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भारतीय मुद्रा: प्राचीन काल से वर्तमान तक की सम्पूर्ण जानकारी, भाग- 1

कौन सा सिक्का किसके शासनकाल में चलता तथा, यहाँ से पूरी जानकारी प्राप्त करें

महत्वपूर्ण जानकारी जो मैंने जोड़ी है:

  1. कौड़ी और दमड़ी: चूंकि ये बहुत पुराने हैं, इनका मूल्य उनके ऐतिहासिक महत्व पर निर्भर करता है। एक अच्छी स्थिति वाली मुगलकालीन ‘दमड़ी’ संग्राहकों के बीच ₹500 से ऊपर भी जा सकती है।
  2. ब्रिटिश काल के सिक्के: 1938-1939 के समय के ‘आना’ या ‘रुपये’ के सिक्के बहुत दुर्लभ माने जाते हैं, जिनका मूल्य हज़ारों में हो सकता है।
  3. क्रय शक्ति (Buying Power): ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, 19वीं शताब्दी के अंत में 1 रुपये में लगभग 1 मन (करीब 37-40 किलो) अनाज आ जाता था।
1- भारतीय मुद्रा इतिहास एवं संग्राहक मूल्य

भारतीय मुद्रा: प्राचीन से आधुनिक तक

कालखंड, धातु, क्रय शक्ति और वर्तमान बाजार मूल्य का विस्तृत विवरण

सिक्का/इकाई समय / शासनकाल धातु क्रय शक्ति (ऐतिहासिक) संग्राहक मूल्य (Collector’s Value)
सूचना: संग्राहक मूल्य (Collector’s Value) केवल एक अनुमान है। वास्तविक मूल्य सिक्के की स्थिति (Fine, Very Fine, UNC), ढलाई का वर्ष और टकसाल (Mint) की दुर्लभता पर निर्भर करता है। प्राचीन सिक्के कानूनी रूप से ‘Antiquities’ के अंतर्गत आ सकते हैं।

1- प्राचीन एवं मध्यकालीन युग (कौड़ी से धेला तक)-

यह वह समय था जब वस्तु विनिमय (Barter

system) और छोटे मूल्य के लिए प्राकृतिक वस्तुओं

का उपयोग होता था।​फूटी कौड़ी (Phuuti Kaudi)

और कौड़ी: प्राचीन भारत में समुद्र से मिलने वाली

कौड़ियों का उपयोग मुद्रा के रूप में होता था। इनका

उपयोग सिंधु घाटी सभ्यता के समय से लेकर ब्रिटिश

काल की शुरुआत तक ग्रामीण इलाकों में होता रहा।​

दमड़ी (Damdi): यह मुख्य रूप से मुगल काल (जैसे

अकबर के समय) में चलन में आई। यह तांबे का

सिक्का होता था।

  • ढेला (Dhela): यह भी मुगल काल और बाद मे
  • मराठा काल के दौरान प्रचलित था।

​2. ब्रिटिश काल और संक्रमण काल (पाई से आना

तक)

​यहाँ से मुद्रा का मानकीकरण (स्टैण्डर्डइजेशन शुरू हुआ।

  • पाई (Pie): यह ब्रिटिश भारत की सबसे छोटी
  • आधिकारिक इकाई थी। 1947 तक यह चलन में
  • रही।
  • पैसा (Paisa – पुराना): यह आज के पैसे से
  • अलग था। उस समय तांबे के बड़े पैसे चलते थे।
  • आना (Anna): ब्रिटिश शासन के दौरान 1 रुपया
  • 16 आना में विभाजित था। यह 1957 (दशमलव प्रणाली लागू होने तक) भारत में बहुत लोकप्रिय था।

​3. आधुनिक युग (चार आना से ₹1 तक)

  • चार आना (25 पैसे) और आठ आना (50 पैसे): ये सिक्के 1957 के बाद भी भारत में दशकों तक
  • चले। 2011 में 25 पैसे (चार आना) को
  • आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया, जबकि 50
  • पैसे अब भी तकनीकी रूप से वैध हैं लेकिन चलन में कम ही दिखते हैं।
  • रुपया (₹1): जो आधुनिक प्रतीक (\mathbf{₹})
  • आप इमेज में देख रहे हैं, उसे डी. उदय कुमार ने डिजाइन किया था|

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