भारत में जनगणना की शुरुआत (Census in India)
भारत में जनगणना की प्रक्रिया दो चरणों में शुरू हुई मानी जाती है:
- प्रथम प्रयास (1872): भारत की पहली जनगणना लॉर्ड मेयो (Lord Mayo) के कार्यकाल में 1872 में हुई थी। हालांकि, यह व्यवस्थित रूप से पूरे देश में एक साथ नहीं की गई थी।
- नियमित जनगणना (1881): भारत की पहली पूर्ण और व्यवस्थित (Synchronous) जनगणना 1881 में लॉर्ड रिपन (Lord Ripon) के समय में शुरू हुई। इसी के बाद से भारत में हर 10 वर्ष के अंतराल पर जनगणना करने की परंपरा बनी।
स्थानीय स्वशासन का जनक (Father of Local Self-Government)
भारत में लॉर्ड रिपन (Lord Ripon) को ‘स्थानीय स्वशासन का जनक’ कहा जाता है।
- कारण: उन्होंने 1882 में एक प्रस्ताव पारित किया जिसने स्थानीय बोर्डों (नगर पालिकाओं और जिला परिषदों) को कानूनी आधार प्रदान किया।
- उद्देश्य: उनका मानना था कि प्रशासन में स्थानीय लोगों की भागीदारी होनी चाहिए ताकि लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हो सकें।
🇮🇳 भारत जनगणना क्विज 🇮🇳
प्रश्न यहाँ लोड होगा…
नोट: सही पर +1, गलत पर -0.25 ❌
प्राचीन भारत में जनगणना के प्रमाण
भारत में जनगणना का इतिहास आधुनिक काल से बहुत पुराना है।
- कौटिल्य का अर्थशास्त्र (321-296 ईसा पूर्व): चाणक्य के अर्थशास्त्र में कराधान के उद्देश्य से जनसंख्या के आंकड़ों के संग्रहण का उल्लेख मिलता है।
- आईन-ए-अकबरी: मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल के दौरान भी जनसंख्या, उद्योग और धन से संबंधित विस्तृत आंकड़े जुटाए जाते थे।
आधुनिक जनगणना की शुरुआत: लॉर्ड मेयो (1872)
भारत में आधुनिक पद्धति से पहली जनगणना 1872 में ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड मेयो (Lord Mayo) के कार्यकाल में आयोजित की गई थी।
- प्रकृति: यह एक गैर-तुल्यकालिक (Non-Synchronous) जनगणना थी, जिसका अर्थ है कि यह पूरे देश में एक ही समय पर नहीं की गई थी।
- चुनौतियां: उस समय परिवहन और संचार के साधनों की कमी के कारण यह जनगणना आंशिक रूप से ही सफल रही थी।
प्रथम नियमित जनगणना: लॉर्ड रिपन (1881)
वास्तविक और व्यवस्थित जनगणना की शुरुआत 1881 में लॉर्ड रिपन (Lord Ripon) के कार्यकाल में हुई।
- महत्व: इसे भारत की पहली ‘तुल्यकालिक’ (Synchronous) जनगणना कहा जाता है क्योंकि यह पूरे भारत में एक साथ आयोजित की गई थी।
- निरंतरता: 1881 के बाद से, प्रत्येक 10 वर्ष के अंतराल पर जनगणना की यह प्रक्रिया अनवरत रूप से चलती आ रही है।
स्थानीय स्वशासन और जनगणना का अंतर्संबंध
लॉर्ड रिपन को न केवल जनगणना को व्यवस्थित करने के लिए जाना जाता है, बल्कि उन्हें “स्थानीय स्वशासन का जनक” भी कहा जाता है। जनगणना से प्राप्त आंकड़ों ने ही स्थानीय निकायों को यह समझने में मदद की कि किन क्षेत्रों में विकास की अधिक आवश्यकता है।
स्वतंत्र भारत की पहली जनगणना (1951)
1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद, 1951 में स्वतंत्र भारत की पहली जनगणना आयोजित की गई। यह जनगणना विभाजन के बाद की विभीषिका और पुनर्वास की चुनौतियों के बीच एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी।
#IndianHistory #CensusOfIndia #LordRipon #GeneralKnowledge #UPSCPreparation #EducationalQuiz #IndianConstitution #LocalSelfGovernment #HistoryFacts #AaoKuchNayaSeekhe #DigitalEducation #BharatKiJan-ganana #EducationalTechnology