रामचंद्रिका, कविप्रिया, रसिकप्रिया |
| बिहारी | बिहारी सतसई (700 से अधिक दोहे) |
| भूषण | शिवराज भूषण, शिवा बावनी, छत्रसाल दशक |
| घनानंद | सुजान सागर, विरह लीला |
4. आधुनिक काल
यहाँ से खड़ी बोली का विकास हुआ और कविता के साथ-साथ गद्य की अन्य विधाएँ भी आईं।
भारतेंदु एवं द्विवेदी युग
- भारतेंदु हरिश्चंद्र: भारत दुर्दशा, अंधेर नगरी, प्रेम फुलवारी
- अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’: प्रियप्रवास (खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य)
- मैथिलीशरण गुप्त: साकेत, भारत-भारती, यशोधरा
छायावाद (सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ)
- जयशंकर प्रसाद: कामायनी, लहर, झरना, आँसू
- सुमित्रानंदन पंत: पल्लव, चिदंबरा, वीणा
- सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’: राम की शक्ति पूजा, अनामिका, परिमल
- महादेवी वर्मा: यामा, दीपशिखा, नीरजा
प्रगतिवाद एवं प्रयोगवाद
- रामधारी सिंह ‘दिनकर’: कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी, उर्वशी, हुंकार
- अज्ञेय: आँगन के पार द्वार, कितनी नावों में कितनी बार
- गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’: चाँद का मुँह टेढ़ा है
- धर्मवीर भारती: कनुप्रिया, अंधा युग