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Rowlatt Act 1919 – Information

रौलट एक्ट (Rowlatt Act)

पारित होने की तिथि: 18 मार्च, 1919

मुख्य कारण

ब्रिटिश सरकार भारत में उभर रहे राष्ट्रवादी आंदोलनों और क्रांतिकारी गतिविधियों को कुचलने के लिए एक दमनकारी कानून चाहती थी, ताकि उनका शासन सुरक्षित रहे।

मुख्य बिंदु

  • किसी भी संदेहास्पद व्यक्ति को बिना वारंट गिरफ्तार किया जा सकता था।
  • बिना किसी कानूनी प्रक्रिया (Trial) के 2 साल तक जेल में रखने का अधिकार।
  • क्रांतिकारियों की गतिविधियों को पूरी तरह प्रतिबंधित करना।
  • हथियार रखने पर सख्त पाबंदी और प्रेस सेंसरशिप।
महात्मा गांधी का विरोध: गांधी जी ने इसे “काला कानून” कहा और इसके विरोध में 6 अप्रैल 1919 को देशव्यापी हड़ताल (रौलट सत्याग्रह) का आह्वान किया। इसी कानून के विरोध का परिणाम आगे चलकर जलियांवाला बाग हत्याकांड के रूप में सामने आया।




Rowlatt Act: मुख्य बिंदु और कारण

  • कब पारित हुआ: 18 मार्च, 1919 को इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल द्वारा।
  • मुख्य कारण: प्रथम विश्व युद्ध के बाद भारत में बढ़ रही क्रांतिकारी गतिविधियों और राष्ट्रवाद को कुचलना। ब्रिटिश सरकार चाहती थी कि उनके पास बिना किसी कानूनी अड़चन के विद्रोहियों को दबाने की शक्ति हो।
  • मुख्य बिंदु:
    1. बिना ट्रायल जेल: सरकार किसी भी व्यक्ति को केवल संदेह के आधार पर 2 साल तक बिना मुकदमा चलाए जेल में रख सकती थी।
    2. प्रेस पर नियंत्रण: प्रेस की स्वतंत्रता को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया था।
    3. विशेष अदालतें: राजनीतिक कैदियों के लिए विशेष अदालतों का प्रावधान था जहाँ अपील करने का कोई अधिकार नहीं था।
    4. गांधी जी का विरोध: महात्मा गांधी ने इसके विरोध में ‘रौलट सत्याग्रह’ शुरू किया और इसे ‘काला कानून’ कहा।

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One thought on “Rolect Act 1917”

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