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​🎭 रस: परिभाषा, अंग एवं प्रकार (संपूर्ण परिचय)

​📖 रस की परिभाषा

​काव्य या साहित्य को पढ़ने, सुनने या देखने से जिस अलौकिक आनंद की प्राप्ति होती है, उसे ‘रस’ कहते हैं। आचार्य विश्वनाथ के अनुसार रस कविता की आत्मा है।

​किसी भी भाव को ‘रस’ की अवस्था तक पहुँचने के लिए इन चार तत्वों का होना अनिवार्य है:

अंग का नामविवरण (Description)उदाहरण
स्थायी भाववे भाव जो मनुष्य के हृदय में हमेशा सुप्त (सोयी) अवस्था में रहते हैं।रति, क्रोध, शोक, उत्साह
विभाववे कारण या परिस्थितियाँ जो सुप्त स्थायी भावों को जगाती हैं।सुंदर दृश्य, शत्रु की चेष्टाएँ
अनुभावभाव जागृत होने पर शरीर में होने वाली बाहरी क्रियाएँ।पसीना आना, रोना, मुस्कुराहट
संचारी भाववे भाव जो मन में पानी के बुलबुलों की तरह क्षण भर के लिए आते-जाते हैं।हर्ष, गर्व, शंका, ग्लानि

​भरतमुनि ने मूलतः 8 रसों की व्याख्या की थी, परंतु वर्तमान में मुख्य रूप से 11 रस माने जाते हैं:

क्रमरस का नाम (Ras)स्थायी भाव (Sthayi Bhav)भाव का अर्थ
1शृंगार रसरतिप्रेम (नायक-नायिका)
2हास्य रसहासहँसी या आमोद-प्रमोद
3करुण रसशोकगहरा दुःख या बिछड़ना
4वीर रसउत्साहजोश या पराक्रम
5रौद्र रसक्रोधगुस्सा या प्रतिशोध
6भयानक रसभयडर या दहशत
7वीभत्स रसजुगुप्साघृणा या अरुचि
8अद्भुत रसविस्मयआश्चर्य या अचंभित होना
9शांत रसनिर्वेदवैराग्य या शांति
10वात्सल्य रसवत्सलबच्चों के प्रति प्रेम
11भक्ति रसअनुरागईश्वर के प्रति प्रेम
  • रसराज: ‘शृंगार रस’ को सभी रसों का राजा (रसराज) कहा जाता है।
  • सूत्रधार: आचार्य भरतमुनि को रस शास्त्र का जनक माना जाता है।
  • संचारी भावों की संख्या: इनकी कुल संख्या 33 मानी गई है।

परीक्षा की दृष्टि से शृंगार, वीर, करुण और हास्य रस सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। अक्सर परीक्षाओं में इनकी परिभाषा और उदाहरण पूछे जाते हैं।

​यहाँ प्रमुख रसों का विवरण दिया गया है जो आपकी परीक्षा के लिए उपयोगी हैं:

1. शृंगार रस ❤️ (स्थायी भाव: रति)

परिभाषा: जहाँ नायक-नायिका के प्रेम, सौंदर्य और मिलन या बिछड़ने का वर्णन हो।

  • उदाहरण 1 (संयोग): “बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय।” 👩‍❤️‍👨
  • उदाहरण 2 (वियोग): “निसिदिन बरसत नैन हमारे।” 😭💔

​2. हास्य रस 😂 (स्थायी भाव: हास)

परिभाषा: किसी व्यक्ति की अजीब वेशभूषा, शक्ल या बातों को देखकर जब हँसी आए।

  • उदाहरण 1: “हाथी जैसी देह है, गैंडे जैसी खाल। तरबूजे सी खोपड़ी, खरबूजे से गाल॥” 🐘🍉
  • उदाहरण 2: “बंदर ने कहा बंदरिया से, चलो नहाने गंगा। बच्चों को छोड़ो घर में, होने दो हुड़दंगा॥” 🐒🌊

​3. वीर रस ⚔️ (स्थायी भाव: उत्साह)

परिभाषा: युद्ध, कठिन कार्य या दया के लिए जब मन में जोश और उत्साह भर जाए।

  • उदाहरण 1: “वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो। सामने पहाड़ हो, सिंह की दहाड़ हो॥” 🦁🚩
  • उदाहरण 2: “चढ़ चेतक पर तलवार उठा, रखता था भूतल पानी को।” 🐎🗡️

​4. करुण रस 😢 (स्थायी भाव: शोक)

परिभाषा: किसी प्रिय व्यक्ति के कष्ट या किसी अनहोनी के कारण मन में पैदा होने वाला दुख।

  • उदाहरण 1: “देखि सुदामा की दीन दसा, करुना करि कै करुनानिधि रोये।” 😭💧
  • उदाहरण 2: “अभी तो मुकुट बँधा था माथ, हुए कल ही हल्दी के हाथ।” 🥀🏚️

5. रौद्र रस 😡 (स्थायी भाव: क्रोध)

परिभाषा: जब दुश्मन या किसी गलत बात को देखकर मन में गुस्सा या क्रोध आए।

  • उदाहरण 1: “उस काल मारे क्रोध के, तन काँपने उनका लगा।” ⚡💢
  • उदाहरण 2: “रे नृप बालक काल बस, बोलत तोहि न सम्हार।” 🗣️🔥

6. भयानक रस 😨 (स्थायी भाव: भय)

परिभाषा: डरावनी चीज़ों या शिकारी को देखकर मन में जो डर पैदा होता है।

  • उदाहरण 1: “एक ओर अजगरहि लखि, एक ओर मृगराय। विकल बटोही बीच ही, पयो मूरछा खाय॥” 🐍🦁😵
  • उदाहरण 2: “नभ ते झपटत बाज लखि, भूल्यो सकल प्रपंच।” 🦅😱

💡 महत्वपूर्ण बिंदु (Quick Notes)

  • रसराज: ‘शृंगार रस’ को सभी रसों का राजा (रसराज) कहा जाता है।
  • सूत्रधार: आचार्य भरतमुनि को रस शास्त्र का जनक माना जाता है।
  • संचारी भावों की संख्या: इनकी कुल संख्या 33 मानी गई है।

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