“कक्षा- 8, पाठ- 11 स्वतन्त्र भारत की चुनौतियाँ एवं विकास:
🇮🇳 स्वतन्त्र भारत की चुनौतियाँ एवं विकास: एक गौरवशाली सफर 🇮🇳
क्या आप जानते हैं कि 15 अगस्त 1947 की आधी रात को जब पूरी दुनिया सो रही थी, भारत एक नई सुबह की ओर बढ़ रहा था? लेकिन यह आजादी फूलों की सेज नहीं, बल्कि चुनौतियों का पहाड़ लेकर आई थी।
📌 पाठ के 5 सबसे महत्वपूर्ण बिंदु (Key Highlights):
- 1. खंडित भारत का एकीकरण: आजादी के समय देश 562 रियासतों में बंटा था। ‘लौह पुरुष’ सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपनी फौलादी इच्छाशक्ति से इन टुकड़ों को जोड़कर एक ‘अखंड भारत’ का निर्माण किया।
- 2. दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान: डॉ. बी.आर. अंबेडकर के नेतृत्व में 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन की मेहनत के बाद हमें मिला हमारा संविधान, जिसने हर नागरिक को बराबरी का हक दिया।
- 3. विदेशी कब्जा और मुक्ति: क्या आपको पता है कि 1947 के बाद भी गोवा और पांडिचेरी भारत का हिस्सा नहीं थे? 1961 में ‘ऑपरेशन विजय’ के जरिए गोवा को पुर्तगालियों से आजाद कराया गया।
- 4. शून्य से शिखर तक का सफर: गरीबी और भुखमरी से निपटने के लिए 1951 में पहली पंचवर्षीय योजना शुरू हुई, जिसने कृषि और भाखड़ा-नांगल जैसे बांधों की नींव रखी।
- 5. शरणार्थी समस्या: विभाजन के दर्द के बीच 80 लाख लोगों को बसाना और उन्हें नया जीवन देना आजाद भारत की सबसे पहली और बड़ी मानवीय जीत थी।
🧠 क्या आपको पता है? (Quick Quiz)
- प्रश्न: संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई थी?
- उत्तर: 9 दिसंबर, 1946।
📜 Quick Revision Chart: स्वतन्त्र भारत की चुनौतियाँ एवं विकास
1. प्रमुख ऐतिहासिक घटनाक्रम (Timeline)
| 9 दिसंबर 1946 | संविधान सभा की प्रथम बैठक। |
| 30 जनवरी 1948 | राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या। |
| 26 नवंबर 1949 | भारतीय संविधान बनकर तैयार हुआ। |
| 26 जनवरी 1950 | संविधान लागू हुआ (भारत गणतंत्र बना)। |
| 1 अप्रैल 1951 | प्रथम पंचवर्षीय योजना का शुभारंभ। |
| 19 दिसंबर 1961 | गोवा |
2. आजादी की 3 मुख्य चुनौतियाँ और समाधान
- शरणार्थी समस्या: पाकिस्तान से आए 80 लाख लोगों का पुनर्वास।
- समाधान: नए मंत्रालय का गठन और शिविरों की स्थापना।
- रियासतों का विलय: 562 देशी रियासतों को एक करना।
- समाधान: सरदार पटेल की सूझबूझ और ‘लौह’ नीति।
- आर्थिक पिछड़ापन: गरीबी और खाद्यान्न की कमी।
- समाधान: योजना आयोग (1950) का गठन और आधुनिक खेती।
3. महत्वपूर्ण व्यक्तित्व और उनका योगदान
- पंडित जवाहरलाल नेहरू: प्रथम प्रधानमंत्री, आधुनिक भारत के निर्माता।
- सरदार वल्लभभाई पटेल: ‘लौह पुरुष’, भारत के राजनीतिक एकीकरण के सूत्रधार।
- डॉ. बी.आर. अंबेडकर: संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष, दलितों के मसीहा।
- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद: संविधान सभा के स्थाई अध्यक्ष और प्रथम राष्ट्रपति।
4. विकास की नींव (पंचवर्षीय योजनाएँ)
- प्रथम योजना (1951-56): मुख्य जोर कृषि और सिंचाई पर (भाखड़ा-नांगल बांध)।
- द्वितीय योजना (1956-61): मुख्य जोर भारी उद्योगों पर (स्टील प्लांट, इंजन कारखाने)।
- लक्ष्य: आत्मनिर्भर भारत और आधुनिक तकनीक का विकास।
💡 याद रखने योग्य शब्दावली (Keywords)
- मिश्रित अर्थव्यवस्था: जहाँ सरकारी और निजी दोनों क्षेत्र मिलकर काम करते हैं।
- प्रिवी पर्स: रियासतों के राजाओं को दी जाने वाली सरकारी पेंशन।
- धर्मनिरपेक्षता: राज्य का कोई आधिकारिक धर्म न होना, सभी धर्म समान।
छात्रों के लिए संदेश: “इतिहास हमें हमारे संघर्षों की याद दिलाता है ताकि हम एक बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकें।” 🇮🇳
“राष्ट्र का निर्माण केवल ईंट-पत्थरों से नहीं, बल्कि नागरिकों के चरित्र और संघर्षों से होता है।”
यूपी प्राइमरी स्कूल – कक्षा 8 इतिहास
पाठ 11: स्वतन्त्र भारत की चुनौतियाँ एवं विकास
पाठ की प्रस्तावना
15 अगस्त, 1947 को जब भारत ने अपनी गुलामी की बेड़ियाँ काटीं, तो वह दिन केवल उत्सव का नहीं, बल्कि भारी जिम्मेदारियों और अभूतपूर्व चुनौतियों का भी था। लगभग दो सौ वर्षों के ब्रिटिश शासन ने भारत की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक कमर तोड़ दी थी। आजादी का सूरज अपने साथ विभाजन की विभीषिका भी लेकर आया था। तत्कालीन परिस्थितियों में भारत एक ऐसा नवजात राष्ट्र था जिसे एक साथ कई मोर्चों पर लड़ना था—चाहे वह सांप्रदायिक दंगे हों, शरणार्थियों का पुनर्वास हो या रियासतों का विलय।
इस पाठ का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को उन संघर्षों से परिचित कराना है जिनसे गुजरकर आज का आधुनिक भारत निर्मित हुआ है। हम जानेंगे कि किस प्रकार हमारे दूरदर्शी नेताओं ने शून्य से शुरुआत कर एक सशक्त लोकतंत्र की नींव रखी। देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक बिखरे हुए भूगोल को एक राष्ट्र के सूत्र में पिरोना था। साथ ही, गरीबी और अशिक्षा के अंधकार में डूबी जनता के लिए विकास के मार्ग प्रशस्त करना था। यह पाठ हमें सिखाता है कि स्वतन्त्रता केवल अधिकार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के प्रति एक निरंतर कर्तव्य है।
(अ) स्वतन्त्र भारत की तत्कालीन समस्याएं
1. शरणार्थियों की समस्या
देश विभाजन के बाद पाकिस्तान से लगभग 80 लाख हिंदू और सिख शरणार्थी अपनी जान बचाकर भारत आए। ये लोग अपना सब कुछ—घर, जमीन और संपत्ति—पीछे छोड़ आए थे। उनके लिए भोजन, वस्त्र और अस्थाई आवास की व्यवस्था करना सरकार के लिए एक विशाल कार्य था। दिल्ली, पंजाब और बंगाल में बड़े-बड़े शरणार्थी शिविर लगाए गए। इन लाखों लोगों को रोजगार देना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में फिर से स्थापित करना एक ऐसी चुनौती थी जिसने देश के सीमित संसाधनों पर भारी दबाव डाला, लेकिन सरकार ने अडिग रहकर इस मानवीय त्रासदी का सामना किया।
2. सांप्रदायिक दंगों का दंश
विभाजन की घोषणा के साथ ही देश के कई हिस्सों में भीषण सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी। नफरत की आग ने हजारों निर्दोषों की जान ले ली और लाखों को बेघर कर दिया। महात्मा गांधी ने शांति के लिए उपवास किए और नोआखाली जैसे अशांत क्षेत्रों का दौरा किया। कानून व्यवस्था बनाए रखना और लोगों के मन से असुरक्षा की भावना को समाप्त करना सरकार की प्राथमिकता थी। उस समय धर्मनिरपेक्षता के आदर्शों को बचाए रखना सबसे कठिन कार्य था, जिसे पंडित नेहरू और सरदार पटेल के नेतृत्व में कड़ाई से लागू किया गया ताकि भारत की मिली-जुली संस्कृति सुरक्षित रहे।
3. रियासतों के विलीनीकरण की चुनौती
आजादी के समय भारत में लगभग 562 छोटी-बड़ी देशी रियासतें थीं। अंग्रेजों ने इन्हें विकल्प दिया था कि वे भारत या पाकिस्तान में शामिल हों या स्वतंत्र रहें। यदि ये रियासतें अलग रहतीं, तो भारत एक राष्ट्र न होकर टुकड़ों का समूह बन जाता। हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर जैसी रियासतों ने शुरुआत में हिचकिचाहट दिखाई। इस कठिन परिस्थिति में ‘लौह पुरुष’ सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपनी कूटनीति और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया। उन्होंने अधिकांश राजाओं को समझा-बुझाकर और आवश्यकता पड़ने पर सैन्य शक्ति का संकेत देकर भारत संघ में शामिल होने के लिए राजी किया।
4. खाद्यान्न की कमी और आर्थिक संकट
विभाजन के कारण भारत के उपजाऊ गेहूं और चावल उत्पादक क्षेत्र (पश्चिमी पंजाब और पूर्वी बंगाल) पाकिस्तान में चले गए। इससे भारत में खाद्यान्न का गंभीर संकट पैदा हो गया। साथ ही, देश की अर्थव्यवस्था औपनिवेशिक शोषण के कारण पहले से ही जर्जर थी। औद्योगिक विकास नगण्य था और कृषि पुराने तरीकों पर निर्भर थी। सरकार को न केवल बढ़ती जनसंख्या का पेट भरना था, बल्कि उद्योगों के लिए कच्चा माल भी जुटाना था। इस समस्या के समाधान के लिए राशनिंग प्रणाली शुरू की गई और कृषि सुधारों की नींव रखी गई ताकि देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ सके।
(ब) स्वराज्य की चुनौतियाँ
1. संविधान का निर्माण एवं निदान
भारत के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक विस्तृत नियमावली की आवश्यकता थी। इसके लिए **संविधान सभा** का गठन किया गया, जिसकी पहली बैठक **9 दिसंबर 1946** को हुई। डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा इसके अस्थाई अध्यक्ष और बाद में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद स्थाई अध्यक्ष बने। संविधान का प्रारूप तैयार करने के लिए **डॉ. भीमराव अंबेडकर** की अध्यक्षता में ‘प्रारूप समिति’ बनाई गई।
संविधान निर्माताओं के सामने चुनौती थी कि वे भारत की विविधता, धर्म और जातियों के हितों की रक्षा कैसे करें। 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन के अथक परिश्रम के बाद **26 नवंबर 1949** को संविधान बनकर तैयार हुआ। इसे **26 जनवरी 1950** को पूरे देश में लागू किया गया, जिससे भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बना। संविधान ने सभी नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार दिया और छुआछूत जैसी कुरीतियों को अवैध घोषित किया, जिससे एक समावेशी समाज की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ।
2. विदेशी उपनिवेशों के विलिनीकारण की समस्या एवं निदान
1947 में ब्रिटिश शासन तो समाप्त हो गया, लेकिन भारत के कुछ हिस्से अब भी अन्य यूरोपीय शक्तियों के कब्जे में थे। फ्रांस के पास पांडिचेरी (पुदुच्चेरी), चंद्रनगर और माहे जैसे क्षेत्र थे, जबकि पुर्तगाल के पास गोवा, दमन और दीव था। इन विदेशी पॉकेटों का भारत में विलय राष्ट्र की अखंडता के लिए अनिवार्य था।
भारत सरकार ने शांतिपूर्ण कूटनीति का सहारा लिया। फ्रांसीसी सरकार के साथ बातचीत के परिणामस्वरूप 1954 में पांडिचेरी और अन्य क्षेत्र स्वेच्छा से भारत को सौंप दिए गए। हालांकि, पुर्तगाल ने गोवा को छोड़ने से साफ इनकार कर दिया। वहां की जनता ने भारी जन-आंदोलन किया। अंततः 1961 में भारत सरकार ने **’ऑपरेशन विजय’** के तहत सैन्य कार्रवाई की और मात्र 36 घंटों में पुर्तगालियों को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर दिया। इस प्रकार, गोवा और दमन-दीव भारत का अभिन्न अंग बने और भारत पूरी तरह से औपनिवेशिक नियंत्रण से मुक्त हुआ।
3. विकास की योजनाएँ एवं निदान
स्वतंत्रता के बाद भारत की सबसे बड़ी लड़ाई गरीबी और पिछड़ेपन के खिलाफ थी। आर्थिक विकास को व्यवस्थित करने के लिए 1950 में **योजना आयोग** का गठन किया गया। विकास के लिए ‘मिश्रित अर्थव्यवस्था’ का मॉडल अपनाया गया, जिसमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों की भूमिका थी।
**प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-1956)** मुख्य रूप से कृषि और सिंचाई पर केंद्रित थी। इसके तहत भाखड़ा-नांगल और हीराकुंड जैसे विशाल बांधों का निर्माण शुरू हुआ ताकि खेती को मानसून के भरोसे से निकाला जा सके। दूसरी योजना में भारी उद्योगों (जैसे भिलाई और राउरकेला स्टील प्लांट) पर जोर दिया गया। शिक्षा के प्रसार के लिए आईआईटी (IIT) और यूजीसी (UGC) जैसे संस्थानों की स्थापना की गई। इन योजनाओं का मुख्य लक्ष्य भारत को तकनीकी और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना था। गरीबी उन्मूलन के लिए सामुदायिक विकास कार्यक्रम चलाए गए, जिन्होंने ग्रामीण भारत के बुनियादी ढांचे को बदलने का प्रयास किया।
महत्वपूर्ण शब्दावली (Image Analysis)
| शब्द | अर्थ / व्याख्या |
|---|---|
| अग्रसर | इसका अर्थ है आगे बढ़ता हुआ या प्रगतिशील। विकास के पथ पर निरंतर चलना। |
| अनाधिकृत | जिस पर कानूनी रूप से अधिकार न हो। अवैध या बिना अनुमति के किया गया कार्य। |
| निर्यात | जब एक देश अपने यहाँ उत्पादित सामान को दूसरे देश में व्यापार हेतु बेचता है। |
अभ्यास कार्य (हल सहित)
1. बहुविकल्पीय प्रश्न
(1) भारत स्वतंत्र हुआ—
(क) 14 अगस्त, 1947
(ख) 15 अगस्त, 1947
(2) प्रथम पंचवर्षीय योजना लागू की गई—
(क) 1 अप्रैल, 1951
(ख) 11 अप्रैल, 1952
2. अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(1) जब हम आजाद हुए तो देश में कुल रियासतें कितनी थीं?
उत्तर: जब भारत 15 अगस्त, 1947 को आजाद हुआ, तब देश के भौगोलिक मानचित्र पर लगभग 562 देशी रियासतें विद्यमान थीं। ये रियासतें आकार में छोटी-बड़ी थीं और ब्रिटिश ताज की सर्वोच्चता के अधीन काम करती थीं। इन रियासतों का भारत संघ में विलय करना एक ऐतिहासिक चुनौती थी। सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से इन सभी छोटी-बड़ी इकाइयों को मिलाकर एक अखंड भारत का निर्माण किया गया। यह संख्या दर्शाती है कि आजादी के समय भारत राजनीतिक रूप से कितना खंडित था और इसे एक सूत्र में पिरोना कितना महत्वपूर्ण कार्य था।
(2) लौह पुरुष किसे कहा जाता है?
उत्तर: भारत के प्रथम गृहमंत्री और उप-प्रधानमंत्री **सरदार वल्लभभाई पटेल** को ‘लौह पुरुष’ (Iron Man of India) के नाम से जाना जाता है। उन्हें यह उपाधि उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति, साहसिक निर्णयों और रियासतों के एकीकरण में निभाई गई निर्णायक भूमिका के कारण दी गई। उन्होंने बिना किसी बड़े रक्तपात के भारत की सैकड़ों रियासतों को एकता के सूत्र में बांधा। उनका व्यक्तित्व एक चट्टान की तरह मजबूत था, जिसने बिखरते हुए राष्ट्र को स्थिरता प्रदान की। उनके योगदान के बिना आधुनिक भारत की भौगोलिक एकता की कल्पना करना असंभव है।
3. लघु उत्तरीय प्रश्न
(1) स्वतंत्र भारत का प्रधानमंत्री किसे बनाया गया तथा उनको शपथ किसने दिलाई?
उत्तर: स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री **पंडित जवाहरलाल नेहरू** को बनाया गया। 15 अगस्त, 1947 की मध्य रात्रि को उन्होंने ऐतिहासिक ‘नियति से साक्षात्कार’ (Tryst with Destiny) भाषण दिया। उन्हें पद की शपथ भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल **लॉर्ड माउंटबेटन** ने दिलाई थी। नेहरू जी का प्रधानमंत्री बनना भारत के लिए एक नए युग की शुरुआत थी, जहाँ उन्होंने ‘आधुनिक भारत के मंदिरों’ (बांधों और उद्योगों) की परिकल्पना की। उनके नेतृत्व में भारत ने लोकतांत्रिक मूल्यों और गुटनिरपेक्षता की नीति को अपनाया। शपथ ग्रहण समारोह इस बात का प्रतीक था कि सत्ता का हस्तांतरण अब आधिकारिक रूप से भारतीय हाथों में हो चुका है।
(2) शरणार्थियों की समस्या क्या थी?
उत्तर: विभाजन के दौरान पाकिस्तान से भारत आने वाले लाखों लोगों को ‘शरणार्थी’ कहा गया। उनकी सबसे बड़ी समस्या बेघर होना और असुरक्षा थी। अचानक अपना घर-बार छोड़ने के कारण उनके पास भोजन, कपड़े और दवाइयों की भारी कमी थी। सांप्रदायिक दंगों के कारण वे मानसिक रूप से बेहद डरे हुए थे। सरकार के लिए लाखों लोगों को शिविरों में बसाना और फिर उन्हें स्थाई रोजगार देना एक विकराल चुनौती थी। बहुत से शरणार्थी पंजाब और दिल्ली के कैंपों में नारकीय जीवन जीने को मजबूर थे। बच्चों की शिक्षा और बुजुर्गों के स्वास्थ्य की देखभाल करना भी एक बड़ी समस्या थी, जिसे सुलझाने में वर्षों का समय लगा।
4. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
(1) स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में कौन-कौन सी तत्कालीन समस्याएँ थीं? इनका समाधान किस प्रकार से किया गया?
उत्तर: स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत के सामने तीन प्रमुख तत्कालीन समस्याएँ थीं:
1. **शरणार्थियों का पुनर्वास:** विभाजन के कारण आए 80 लाख लोगों को बसाने के लिए सरकार ने ‘पुनर्वास मंत्रालय’ बनाया। उन्हें दिल्ली और पंजाब के विभिन्न हिस्सों में खाली जमीनें और मकान आवंटित किए गए ताकि वे आत्मनिर्भर हो सकें।
2. **रियासतों का विलय:** भारत की एकता को खंडित होने से बचाने के लिए सरदार पटेल ने रियासतों के राजाओं से बातचीत की। उन्होंने ‘प्रिवी पर्स’ (पेंशन) का लालच देकर और राष्ट्रवाद की भावना जगाकर 560 से अधिक रियासतों को भारत में मिलाया। कश्मीर और हैदराबाद जैसे कठिन मामलों में दृढ़ कार्रवाई की गई।
3. **खाद्यान्न और आर्थिक संकट:** जर्जर अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए योजना आयोग का गठन कर ‘पंचवर्षीय योजनाएँ’ शुरू की गईं। सिंचाई परियोजनाओं (जैसे भाखड़ा-नांगल) पर निवेश किया गया ताकि कृषि उत्पादन बढ़े और विदेशों पर निर्भरता कम हो।
इन समस्याओं का समाधान सामूहिक प्रयास, दूरदर्शी नेतृत्व और जनता के सहयोग से किया गया, जिससे भारत एक स्थिर राष्ट्र बन सका।
🇮🇳 कक्षा 8 इतिहास – पाठ 11 क्विज़ 🇮🇳
प्रश्न यहाँ लोड होगा…
- स्वतन्त्र भारत की चुनौतियाँ (Challenges of Independent India)
- यूपी बोर्ड कक्षा 8 इतिहास पाठ 11 (UP Board Class 8 History Chapter 11)
- भारत का विभाजन और विकास (Partition and Development of India)
- Indian Constitution Formation Class 8
- Integration of Princely States (रियासतों का विलीनीकरण)
In this educational content, we explore UP Board Class 8 History Chapter 11: ‘Challenges and Development of Independent India’. Learn about the partition crisis, refugee problems, and the role of Sardar Patel in uniting 562 states. We cover the formation of the Indian Constitution (1950) and Five-Year Plans for economic growth.
इस वीडियो/ब्लॉग में यूपी बोर्ड कक्षा 8 इतिहास के पाठ 11 ‘स्वतन्त्र भारत की चुनौतियाँ एवं विकास’ की पूरी व्याख्या है। इसमें शरणार्थी समस्या, रियासतों का विलय, संविधान निर्माण और भारत की विकास योजनाओं को गहराई से समझाया गया है।
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| Independent India Chapter 11 | UP Board History Solutions |
| स्वतंत्र भारत का विकास | रियासतों का एकीकरण |
| Constitution Day India | First Prime Minister of India |
| Challenges after 1947 | Indian Economy 1950 |
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