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ध्वनि विज्ञान – विस्तृत अध्याय

ध्वनि (Sound): संपूर्ण विस्तृत अध्याय

1. ध्वनि की प्रकृति और संचरण

ध्वनि ऊर्जा का एक रूप है जो कंपनों (Vibrations) द्वारा उत्पन्न होती है। भौतिकी की दृष्टि से ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं। ये यांत्रिक (Mechanical) और प्रत्यास्थ (Elastic) प्रकृति की होती हैं।

ध्वनि तरंगों के संचरण (Propagation) के लिए किसी न किसी भौतिक माध्यम जैसे ठोस, द्रव एवं गैस की अनिवार्य रूप से आवश्यकता होती है। निर्वात (Vacuum) में ध्वनि का संचरण संभव नहीं है क्योंकि वहाँ माध्यम के कण अनुपस्थित होते हैं, जिससे कंपन आगे नहीं बढ़ पाते।

2. आवृत्ति के आधार पर तरंगों का वर्गीकरण

आवृत्ति के मान के आधार पर ध्वनि तरंगों को तीन विशिष्ट श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

(i) अवश्रव्य तरंगें (Infrasonic Waves): वे तरंगें जिनकी आवृत्ति 20Hz से कम होती है, ‘अवश्रव्य तरंगें’ कहलाती हैं। इन्हें मनुष्य के कान नहीं सुन सकते। बहुत बड़े आकार के स्रोत, जैसे कि भूकंप के समय पृथ्वी के भीतर से उत्पन्न तरंगें या कुछ भारी जानवर (जैसे हाथी), इन्हें उत्पन्न करते हैं।

(ii) श्रव्य तरंगें (Audible Waves): वे तरंगें जिनकी आवृत्ति 20Hz से लेकर 20,000Hz के मध्य होती है, ‘श्रव्य तरंगें’ कहलाती हैं। केवल इन्हीं तरंगों को मनुष्य के कान ग्रहण कर सकते हैं और सुन सकते हैं।

(iii) पराश्रव्य तरंगें (Ultrasonic Waves): वे तरंगें जिनकी आवृत्ति 20,000Hz (20kHz) से अधिक होती है, ‘पराश्रव्य तरंगें’ कहलाती हैं। इन्हें मनुष्य नहीं सुन सकते, परंतु ये अत्यधिक ऊर्जावान होती हैं। इनका उपयोग सोनार (SONAR), ईकोकार्डियोग्राफी (ECG), अल्ट्रासोनोग्राफी और कीमती कपड़ों की सफाई में किया जाता है।

3. ध्वनि के प्रमुख लक्षण (Characteristics)

किसी भी ध्वनि को विस्तार से समझने के लिए इन तीन प्रमुख भौतिक लक्षणों का अध्ययन किया जाता है:

A. तारत्व (Pitch): यह ध्वनि का वह गुण है जिससे आवाज़ के ‘मोटे’ या ‘पतले’ होने का निर्धारण होता है। हमारा मस्तिष्क उत्सर्जित ध्वनि की आवृत्ति को जिस प्रकार अनुभव करता है, वही तारत्व है। उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि का तारत्व उच्च होता है (जैसे महिलाओं या बच्चों की आवाज़), जिससे आवाज़ पतली सुनाई देती है। वहीं निम्न आवृत्ति का तारत्व निम्न होता है, जिससे आवाज़ भारी लगती है (जैसे पुरुषों की आवाज़)।

B. तीव्रता (Intensity): किसी एकांक क्षेत्रफल (Unit Area) से प्रति सेकंड गुजरने वाली ध्वनि ऊर्जा की मात्रा को तीव्रता कहते हैं। यह ध्वनि की शक्ति का एक वस्तुनिष्ठ मापन है।

C. प्रबलता (Loudness): प्रबलता ध्वनि की तीव्रता के लिए कानों की शारीरिक अनुक्रिया (Response) या संवेदनशीलता है। दो ध्वनियाँ समान तीव्रता की हो सकती हैं, फिर भी हमारे कान किसी एक को अधिक ‘तेज’ या ‘प्रबल’ महसूस कर सकते हैं क्योंकि हमारे कान उस आवृत्ति के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।

4. प्रतिध्वनि (Echo) और परावर्तन

जब ध्वनि किसी ठोस या द्रव परावर्तक सतह से टकराकर वापस आती है, तो उसे प्रतिध्वनि (Echo) कहते हैं। हमारे मस्तिष्क में ध्वनि की संवेदना लगभग 0.1 सेकंड तक बनी रहती है। स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए मूल ध्वनि और परावर्तित ध्वनि के बीच कम से कम 0.1 सेकंड का समय अंतराल होना चाहिए। इसके लिए परावर्तक सतह की दूरी स्रोत से कम से कम 17.2 मीटर होनी अनिवार्य है।

5. सोनार (SONAR) तकनीक

इसका पूर्ण रूप ‘Sound Navigation and Ranging’ है। यह एक ऐसी युक्ति है जिसमें पराश्रव्य (Ultrasonic) तरंगों का उपयोग करके पानी के अंदर स्थित वस्तुओं की दूरी, दिशा तथा चाल मापने के लिए किया जाता है। यह समुद्र की गहराई नापने और जलमग्न चट्टानों या पनडुब्बियों का पता लगाने में अत्यंत उपयोगी है।

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