नए साल को मनाने का इतिहास बहुत पुराना है और यह समय-समय पर बदलता रहा है। इसकी शुरुआत को हम दो मुख्य भागों में बाँट सकते हैं: प्राचीन शुरुआत और 1 जनवरी वाली आधुनिक शुरुआत।
1. सबसे पहली शुरुआत (लगभग 4,000 साल पहले)
इतिहासकारों के अनुसार, नए साल का सबसे पुराना जिक्र मेसोपोटामिया (बेबीलोन) में मिलता है।
- कब: लगभग 2000 ईसा पूर्व (BC)।
- तारीख: उस समय नया साल 1 जनवरी को नहीं, बल्कि मार्च के मध्य में मनाया जाता था,
- जब दिन और रात बराबर होते थे (वसंत विषुव/Spring Equinox)।
- क्यों: बेबीलोन के लोग इसे ‘अकीतु’ (Akitu) उत्सव के रूप में मनाते थे, जो फसल की कटाई और नए जीवन का प्रतीक था।
2. 1 जनवरी की शुरुआत (रोमन काल)
आज हम जो 1 जनवरी को नया साल मनाते हैं, उसका श्रेय रोमन साम्राज्य को जाता है।
- शुरुआती कैलेंडर: रोम के पुराने कैलेंडर में केवल 10 महीने होते थे और साल मार्च से शुरू होता था।
- बदलाव: रोमन राजा नूमा पोंपिलियस ने कैलेंडर में ‘जनवरी’ और ‘फरवरी’ महीने जोड़े।
- जूलियस सीजर (46 BC): मशहूर रोमन सम्राट जूलियस सीजर ने कैलेंडर में सुधार किया और आधिकारिक तौर पर 1 जनवरी को नए साल की शुरुआत घोषित की। उन्होंने इसका नाम ‘जनस’ (Janus) देवता के नाम पर रखा, जिनके दो चेहरे थे—एक पीछे (बीते साल) और एक आगे (आने वाले साल) की ओर देखता था।
3. आधुनिक ‘ग्रेगोरियन कैलेंडर’ (1582)
मध्य काल में ईसाई धर्म के प्रभाव के कारण कई जगहों पर 25 मार्च या 25 दिसंबर को नया साल मनाया जाने लगा था। लेकिन 1582 में पोप ग्रेगरी XIII ने ‘ग्रेगोरियन कैलेंडर’ लागू किया, जिसने फिर से 1 जनवरी को नए साल के रूप में स्थापित किया। आज दुनिया के अधिकांश देशों में यही कैलेंडर माना जाता है।
कुछ अन्य रोचक तथ्य:
- चीनी नया साल: यह चांद की चाल पर निर्भर करता है और आमतौर पर 21 जनवरी से 20 फरवरी के बीच पड़ता है।
- हिंदू नव वर्ष: भारत में अलग-अलग राज्यों में यह ‘विक्रम संवत’ या अन्य कैलेंडरों के अनुसार चैत्र मास (मार्च-अप्रैल) में मनाया जाता है।
भारत में नया साल मनाने की शुरुआत
भारत में नया साल मनाने की परंपरा बहुत पुरानी और विविध है। भारत में “नया साल” कब शुरू हुआ, इसके दो पहलू हैं: एक जो हमारे प्राचीन कैलेंडरों पर आधारित है और दूसरा जो आधुनिक (1 जनवरी) समय से जुड़ा है।
1. प्राचीन शुरुआत (विक्रम संवत)
भारत में आधिकारिक तौर पर नया साल मनाने की सबसे पुरानी और प्रामाणिक परंपरा विक्रम संवत से मानी जाती है।
- कब हुई शुरुआत: यह लगभग 57 ईसा पूर्व (57 BC) में शुरू हुआ था।
- किसने की: उज्जैन के महान राजा विक्रमदित्य ने शकों (Sakas) पर अपनी विजय की याद में इसे शुरू किया था।
- विशेषता: यह एक चंद्र-सौर (Lunisolar) कैलेंडर है। इसके अनुसार नया साल ‘चैत्र’ महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (मार्च-अप्रैल) से शुरू होता है। आज भी उत्तर और पश्चिम भारत के अधिकांश हिंदू त्योहार इसी के आधार पर मनाए जाते हैं।
2. शक संवत (राष्ट्रीय कैलेंडर)
- शुरुआत: यह 78 ईस्वी (78 AD) में राजा कनिष्क के समय से माना जाता है।
- महत्व: भारत सरकार ने 1957 में इसे ही अपना ‘राष्ट्रीय कैलेंडर’ स्वीकार किया था। इसका भी नया साल चैत्र (22 मार्च) से ही शुरू होता है।
3. 1 जनवरी (ग्रेगोरियन कैलेंडर) की शुरुआत
भारत में 1 जनवरी को नया साल मनाने का चलन ब्रिटिश काल के दौरान शुरू हुआ।
- इतिहास: अंग्रेजों ने भारत में 1752 के आसपास आधिकारिक तौर पर ‘ग्रेगोरियन कैलेंडर’ लागू किया था।
- प्रसार: धीरे-धीरे वैश्विक व्यापार और शिक्षा के कारण यह पूरे भारत में लोकप्रिय हो गया। आज यह भारत में प्रशासनिक और वैश्विक कार्यों के लिए मुख्य कैलेंडर है।
भारत में “नया साल” कब-कब आता है?
भारत की सांस्कृतिक विविधता के कारण यहाँ साल में कई बार नए साल का जश्न मनाया जाता है
| पर्व का नाम | क्षेत्र | समय (महीना) |
|---|---|---|
| गुड़ी पड़वा / उगादी | महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश | मार्च – अप्रैल |
| बैसाखी | पंजाब | 13 या 14 अप्रैल |
| विशु | केरल | अप्रैल |
| पोइला बैसाख | पश्चिम बंगाल | अप्रैल |
| नवरोज | पारसी समुदाय | अगस्त (ज्यादातर) |
| बेस्टु वरस | गुजरात | दिवाली के अगले दिन |
नया साल मनाने के अलग अलग तरीके
पूरी दुनिया में नया साल मनाने के तरीके वहां की संस्कृति, मान्यताओं और खान-पान पर निर्भर करते हैं। कहीं लोग शोर मचाकर जश्न मनाते हैं, तो कहीं शांति और प्रार्थना के साथ नए साल का स्वागत किया जाता है।
यहाँ दुनिया के कुछ सबसे अनोखे और मशहूर तरीके दिए गए हैं:
1. भारत: विविध परंपराएं
भारत में नए साल का जश्न दो तरह से होता है:
- 1 जनवरी: शहरों में लोग पार्टियों, डांस, और आतिशबाजी (Fireworks) के साथ जश्न मनाते हैं।
- क्षेत्रीय नव वर्ष (जैसे उगादी, गुड़ी पड़वा): इस दिन लोग घरों की सफाई करते हैं, रंगोली बनाते हैं, घर के बाहर आम के पत्तों का तोरण लटकाते हैं और विशेष पकवान (जैसे पूरन पोली या उगादी पचड़ी) बनाते हैं।
2. स्पेन: 12 अंगूर खाने की परंपरा
स्पेन में एक बहुत ही दिलचस्प रिवाज है। जैसे ही रात के 12 बजते हैं, लोग घड़ी की हर टिक (घंटी) के साथ एक अंगूर खाते हैं।
- मकसद: कुल 12 अंगूर खाए जाते हैं, जो साल के 12 महीनों की खुशहाली और सौभाग्य का प्रतीक माने जाते हैं।
3. जापान: 108 बार घंटियाँ बजाना
जापान में नए साल (Oshogatsu) पर मंदिरों में 108 बार घंटियाँ बजाई जाती हैं।
- मकसद: बौद्ध मान्यताओं के अनुसार, यह इंसान की 108 बुराइयों और सांसारिक मोह-माया को दूर करने के लिए किया जाता है ताकि नए साल की शुरुआत शुद्ध मन से हो।
4. ब्राजील: सफेद कपड़े और समुद्र की लहरें
ब्राजील में लोग नए साल की पूर्व संध्या पर सफेद कपड़े पहनते हैं।
- रिवाज: लोग समुद्र के किनारे जाते हैं और आधी रात को पानी की 7 लहरों को लांघते हैं। हर लहर के साथ वे एक इच्छा (Wish) मांगते हैं।
5. स्कॉटलैंड: ‘फर्स्ट फुटिंग’ (First Footing)
यहाँ एक पुरानी परंपरा है कि आधी रात के बाद घर की दहलीज पार करने वाला पहला व्यक्ति कैसा है, यह तय करेगा कि पूरा साल कैसा बीतेगा।
- रिवाज: आमतौर पर एक लंबा, काले बालों वाला पुरुष जो उपहार (जैसे कोयला, नमक या बिस्किट) लेकर आए, उसे बहुत शुभ माना जाता है।
6. डेनमार्क: प्लेटें तोड़ना
डेनमार्क में लोग अपने दोस्तों और पड़ोसियों के दरवाजों पर पुरानी प्लेटें और बर्तन फेंककर तोड़ते हैं।
- मकसद: दरवाजे पर जितने ज्यादा टूटे हुए बर्तनों के ढेर होंगे, माना जाता है कि उस व्यक्ति के उतने ही ज्यादा अच्छे दोस्त हैं और उसका साल उतना ही अच्छा बीतेगा।
दुनिया भर में कुछ सामान्य तरीके:
- रेजोल्यूशन (Resolution): अपनी किसी बुरी आदत को छोड़ने या नई अच्छी आदत अपनाने का संकल्प लेना।
- आतिशबाजी (Fireworks): सिडनी के हार्बर ब्रिज से लेकर न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर तक, रोशनी के साथ साल का स्वागत करना।
- पारिवारिक भोजन: दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों में नए साल पर परिवार के साथ बैठकर खास ‘सूप’ या ‘डंपलिंग्स’ खाने का रिवाज है।
आप नए साल पर क्या करना सबसे ज्यादा पसंद करते हैं—घर पर शांति से समय बिताना या दोस्तों के साथ पार्टी ?
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