19वीं शताब्दी की शुरुआत में, वर्तमान केरल का हिस्सा रहे ‘त्रावणकोर साम्राज्य’ में जाति व्यवस्था अत्यंत कठोर थी। यहाँ निचली जातियों (विशेषकर ईझावा और पुलया समुदाय) पर कई अमानवीय प्रतिबंध लागू थे। इनमें से सबसे भयानक था ‘मुलाक्करम’ (Mulakkaram) या ‘स्तन कर’। इस नियम के अनुसार, निचली जाति की महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर अपने शरीर का ऊपरी हिस्सा ढकने का अधिकार नहीं था। यदि वे स्वयं को ढकना चाहती थीं, तो उन्हें अपनी छाती के आकार के आधार पर सरकार को कर चुकाना पड़ता था।
2. कौन थीं वीरांगना नंगेली ?
नांगेली अलाप्पुझा जिले के चेर्थला (Cherthala) की रहने वाली एक ईझावा महिला थीं। वह अपनी सुंदरता, साहस और न्यायप्रियता के लिए जानी जाती थीं। जब राज्य के कर अधिकारी (प्रवथियार) उनके घर कर वसूलने आए, तो उन्होंने इस अपमानजनक व्यवस्था को स्वीकार करने से मना कर दिया।
3. वह ऐतिहासिक बलिदान
कर अधिकारियों की बार-बार की प्रताड़ना से तंग आकर नांगेली ने एक अभूतपूर्व निर्णय लिया। जब अधिकारी उनके द्वार पर आए, तो उन्होंने कर के रूप में पैसे देने के बजाय, एक केले के पत्ते पर अपने दोनों स्तन काटकर उन्हें सौंप दिए। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण नांगेली की मृत्यु हो गई। उनके पति, चिरुकंदन, अपनी पत्नी के वियोग और इस क्रूरता को सहन नहीं कर सके और उन्होंने नांगेली की चिता में कूदकर प्राण त्याग दिए। यह इतिहास में किसी पुरुष के ‘सती’ होने का दुर्लभ उदाहरण है।
4. विद्रोह की ज्वाला और सामाजिक परिवर्तन
नांगेली के इस बलिदान ने पूरे त्रावणकोर में विद्रोह की आग लगा दी। इसके परिणामस्वरूप ‘चाणर विद्रोह’ (Channar Revolt) को बल मिला। अंततः, त्रावणकोर के राजा को इस अपमानजनक कर को समाप्त करना पड़ा और महिलाओं को कपड़े पहनने की स्वतंत्रता मिली। आज उस स्थान को ‘मुलाचीपरंबू’ (Mulachiparambu) के नाम से जाना जाता है।
🇮🇳 नांगेली गौरव क्विज 🏹
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