🇮🇳 JALLIANWALA BAGH MASSACRE (13 APRIL 1919) 🇮🇳
जलियांवाला बाग हत्याकांड: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक काला अध्याय
1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और रौलट एक्ट का काला कानून
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीयों ने अंग्रेजों का साथ दिया था, इस उम्मीद में कि युद्ध के बाद उन्हें स्वशासन मिलेगा। लेकिन इसके उलट, ब्रिटिश सरकार ने 1919 में रौलट एक्ट (Rowlatt Act) पारित किया। इसे ‘बिना वकील, बिना अपील, बिना दलील’ का कानून कहा गया। इसके तहत सरकार किसी भी भारतीय को बिना किसी मुकदमे के अनिश्चित काल तक जेल में डाल सकती थी। इस काले कानून के विरोध में पूरे देश में प्रदर्शन हुए।
2. पंजाब में तनाव और डॉ. सैफुद्दीन किचलू व सत्यपाल की गिरफ्तारी
पंजाब में विरोध प्रदर्शन काफी उग्र थे। अमृतसर में दो प्रमुख नेताओं, डॉ. सैफुद्दीन किचलू और डॉ. सत्यपाल को अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया। उनकी रिहाई की मांग के लिए और रौलट एक्ट का शांतिपूर्वक विरोध करने के लिए 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन एक सभा बुलाई गई।
3. बैसाखी का वह खूनी दिन: 13 अप्रैल 1919
अमृतसर का जलियांवाला बाग चारों तरफ से ऊंची दीवारों से घिरा था और बाहर निकलने का केवल एक ही संकरा रास्ता था। वहां हजारों की संख्या में वृद्ध, महिलाएं और बच्चे एकत्रित थे। अमृतसर के कार्यवाहक सैन्य कमांडर ब्रिगेडियर जनरल रेजिनल्ड डायर को जब इसकी सूचना मिली, तो उसने इसे ब्रिटिश हुकूमत के आदेश की अवहेलना माना।
4. नरसंहार का तांडव: 1650 राउंड गोलियां
जनरल डायर ने बिना किसी चेतावनी के अपने सैनिकों को निहत्थी भीड़ पर गोलियां चलाने का आदेश दे दिया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 379 लोग मारे गए, लेकिन वास्तविकता में यह संख्या 1000 से अधिक थी। बाग में स्थित कुएं (शहीदी कुआं) में अपनी जान बचाने के लिए सैकड़ों लोग कूद गए, जिससे वह लाशों से भर गया।
5. भगत सिंह पर प्रभाव
इस घटना के समय भगत सिंह मात्र 12 वर्ष के थे। वे अमृतसर आए और उस बाग की खूनी मिट्टी को एक बोतल में भरकर ले गए। इस घटना ने उनके किशोर मन को झकझोर कर रख दिया और उन्होंने कसम खाई कि वे अंग्रेजों को देश से बाहर निकालकर ही दम लेंगे।
6. हंटर कमीशन और उधम सिंह का प्रतिशोध
दुनिया भर में आलोचना के बाद ‘हंटर कमीशन’ बनाया गया, लेकिन उसने डायर को ‘ब्रिटिश साम्राज्य का रक्षक’ बताकर छोड़ दिया। इसका बदला लेने के लिए शहीद उधम सिंह ने 21 साल बाद, 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में माइकल ओ’डायर (पंजाब के तत्कालीन गवर्नर) को गोली मारकर अपनी प्रतिज्ञा पूरी की।
13 अप्रैल 1919 का जलियांवाला बाग हत्याकांड भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे दर्दनाक और महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। इस घटना ने पूरे देश की चेतना को झकझोर कर रख दिया था।
यहाँ इस हत्याकांड से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं का क्रमबद्ध विवरण दिया गया है:
1. रौलट एक्ट का विरोध (मार्च 1919)
ब्रिटिश सरकार ने रौलट एक्ट पारित किया, जिसे 'काला कानून' कहा गया। इसके तहत सरकार किसी भी व्यक्ति को बिना किसी ट्रायल के जेल में डाल सकती थी। महात्मा गांधी ने इसके खिलाफ राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया।
2. स्थानीय नेताओं की गिरफ्तारी (10 अप्रैल 1919)
अमृतसर में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे दो लोकप्रिय नेताओं—डॉ. सैफुद्दीन किचलू और डॉ. सत्यपाल को ब्रिटिश अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया। इससे शहर में तनाव फैल गया और पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं।
3. मार्शल लॉ लागू होना
अमृतसर में बिगड़ते हालातों को देखते हुए प्रशासन की कमान ब्रिगेडियर जनरल रेजिनल्ड डायर को सौंप दी गई। शहर में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया और सार्वजनिक सभाओं पर पाबंदी लगा दी गई, हालांकि इसकी जानकारी ग्रामीण इलाकों से आए लोगों को नहीं थी।
4. बैसाखी की सभा (13 अप्रैल 1919)
बैसाखी के दिन शाम करीब 4:30 बजे जलियांवाला बाग में एक सभा बुलाई गई। इसमें लगभग 15,000 से 20,000 लोग शामिल थे, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी थे। बहुत से लोग केवल बैसाखी के मेले में शामिल होने अमृतसर आए थे और अनजाने में बाग में जमा हो गए थे।
5. अंधाधुंध गोलीबारी
जनरल डायर ने अपने सैनिकों (90 गोरखा और बलूच सैनिकों) के साथ बाग के एकमात्र संकरे निकास द्वार को घेर लिया। बिना किसी चेतावनी के उसने सैनिकों को निहत्थी भीड़ पर गोलियां चलाने का आदेश दिया।
- गोलीबारी की अवधि: लगभग 10-15 मिनट तक लगातार फायरिंग हुई।
- राउंड: कुल 1650 राउंड गोलियां चलाई गईं।
- निकास: बाग की दीवारें ऊंची थीं और रास्ता बहुत संकरा था, जिससे लोग भाग नहीं सके।
6. शहीदी कुआं और हताहत
अपनी जान बचाने के लिए सैकड़ों लोग बाग के अंदर मौजूद एक गहरे कुएं में कूद गए, जिसे आज 'शहीदी कुआं' कहा जाता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 379 लोग मारे गए, लेकिन अनाधिकारिक आंकड़ों के अनुसार शहीदों की संख्या 1,000 से अधिक थी।
7. परिणाम और राष्ट्रीय आक्रोश
- रवींद्रनाथ टैगोर: उन्होंने इस नरसंहार के विरोध में अपनी 'नाइटहुड' (Knight-Hood) की उपाधि वापस लौटा दी।
- हंटर कमीशन: सरकार ने जांच के लिए हंटर कमीशन बनाया, जिसने डायर को उसके पद से हटा तो दिया, लेकिन कोई कड़ी सजा नहीं दी।
- भगत सिंह: 12 वर्षीय भगत सिंह ने इस घटना के बाद बाग की मिट्टी को बोतल में भरकर कसम खाई कि वे अंग्रेजों को देश से निकालेंगे।
8. उधम सिंह का प्रतिशोध (1940)
घटना के 21 साल बाद, क्रांतिकारी शहीद उधम सिंह ने लंदन के कैक्सटन हॉल में पंजाब के तत्कालीन गवर्नर माइकल ओ'डायर की गोली मारकर हत्या कर दी, जिसने इस हत्याकांड का समर्थन किया था।
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