शिक्षकों के लिए दो बड़ी खुशखबरी
अंतरजनपदीय तबादले का रास्ता साफ एवं वित्तविहीन शिक्षकों को भी कैशलेस इलाज की सुविधा
प्राथमिक शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादले का रास्ता हाईकोर्ट से साफ
लखनऊ: हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के आदेश से प्राथमिक शिक्षकों की अंतरजनपदीय तबादला नीति का रास्ता साफ हो गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक अपनी पसंद के किसी विशेष स्कूल में तैनाती का दावा नहीं कर सकते हैं।
अदालत ने कहा कि तबादला नीति के तहत शिक्षक के आवेदन पर जिला स्तर पर विचार किया जाएगा, लेकिन किसी खास विद्यालय में नियुक्ति का अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने तीन शिक्षकों की याचिकाएं खारिज कर दीं।
आरटीई और जिलेवार अनुपात के नियम
- पीट ने कहा कि RTE के तहत विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या तय करने वाला छात्र-शिक्षक अनुपात और तबादलों के लिए सरकार द्वारा तैयार जिलेवार अनुपात के उद्देश्य अलग-अलग हैं।
- तबादलों के लिए इसका उद्देश्य सिर्फ यह निर्धारित करना है कि किन जिलों में शिक्षकों को भेजा जा सकता है।
- इसमें उन पति-पत्नी के मामलों को भी शामिल किया गया है, जो दोनों बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक हैं और अलग-अलग जिलों में तैनात हैं।
वित्तविहीन विद्यालयों के 3 लाख शिक्षकों को भी कैशलेस इलाज
लखनऊ: राज्य सरकार राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) विद्यालयों के बाद अब वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों को भी मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का लाभ देगी। इससे प्रदेश के 35 हजार से अधिक विद्यालयों के 3 लाख से अधिक शिक्षकों और उनके आश्रितों को लाभ मिलेगा।
शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी ने सभी बीएसए को पत्र भेजकर निर्धारित प्रारूप पर जानकारी सत्यापित कर एक सप्ताह में भेजने को कहा है।
पंजीकरण एवं सत्यापन प्रक्रिया
- शिक्षकों को विकसित पोर्टल पर अपना व आश्रितों का ब्योरा आधार कार्ड के अनुसार भरना होगा।
- आवेदन के सत्यापन व अनुमोदन के लिए संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक को भेजा जाएगा।
- प्रधानाध्यापक की संस्तुति के बाद आवेदन बीईओ (BEO) और फिर बीएसए (BSA) के पास अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा।
