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स्वशासन मास्टर गेम – 20 प्रश्न

अधिकारी पहचानें: 20 प्रश्न

हर सवाल के बाद विकल्पों की जगह बदल जाएगी। ध्यान से खेलें!

अध्याय का मुख्य सारांश

​भारत एक विशाल देश है, जिसमें शासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए तीन स्तरों पर विभाजित किया गया है: केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय स्वशासन। स्थानीय स्वशासन का अर्थ है—”जनता का अपना शासन”, जहाँ स्थानीय समस्याओं का समाधान वहीं के लोगों द्वारा किया जाता है।

1. ग्रामीण स्वशासन (पंचायती राज)

​ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए त्रि-स्तरीय ढांचा कार्य करता है:

  • ग्राम पंचायत: यह गाँव के स्तर पर होती है। इसका मुखिया ‘ग्राम प्रधान’ होता है, जिसे 18 वर्ष से अधिक आयु के ग्रामीण 5 वर्ष के लिए चुनते हैं।
  • क्षेत्र पंचायत: कई ग्राम पंचायतों को मिलाकर बनती है। इसका मुखिया ‘ब्लॉक प्रमुख’ होता है।
  • जिला पंचायत: यह जिले की सभी क्षेत्र पंचायतों से मिलकर बनती है। इसका मुखिया ‘जिला पंचायत अध्यक्ष’ कहलाता है।
  • प्रमुख कार्य: नालियां, खड़ंजे बनवाना, पेयजल (हैंडपंप) की व्यवस्था, सफाई और प्रकाश की व्यवस्था करना।

2. नगरीय स्वशासन (नगरीय निकाय)

​नगरों की जनसंख्या के आधार पर तीन प्रकार की संस्थाएं काम करती हैं:

  • नगर पंचायत: छोटे नगरों के लिए।
  • नगर पालिका परिषद: मध्यम आकार के शहरों के लिए।
  • नगर निगम: बहुत बड़े शहरों या महानगरों के लिए।
  • प्रमुख: नगर पंचायत/पालिका के मुखिया को ‘अध्यक्ष’ और नगर निगम के मुखिया को ‘मेयर’ या ‘महापौर’ कहते हैं।

3. जिला प्रशासन और प्रमुख अधिकारी

​जिले में शांति, सुरक्षा और विकास के लिए सरकार द्वारा अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है:

  • जिलाधिकारी (DM): जिले का सबसे बड़ा अधिकारी, जो कानून-व्यवस्था और लगान वसूली देखता है।
  • पुलिस अधीक्षक (SP): अपराधों को रोकना और कानून का पालन कराना।
  • जिला न्यायाधीश: विवादों का निपटारा करना और न्याय देना।
  • मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO): स्वास्थ्य सेवाएं, अस्पताल और टीकाकरण का प्रबंधन।
  • जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA): प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की देख-रेख।
  • मुख्य विकास अधिकारी (CDO): जिले की सभी विकास योजनाओं को लागू करना।

निष्कर्ष

​स्वशासन का वास्तविक उद्देश्य जनता की भागीदारी से विकास करना है। जहाँ जन प्रतिनिधि (प्रधान, मेयर) जनता द्वारा चुने जाते हैं, वहीं अधिकारी (DM, SP) अपनी योग्यता और प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्त होते हैं। नागरिकों का कर्तव्य है कि वे इन प्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ मिलकर विकास कार्यों में सहयोग दें।

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