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बाल कविताएं

🌈 बच्चों की पाठशाला 🌈

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सवेरा

जागो बच्चों हुआ सवेरा, चिड़ियों ने तज दिया बसेरा। दूर भगाकर अंधकार को, डाला है दिनकर ने डेरा।।

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अच्छी बात

यह है बड़े पते की बात, सदा रहें हम मिलकर साथ। लड़ना तुम बस छोड़ो भाई, वरना मिलेगी नहीं मिठाई।

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चंदा मामा

चंदा मामा रोज़ रात को, मेरी छत पर आते हो। जगमग जगते तारों की, झलक हमें दिखलाते हो। दिन में नहीं रात में हरदम, तुम ही मुझको भाते हो।

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