up basic education class 5 sanskrit
प्रथमः पाठः : वन्दना
(कक्षा – 5, संस्कृत सुबोध)
वन्दे सदा स्वदेशं, एतादृशं स्वदेशम्।
वन्दे सदा स्वदेशं, एतादृशं स्वदेशम्॥
अर्थ: मैं हमेशा अपने देश की वंदना करता हूँ, ऐसे अपने देश को प्रणाम करता हूँ।
गंगा पुनाति भालं, तन्मे सुवर्णकुल्या।
वन्दे सदा स्वदेशं, एतादृशं स्वदेशम्॥
अर्थ: जिसके मस्तक को गंगा पवित्र करती है और जिसकी नदियाँ सोने के समान (मूल्यवान) हैं, मैं अपने उस देश की वंदना करता हूँ।
वन्दे ध्वजं त्रिवर्णं, वन्दे स्वतंत्रदेशम्।
वन्दे सदा स्वदेशं, एतादृशं स्वदेशम्॥
अर्थ: मैं अपने तिरंगे झंडे की वंदना करता हूँ, मैं अपने स्वतंत्र देश की वंदना करता हूँ। मैं सदा अपने देश की वंदना करता हूँ।
कठिन शब्दों के अर्थ (शब्दार्थाः)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| वन्दे | वंदना करता हूँ / प्रणाम करता हूँ |
| सदा | हमेशा |
| स्वदेशम् | अपने देश को |
| एतादृशं | ऐसे / इस प्रकार के |
| पुनाति | पवित्र करती है |
| भालं | मस्तक / माथा |
| त्रिवर्णं | तीन रंगों वाला (तिरंगा) |
वन्दे सदा स्वदेशम्
प्रश्न 1 / 5
[…] Sanskrit subodh: VANDANA […]